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सर्वदलीय बैठक में केंद्र के कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग की गई

By भाषा | Updated: February 2, 2021 21:10 IST

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चंडीगढ़, दो फरवरी पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा मंगलवार को आहूत एक सर्वदलीय बैठक में तीनों कृषि कानूनों को तत्काल वापस लेने की मांग करने के साथ ही संकट के समाधान में ‘‘अत्यधिक देरी’’ के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया।

दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को ‘‘प्रायोजित’’ करार देते हुए बैठक में लाल किले पर शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार लोगों की ‘‘शिथिलता और मिलीभगत’’ की न्यायिक जांच की भी मांग की गई।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने और इस मुद्दे और किसानों के आंदोलन से संबंधित अन्य मामलों को उठाने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजने का फैसला किया गया।

भाजपा ने जहां इस बैठक का बहिष्कार किया, वहीं आम आदमी पार्टी दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस के जवानों की तैनाती की अपनी मांग को लेकर इस बैठक से बाहर चली गई।

सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कांग्रेस, शिअद, लोक इंसाफ पार्टी, एसएडी (डेमोक्रेटिक), बसपा, भाकपा और माकपा ने बैठक में हिस्सा लिया।

अमरिंदर सिंह ने कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए आम सहमति बनाने के लिए यह बैठक बुलाई थी।

सभी दलों के प्रतिनिधियों ने किसान यूनियनों द्वारा अपनाये गए रुख की सराहना की और बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया।

शरारती तत्वों पर गणतंत्र दिवस के दिन लालकिले पर अप्रिय घटनाओं के माध्यम से ‘‘ऐतिहासिक’’ किसान आंदोलन को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि ये कृत्य ‘‘वास्तव में निंदनीय हैं और इसकी पूरी तरह से जांच किये जाने की आवश्यकता है।’’

प्रस्ताव में कहा गया है कि हालांकि इन घटनाओं को आंदोलनकारी किसानों, कृषि श्रमिकों और मीडियाकर्मियों सहित अन्य लोगों को प्रताड़ित करने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

इसमें केंद्र सरकार से कहा गया कि वह ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि आंदोलन में शामिल किसान और कृषि श्रमिक किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं हों।’’

प्रस्ताव के माध्यम से, पंजाब की पार्टियों ने केंद्र से कहा कि वह ‘‘किसानों, कृषि श्रमिकों, पत्रकारों और अन्य शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस ले और पुलिस या किसी अन्य एजेंसी द्वारा हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करें।’’

उन्होंने कहा कि लापता आंदोलनकारियों का पता लगाया जाना चाहिए और बिना किसी देरी के उन्हें उनके परिवारों से मिलाया जाना चाहिए।

26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हजारों ट्रैक्टर-सवार प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर पुलिस बैरिकेड तोड़ दिये थे, पुलिस से भिड़ गए थे और लालकिले की प्राचीर पर एक धार्मिक झंडा फहराया था।

प्रस्ताव में केंद्र से ‘‘न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों का वैधानिक अधिकार बनाने’’ का आह्वान किया गया।

प्रस्ताव में किसान नेता राकेश टिकैत की आंदोलन में उनके योगदान के लिए सराहना की गई और हरियाणा के किसानों द्वारा आंदोलन में पंजाब के किसानों को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया गया।

अमरिंदर सिंह ने शिअद के प्रेम सिंह चंदूमाजरा के इस सुझाव पर गौर करने का वादा किया कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह चल रहे किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को कर्ज माफी प्रदान करे।

बैठक में सभी दलों के प्रतिभागियों के सुझाव मिले जिसमें लाल किले की हिंसा मामले की एक स्वतंत्र जांच से लेकर संकट के समाधान के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ एक संयुक्त बैठक करना शामिल है।

बैठक की शुरुआत में कुछ पल का मौन रखकर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान तिथि तक, पंजाब के 88 किसान इन प्रदर्शनों में अपनी जान गंवा चुके हैं।

पंजाब कांग्रेस के प्रमुख सुनील जाखड़ ने दिल्ली की सीमाओं पर व्याप्त स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।

उन्होंने मीडिया में मंगलवार को आयी उन तस्वीरों की ओर इशारा किया जिसमें दिल्ली पुलिस के जवानों के लोहे की छड़ों के साथ खड़े होने के अलावा सड़कों पर कंक्रीट के बेरिकेड और कीलें लगी दिखायी गई हैं।

उन्होंने तस्वीरें को ‘‘भयावह’’ करार देते हुए कहा कि ये गलवान घाटी में खड़े चीनी सैनिकों की याद दिलाती हैं।

उन्होंने कहा कि लालकिले में जो हुआ वह निंदनीय था, लेकिन हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों और आंदोलन को बदनाम करने वालों की पहवान करने के लिए इसकी सही तरीके से जांच की जानी चाहिए।

जाखड़ ने लालकिले पर निशान साहिब फहराये जाने पर संघ परिवार द्वारा हो हल्ला मचाने को लेकर उस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आरएसएस जो दशकों तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने देता था, वह अब पंजाब में अलगाव की भावना उत्पन्न करने के लिए हंगामा कर रहा है।

आप सांसद भगवंत मान ने सुझाव दिया कि पंजाब के सभी दलों के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से जाना चाहिए और प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर उन पर दबाव बनाना चाहिए।

शिअद नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि लालकिले की हिंसा के पीछे ‘‘पूरी साजिश’’ का खुलासा करने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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