राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति गलियारे में हलचल मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी है'। उन्होंने कहा 'कोर्ट का फैसला आखिरी है। अब इस मुद्दे पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी अगर किसी को लगता है तो उसे अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में ही रखनी चाहिए। अखिलेश ने आगे कहा 'हमारी अब जेपीसी की मांग नहीं है। यह मांग तब थी जब मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं आया था। '
इससे पहले शनिवार को ही पीएसी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घर प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने कहा 'लोक लेखा समिति के सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि अटॉर्नी जनरल और सीएजी को यह बात पूछने के लिये तलब करें कि राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट कब संसद में पेश की गई।'
कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा 'हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन यह जांच एजेंसी नहीं है। सिर्फ जेपीसी राफेल सौदे की जांच कर सकती है। सरकार को राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट के बारे में गलत तथ्य पेश कर सुप्रीम कोर्ट को 'गुमराह' करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। '
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की जांच से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने एकमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि इस सौदे में दखल देने का कोई कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील को क्लीन चिट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने रंजन गोगोई कहा, 'हम सरकार को 126 विमान खरीदने पर विवश नहीं कर सकते, और यह सही नहीं होगा कि कोर्ट केस के हर पहलू की जांच करे। राफेल की कीमत की तुलना करना सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है। इसे लेकर राहुल गांधी कॉन्फ्रेस करते हुए कहा राफेल में घोटाले की बात हम काफी सालों से कर रहे हैं।