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मायावती के यादव वोटों के बयान में कितना दम? यूपी में BJP ने जाटव-दलित वोटों में भी लगाई है सेंध

By निखिल वर्मा | Updated: June 4, 2019 13:47 IST

बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को नयी दिल्ली में लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के लिये होने वाले उपचुनाव अपने दम पर लड़ने का निर्णय लिया । उसके बाद सपा-बसपा गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गयी थीं। 

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ठळक मुद्देसपा-बसपा-रालोद ने मिलकर पिछला लोकसभा चुनाव लड़ा था, मगर यह गठबंधन ज्यादा कामयाब नहीं हो पाया। महागठबंधन का हिस्सा रही बहुजन समाज पार्टी ने 19.26 प्रतिशत वोट के साथ 10 सीटें जीती।

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन में दरार के संकेत दिख रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती के ऐलान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को अपनी राहें अलग करने के संकेत दे दिये। अखिलेश ने आजमगढ़ में कहा ''वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी। यही हमारी रणनीति है। हम यूपी को विकास की नयी ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।’’ 

उन्होंने गाजीपुर में कहा ''अगर गठबंधन टूटा है और जो बातें कही गयी हैं ... मैं उन पर बहुत सोच समझकर विचार करूंगा। जब उपचुनाव में गठबंधन है ही नहीं, तो सपा भी 11 सीटों पर राय मशविरा करके अकेले चुनाव लड़ेगी। अगर रास्ते अलग-अलग हैं तो उसका भी स्वागत है।'' पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान बसपा प्रमुख मायावती द्वारा सपा के साथ गठबंधन को फिलहाल रोकने के निर्णय के मद्देनजर खासे मायने रखता है।

मालूम हो कि बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को नयी दिल्ली में लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के लिये होने वाले उपचुनाव अपने दम पर लड़ने का निर्णय लिया था। उसके बाद सपा-बसपा गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गयी थीं। 

जानें  मायावती ने क्या कहा

मायावती ने मंगलवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए संवाददाताओं से कहा कि लोकसभा चुनाव में सपा का ‘आधार वोट’ यानी यादव समाज अपनी बहुलता वाली सीटों पर भी सपा के साथ पूरी मजबूती से टिका नहीं रह सका। उसने भीतरघात किया और यादव बहुल सीटों पर सपा के मजबूत उम्मीदवारों को भी हरा दिया। उन्होंने कहा कि खासकर कन्नौज में डिम्पल यादव, बदायूं में धर्मेन्द्र यादव और फिरोजाबाद में अक्षय यादव का हार जाना हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है। सपा में लोगों में काफी सुधार लाने की जरूरत है। बसपा कैडर की तरह किसी भी स्थिति के लिये तैयार होने के साथ-साथ भाजपा की नीतियों से देश और समाज को मुक्ति दिलाने के लिये संघर्ष करने की सख्त जरूरत है, जिसका मौका सपा ने इस चुनाव में गंवा दिया। 

मायावती ने कहा कि अगर उन्हें लगेगा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने सियासी कार्य करने के साथ-साथ अपने लोगों को 'मिशनरी' बनाने में कामयाब हुए तो हम लोग जरूर आगे भी मिलकर साथ चलेंगे। अगर वह इसमें सफल नहीं हुए तो हम लोगों का अकेले चलना ही बेहतर होगा। चूंकि प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कभी भी हो सकते हैं, इसलिये हमने अकेले ही ये चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 

सिर्फ यादव ही नहीं दलित वोट भी खिसके

मालूम हो कि सपा-बसपा-रालोद ने मिलकर पिछला लोकसभा चुनाव लड़ा था, मगर यह गठबंधन ज्यादा कामयाब नहीं हो पाया। प्रदेश में बीजेपी ने 49.56 प्रतिशत वोट हासिल किए। महागठबंधन का हिस्सा रही बहुजन समाज पार्टी ने 19.26 प्रतिशत वोट के साथ 10 सीटें जीती। महागठबंधन का ही हिस्सा समाजवादी पार्टी को 17.96 प्रतिशत वोट के साथ सिर्फ पांच सीटों पर जीत हासिल हुई। इसमें बसपा को 10 और सपा को पांच सीटें ही मिल सकी थीं। इस गठबंधन से सपा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।

लोकनीति-सीएसडीएस के पोस्ट पोल सर्वे के समाजवादी पार्टी का कोर वोटर माने जा रहे यादव समुदाय ने भी पहले की तरह महागठबंधन का साथ नहीं दिया। 23 प्रतिशत यादव मतदाता बीजेपी के पास चले गए। यह आंकड़ा 2017 के विधानसभा चुनाव से भी ज्यादा है जब सूबे में सपा-कांग्रेस ने गठबंधन किया था। बहुजन समाज पार्टी अपना जाटव वोटबैंक साधने में तो कामयाब रही हैं लेकिन नॉन जाटव दलित वोटबैंक में बीजेपी ने सेंध लगा ली। सर्वे के मुताबिक करीब 48 प्रतिशत नॉन जाटव दलितों ने बीजेपी प्रत्याशियों को वोट दिया।

सुरक्षित सीटों पर भी बीजेपी भारी

उत्तर प्रदेश में 17 सुरक्षित सीटें है। इनमें हाथरस, आगरा, शाहजहांपुर, हरदोई, मिश्रिख, इटावा, बाराबंकी, बहराइच, मछलीशहर और राबर्ट्सगंज में बीजेपी ने जीत हासिल की। नगीना, लालगंज में बसपा को जीत मिली। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी मुखिया मायावती को अपने ही गृह जिले गौतमबुद्ध नगर में एक बार फिर झटका लगा है। गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार महेश शर्मा ने बीएसपी प्रत्याशी को 2.80 लाख वोटों से हराया।

अगर सिर्फ यादव वोटों की बात की जाए तो 60 फीसदी मतदाता महागठबंधन के साथ रहे, अगर जाटव वोटों की बात करे तो वो भी सौ फीसदी महागठबंधन के पक्ष में नहीं पड़े है। जाटव वोटों में भी बीजेपी ने सेंध लगाई है।

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