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भाजपा के अली अकबर ने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां छोड़ी

By भाषा | Updated: October 12, 2021 19:26 IST

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तिरुवनंतपुरम, 12 अक्टूबर केरल में भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले अली अकबर ने मंगलवार को प्रदेश समिति के सदस्य समेत पार्टी में सभी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया।

बहरहाल, अकबर ने कहा कि वह भाजपा के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के प्रदेश सचिव ए के नजीर के खिलाफ पार्टी की केरल इकाई के हाल के संगठनात्मक स्तर की कार्रवाई से ‘‘दुखी’’ हैं और उन्होंने संकेत दिया कि इसी के चलते उन्होंने पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दिया है।

फिल्म निर्देशक से नेता बने अकबर अभी मालाबार विद्रोह पर आधारित एक फिल्म पर काम कर रहे हैं। उत्तरी केरल में 1921 में हुए मालाबार विद्रोह को मोपला दंगे के नाम भी जाना जाता है।

अपने फैसले की घोषणा करते हुए अकबर ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट में कहा कि किसी आम आदमी का भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते हुए अपने ही परिवार और समुदाय द्वारा किसी मुस्लिम के साथ हुए अपमान और दुर्व्यवहार को समझना बहुत मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के राजनीतिक नेतृत्व को ऐसे दुखद फैसले लेते वक्त यह समझना चाहिए। नजीर के खिलाफ हाल में संगठनात्मक स्तर की कार्रवाई का जिक्र करते हुए अकबर ने भाजपा में सभी पदों को छोड़ने के अपने फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह अपने लिए बात नहीं कर रहे हैं बल्कि मुस्लिमों की बात कर रहे हैं जिन्हें सालों पहले ‘‘संघी शीर्षक’’ मिला।

के. सुरेंद्रन के नेतृत्व में प्रदेश इकाई ने पिछले हफ्ते नजीर के खिलाफ कार्रवाई की थी। नजीर ने प्रदेश इकाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि राज्य नेतृत्व चुनावों को अपनी जरूरतों के लिए निधि जुटाने के अवसर के तौर पर देख रहा है।

केरल में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान केंद्र में भाजपा नीत सरकार का बचाव करते हुए मुस्लिम समुदाय के पार्टी नेताओं के सामने आयी चुनौतियों का जिक्र करते हुए अकबर ने कहा कि उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए काम किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी विचारों को बरकरार रखते हुए पार्टी में काम करने वाले ऐसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। यह दुखद अनुभव है।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में अकबर ने कहा कि वह नजीर के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई से दुखी हैं। अकबर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर संघ परिवार की विचारधारा का बचाव करते हुए टीवी चर्चाओं में भाजपा के सबसे अधिक दिखायी देने वाले चेहरे हैं।

अकबर का फैसला पार्टी के मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के लिए झटका माना जा रहा है। ऐसा बताया जा रहा है कि केरल में भाजपा प्रदेश और राष्ट्रीय संगठनों में पदाधिकारियों के हाल के नामांकन को लेकर राज्य इकाई में विरोधी गुटों के असंतोष का सामना कर रही है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि नजीर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचा जा सकता था और पार्टी को नजीर तथा अकबर जैसे नेताओं को अहमियत देनी चाहिए जो केरल के मुश्किल राजनीतिक हालात में भाजपा के लिए लड़ें, वरना वह अल्पसंख्यक समुदायों का समर्थन जुटाने में नाकाम हो जाएगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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