VIDEO: बेंत के 12 प्रहार से तिलमिलाए बच्चे ने की पुलिस को शिकायत, सामवेद के शिक्षक पर बालकों के संरक्षण अधिनियम के तहत FIR

By बृजेश परमार | Updated: March 22, 2026 20:42 IST2026-03-22T20:42:43+5:302026-03-22T20:42:49+5:30

मामले में चिंतामन पुलिस ने छात्र की शिकायत पर शिक्षक शेवडे के खिलाफ बीएनएस एवं किशोर न्याय (बालकों के देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम 2015 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

Agonized by 12 lashes with a cane, a student files a complaint with the police; FIR registered against a Samaveda teacher under the Protection of Children Act | VIDEO: बेंत के 12 प्रहार से तिलमिलाए बच्चे ने की पुलिस को शिकायत, सामवेद के शिक्षक पर बालकों के संरक्षण अधिनियम के तहत FIR

VIDEO: बेंत के 12 प्रहार से तिलमिलाए बच्चे ने की पुलिस को शिकायत, सामवेद के शिक्षक पर बालकों के संरक्षण अधिनियम के तहत FIR

उज्जैन: चिंतामन रोड स्थित महिर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय में सामवेद के शिक्षक दत्तादास शेवडे ने यहां रहने वाले बच्चे के साथ बेंत से मारपीट की थी। छात्र को बेंत से बार-बार पीटने का वीडियो शनिवार को सामने आया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। मामले में चिंतामन पुलिस ने छात्र की शिकायत पर शिक्षक शेवडे के खिलाफ बीएनएस एवं किशोर न्याय (बालकों के देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम 2015 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

शनिवार को वायरल विडियो 15 मार्च की रात 10 बजकर 07 मिनिट का सामने आया था। इसमें करीब 51 सेकंड के इस वीडियो में शिक्षक ने नाबालिग छात्र पर बेंत से 12 प्रहार किए दिखाए गए थे। इस दौरान छात्र बूरी तरह से तिलमिला कर मचल रहा था। विडियो में एक कार्यालय कक्ष में बच्चे को पीटते हुए दिखाया गया है।

कर्नाटक का है शिक्षक

वीडियो में कमरे में मौजूद कुछ अन्य वयस्क बिना हस्तक्षेप किए घटना को देखते हुए दिखाई देते हैं। संस्थान से जुड़े सूत्रों ने वीडियो में दिख रहे शिक्षक की पहचान सामवेद शिक्षक दत्तदास शेवड़े के रूप में की थी। संस्थान से संबंधितों के अनुसार शिक्षक शेवडे कर्नाटक के निवासी हैं और संस्थान के सचिव भी। करीब 3 वर्ष पूर्व वर्ष 2022 में ही इनकी नियुक्ति यहां हुई है।

लगातार दुसरे दिन सचिव नो रिप्लाय-

महिर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान में हुए इतने बडे घटनाक्रम के बावजूद उसके सचिव वीरूपाक्ष जद्दीपाल मिडिया से चर्चा को तैयार नहीं हैं। शनिवार को उनसे मोबाईल संपर्क के प्रयास नोरिप्लाय के कारण सार्थक नहीं हो सके थे। रविवार को भी रिपोर्ट के दाखिल होने के बाद देर शाम तक प्रतिष्ठान के आवासीय विद्यालय को लेकर उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी।

सोते से उठाकर पीटा

प्रतिष्ठान के सूत्रों के अनुसार नाबालिग छात्र घटना के पहले ही सोने चला गया था। इसकी जानकारी शिक्षक को होने के उपरांत भी बच्चे को नींद से उठाकर कार्यालय कक्ष में बुलाया गया और सबके सामने ही बेंत से बेरहमी से पीटा गया।

पुलिस ने पूछताछ की और प्रकरण दर्ज किया

चिंतामण पुलिस स्टेशन के प्रभारी हेमराज यादव ने कहा कि वायरल विडियो के मामले में नाबालिग बच्चे की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित शिक्षक पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115,296 के साथ ही बालकों के संरक्षण का किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 (82) में प्रकरण दर्ज किया गया है। बकौल श्री यादव हमने विद्यालय परिसर में जाकर वहां अन्य बच्चों से भी घटना की पुष्टि की है। बच्चों को किसी भी प्रकार के भय मुक्ती का हवाला दिया है। पुलिस ने बच्चों को अपने नंबर भी उपलब्ध करवाए हैं।

ये कहती है अधिनियम की धारा 75 (82) -

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 बच्चों के प्रति क्रूरता के लिए सजा का प्रावधान करती है। यदि कोई व्यक्ति, जिस पर बच्चे की देखरेख की जिम्मेदारी है, बच्चे को प्रताड़ित करता है, छोड़ देता है या उपेक्षा करता है, तो उसे 3 साल तक की कैद, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

धारा 75 के मुख्य विवरणः

 अपराध का दायराः बच्चे के साथ शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना,परित्याग (छोड़ देना), दुर्व्यवहार, या जानबूझकर उपेक्षा करना, जिससे बच्चे को मानसिक या शारीरिक कष्ट हो।

दोषी व्यक्तिः कोई भी व्यक्ति जो बच्चे का वास्तविक भारसाधक या नियंत्रक है (जैसे माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक, या देखभाल संस्थान के कर्मचारी)।

दंड:सामान्य स्थितिः 3 वर्ष तक का कारावास और/या ₹1 लाख का जुर्माना।

गंभीर स्थिति (विकलांगता/बीमारी): यदि क्रूरता के कारण बच्चा शारीरिक रूप से अक्षम या मानसिक रूप से बीमार हो जाता है, तो सजा 10 साल तक की कठोर कैद और ₹5 लाख तक का जुर्माना हो सकती है।

विशेष परिस्थिति (संस्थान): यदि अपराध किसी बाल देखभाल संस्था के कर्मचारी द्वारा किया जाता है, तो 5 वर्ष तक की कैद और ₹5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। किसी बाल देखभाल संस्था के प्रभारी या उसमें कार्यरत कोई भी व्यक्ति, जो किसी बच्चे को अनुशासन सिखाने के उद्देश्य से शारीरिक दंड देता है, प्रथम अपराध के लिए दस हजार रुपये के जुर्माने का दंडनीय होगा और प्रत्येक पश्चात अपराध के लिए तीन महीने तक के कारावास या जुर्माने या दोनों का दंडनीय होगा।

Web Title: Agonized by 12 lashes with a cane, a student files a complaint with the police; FIR registered against a Samaveda teacher under the Protection of Children Act

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