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बिहार में प्रदर्शन से खुश एआईएमआईएम की उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने की योजना

By भाषा | Updated: November 11, 2020 15:20 IST

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हैदराबाद, 11 नवंबर बिहार विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पांच सीटें जीतने के बाद उत्साहित एआईएमआईएम अब उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी अपने पांव पसारने के लिए उत्सुक है।

मंगलवार की रात संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एमआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पार्टी पूर्वी राज्य के सीमांचल क्षेत्र में न्याय की लड़ाई लड़ेगी।

भाजपा का विरोध करने वाली पार्टियों के वोट बांटने के आरोप पर ओवैसी ने कहा कि वह एक राजनीतिक पार्टी चला रहे हैं और पार्टी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ेगी तो उन्होंने कहा, ‘‘ आपका मतलब है कि हमें चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। आप (कांग्रेस) महाराष्ट्र में शिवसेना की गोद में जा बैठे। क्या किसी ने पूछा कि आप चुनाव क्यों लड़ते हैं…मैं पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और देश में हर चुनाव लड़ूंगा। मुझे क्या चुनाव लड़ने के लिए किसी से मंजूरी लेने की जरूरत है।’’

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या इन स्थानों पर पार्टी अकेले या अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी।

ओवैसी ने कहा, ‘‘ एआईएमआईएम 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी। यह तो समय ही बताएगा कि हम किसके सहयोगी होंगे।’’

बिहार चुनाव में ‘एआईएमआईएम’ को पश्चिम बंगाल के नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा कथित तौर पर वोट कटवा पार्टी बोलने पर हमला करते हुए ओवैसी ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि उन्होंने (चौधरी ने) अपने विधानसभा क्षेत्र के मुस्लिमों के लिए क्या कल्याणकारी काम किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआईएमआईएम पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी…एआईएमआईएम बंगाल आ रही है।’’

कांग्रेस और अन्य पार्टियां एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी टीम’ बताती है और भाजपा विरोधी पार्टियों का वोट बांटने के लिए ओवैसी की आलोचना करती रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ओवैसी की एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा के तीसरे चरण के चुनाव में सीमांचल क्षेत्र में राजद नीत महागठबंधन के वोटों को भारी संख्या में प्रभावित किया।

ओवैसी की पार्टी बिहार में 20 सीटों पर चुनाव लड़ी, इनमें से ज्यादातर पर तीसरे चरण में सात नवंबर को मतदान हुआ था। एआईएमआईएम 'ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट' का हिस्सा है। इस गठबंधन का हिस्सा उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में चार करोड़ से ज्यादा मत डाले गए और इनमें से 1.24 फीसद वोट एआईएमआईएम को मिले हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था और उसे सिर्फ 0.5 फीसदी मत ही हासिल हो पाये थे।

वहीं एमआईएमआईएम का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अच्छा नहीं रहा था। तेलंगाना और बिहार के अलावा महाराष्ट्र में पार्टी के पास दो विधायक और एक सांसद है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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