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अखिलेश ने सभी पार्टियों के नेताओं से की कोरोना का टीका लगवाने की अपील, पहले कहा था-भाजपा की वैक्सीन नहीं लगवाएंगे

By अभिषेक पारीक | Updated: July 15, 2021 16:29 IST

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पार्टी के नेताओं से कोरोना का टीका लगवाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे इस वायरस से बचाव के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

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ठळक मुद्देअखिलेश यादव ने सभी पार्टी के नेताओं से कोरोना का टीका लगवाने की अपील की है। अखिलेश ने पार्टी नेताओं से कहा कि कोरोना से बचाव के लिए सतर्क और सजग रहना होगा। पहले उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों पर भरोसा है, लेकिन सरकार पर नहीं और वह ’भाजपा की वैक्सीन’ नहीं लगाएंगे।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पार्टी के नेताओं से कोरोना का टीका लगवाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे इस वायरस से बचाव के लिए पूरी तरह सतर्क रहें। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि पार्टी राज्य मुख्यालय में हुई पार्टी के विधान परिषद सदस्यों की बैठक में अखिलेश ने सभी से टीका लगवाने की अपील की है। अखिलेश ने सभी पार्टी नेताओं से कहा कि कोरोना संकट से बचाव के लिए हमें सतर्क और सजग रहना होगा। 

गौरतलब है कि गत जनवरी में जब कोविड-19 का टीका आया था तब अखिलेश ने कहा था कि उन्हें डॉक्टरों पर तो भरोसा है, लेकिन सरकार पर नहीं और वह ’भाजपा की वैक्सीन’ नहीं लगाएंगे। अखिलेश ने सरकार से जानना चाहा था कि गरीबों को मुफ्त में टीका कब लगवाया जाएगा। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की थी कि वह कोविड-19 टीके के सुरक्षित और असरदार होने के बारे में उपलब्ध डाटा सार्वजनिक करें। 

सपा प्रवक्ता ने बताया कि पार्टी विधान परिषद सदस्यों की बैठक में प्रदेश की राजनीतिक-आर्थिक स्थिति पर चर्चा के साथ वर्ष 2022 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की गई। साथ ही संकल्प लिया गया कि आगामी चुनावों में समाजवादी पार्टी अपनी पिछली सरकार के विकास कार्यों और उपलब्धियों को सामने रखकर चुनाव में उतरेगी। 

बैठक में कहा गया कि भाजपा ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा करना तो दूर उन पर तीन काले कानून लागू कर दिए और इसके खिलाफ हो रहे किसानों के आंदोलन को दबाने की साजिशें भी रची जा रही हैं। बैठक में विधान परिषद सदस्यों ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र विरोधी पार्टी है। उसकी मानसिकता एकाधिकारी प्रवृत्ति की है। इसके चलते संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है। 

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