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केंद्र, दिल्ली सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप, लोगों को नहीं मिल रही राहत

By भाषा | Updated: May 3, 2021 20:53 IST

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नयी दिल्ली, तीन मई उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं तथा इससे लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है जिनका जीवन ऑक्सीजन की ‘‘पतली डोर’’ पर निर्भर है।

शीर्ष अदालत ने पूरे देश के संबंध में केंद्र को निर्देश दिया कि वह राज्यों के सहयोग से आपातकालीन परिस्थिति के लिए एक ‘बफर भंडार’ बनाए और भंडार स्थल को विकेंद्रित करे जिससे कि सामान्य आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने की स्थिति में ऑक्सीजन तत्काल उपलब्ध हो सके।

इसने केंद्र से चार दिन के भीतर चिकित्सीय ऑक्सीजन का आपातकालीन भंडारण तैयार करने को कहा।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी का ‘‘तत्काल’’ समाधान किया जाना चाहिए क्योंकि राजधानी में जमीनी स्थिति दिल दहला देने वाली है।

शीर्ष अदालत ने रविवार रात अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए 64 पन्नों के निर्णय में कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं तथा इससे लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है जिनका जीवन ऑक्सीजन की ‘‘पतली डोर’’ पर निर्भर है।

इसने कहा कि ऑक्सीजन के मुद्दे पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर लोगों के जीवन को खतरे में नहीं डाला जा सकता और उनकी रक्षा करना केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।

न्यायालय ने कहा कि स्थिति के समाधान के लिए दोनों एक-दूसरे का सहयोग करें।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनके पास इस संबंध में निर्देश हैं कि चिकित्सीय ऑक्सीजन की दिल्ली की मांग पूरी की जाएगी और राष्ट्रीय राजधानी को ऑक्सीजन की कमी की वजह से परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा की ओर से दिए गए इस आश्वासन का भी उल्लेख किया कि सहयोग की भावना से मुद्दे का पूर्ण समाधान निकाल लिया जाएगा।

इसने कहा कि मेहता ने भी आश्वासन दिया है कि अब से वह सुनिश्चित करेंगे कि ऑक्सीजन की कमी में सुधार किया जाए और दिल्ली सरकार को दिन-प्रतिदन के आधार पर उसकी प्रस्तावित मांग (भविष्य में जिसमें संशोधन किया जा सकता है) के अनुरूप आपूर्ति हो।

पीठ ने कहा, ‘‘हम इस अभिवेदन को स्वीकार करते हैं और सुनवाई की तारीख से दो दिन के भीतर अनुपालन का निर्देश देते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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