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SPG कानून में संशोधन का उद्देश्य बल को अधिक प्रभावी बनाना: जी किशन रेड्डी

By भाषा | Updated: December 3, 2019 15:47 IST

रेड्डी ने विशेष सुरक्षा समूह अधिनियम संशोधन विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिये रखते हुए उच्च सदन में कहा कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है ताकि एसपीजी कानून के मूल उद्देश्य को बहाल किया जा सके, बल को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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ठळक मुद्देसुरक्षा संबंधी खतरों के आधार पर यह सुरक्षा प्रदान की जाती है। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि अधिनियम में भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों या उनके परिवार के सदस्यों को एसपीजी सुरक्षा के लिए कोई अवधि निश्चित नहीं की गई है।

विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) कानून में संशोधन को समय की मांग बताते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि इस बल को और अधिक प्रभावी बनाने तथा कानून के मूल उद्देश्य को बहाल करने के उद्देश्य से एसपीजी अधिनियम संशोधन विधेयक लाया गया है। रेड्डी ने विशेष सुरक्षा समूह अधिनियम संशोधन विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिये रखते हुए उच्च सदन में कहा कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है ताकि एसपीजी कानून के मूल उद्देश्य को बहाल किया जा सके, बल को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

अतीत में इस कानून में हुए संशोधनों का जिक्र करते हुए रेड्डी ने कहा ‘‘प्रस्तावित संशोधन के तहत एसपीजी सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके साथ उनके आवास में रहने वालों के लिए ही होगी तथा सरकार द्वारा आवंटित आवास पर रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को पांच साल की अवधि तक एसपीजी सुरक्षा प्राप्त होगी । ’’

रेड्डी के अनुसार, इस स्तर के सुरक्षा कवर के लिए ‘‘विशेष’’ शब्दावली का उपयोग किया गया है और यह आदर्श रूप में प्रधानमंत्री के संदर्भ में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष सुरक्षा के दायरे में शारीरिक सुरक्षा के साथ साथ उनके विभाग, स्वास्थ्य, संचार एवं अन्य विषय भी शामिल हैं । गृह राज्य मंत्री ने कहा कि एसपीजी का गठन उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश के आधार पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में उनके शासनाध्यक्षों की सुरक्षा के मकसद से ऐसे ही विशिष्ट सुरक्षा इकाई बनाई गई हैं ।

रेड्डी ने कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एसपीजी का गठन 1985 में बनी एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश के आधार पर हुआ था। 1985-88 तक एसपीजी एक अधिशासी आदेश के तहत काम करता था। 1988 में एक कानून बना, जिसके तहत एसपीजी काम करने लगी। 1991, 1994, 1999 और 2003 में इसमें संशोधन हुआ। आज वह एक और संशोधन लेकर आए हैं।

गौरतलब है कि विधेयक की धारा 4 में एक उपधारा का प्रस्ताव किया गया है कि विशेष सुरक्षा समूह प्रधानमंत्री और उनके साथ रहने वाले उनके निकट परिवार के सदस्यों तथा किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री और उनके आवंटित आवास पर रह रहे निकट परिजनों को उस तरीख से, जब वह प्रधानमंत्री नहीं रह जाते हैं, पांच वर्ष तक की अवधि के लिये निकट सुरक्षा प्रदान करेगा। इसमें धारा 4 के खंड ‘‘ख’’ को शामिल किया गया है कि जहां किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री से निकट सुरक्षा हटा ली जाती है, वहां ऐसी निकट सुरक्षा ऐसे पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों से भी हटा ली जाए। उल्लेखनीय है कि प्रतिष्ठित एसपीजी कमांडो देश के प्रधानमंत्री, उनके परिजनों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार के करीबी सदस्यों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते रहे हैं।

सुरक्षा संबंधी खतरों के आधार पर यह सुरक्षा प्रदान की जाती है। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि अधिनियम में भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों या उनके परिवार के सदस्यों को एसपीजी सुरक्षा के लिए कोई अवधि निश्चित नहीं की गई है। अत: ऐसे व्यक्तियों की संख्या काफी अधिक हो सकती है जिन्हें एसपीजी सुरक्षा दी जानी है। इस परिप्रेक्ष्य में एसपीजी के संसाधनों, प्रशिक्षण और संबंधित अवसंरचना पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

यह देखते हुए कानून में संशोधन की जरूरत समझी गई जिसमें मुख्य आदेश पर ध्यान केंद्रित किया जा सके क्योंकि प्रधान के रूप में प्रधानमंत्री की सुरक्षा, सरकार, शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च महत्व की है। कार्यरत प्रधानमंत्री के लिये अत्यंत जरूरी महत्वपूर्ण सुरक्षा को मान्यता देते हुए विशेष सुरक्षा समूह के गठन के लिये अधिनियम बनाया गया था जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रधानमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों को निकट सुरक्षा प्रदान करना है। 

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