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अफगान छात्रों को अपने परिवार की चिंता, वीजा अवधि बढ़ाने की मांग

By भाषा | Updated: August 17, 2021 11:43 IST

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तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद पुणे में पढ़ रहे युद्धग्रस्त देश के छात्र काफी चिंतित हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर अपने परिवार के सदस्यों से बात नहीं कर पा रहे हैं और कुछ छात्र लंबे वक्त तक यहां रहने के लिए अपने वीजा की अवधि बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। पुणे में अफगान छात्र संघ के अनुसार, शहर में अलग-अलग संस्थानों में पड़ोसी देश के करीब 3,000 छात्र पढ़ रहे हैं। अफगानिस्तान के छात्रों की अहम मांगों में से एक वीजा की अवधि बढ़ाना है जो जल्द ही खत्म हो रही है ताकि ये छात्र अपने देश में स्थिति स्थिर होने तक भारत में रह सके। अफगान छात्र संघ, पुणे के अध्यक्ष वली रहमान रहमानी ने सोमवार को कहा, ‘‘कुछ छात्र हैं जो घर पर अपने परिवार से बात कर पाए लेकिन कई और भी हैं जो अपने माता-पिता और परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि संघ इन छात्रों की परिवार से बात कराने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों की वीजा अवधि जल्द ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत सरकार से अफगानिस्तान में स्थिति में सुधार होने तक उनके वीजा की अवधि बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं।’’ फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एफआईएसए) के अध्यक्ष अब्बा उमर ने कहा, ‘‘मुश्किल के इस वक्त में हम अफगान छात्रों को हरसंभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं।’’ एक निजी विश्वविद्यालय से एमबीए कर रहे शुकरुल्ला अहमदी (25) ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान में स्थिति भयानक और डरावनी है। हमने इस तरह के हालात की कभी कल्पना नहीं की थी। काबुल से बमुश्किल 50 किलोमीटर दूर लोगार प्रांत में अपने गृह नगर में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह बंद है और मैं अपने परिवार से बात नहीं कर पाया हूं।’’ इस बीच बेंगलुरु और धारवाड़ में पढ़ रहे कई अफगान छात्र भी काफी चिंतित हैं। यहां एक निजी कॉलेज में पढ़ रहे हारून ने कहा, ‘‘हम घर पर अपने परिवारों को लेकर बहुत फिक्रमंद हैं। हालात बहुत खराब हैं। मैं उन्हें फोन नहीं कर पाया हूं लेकिन जब मैंने इंटरनेट के जरिए बात की तो उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं।’’ शहर में पढ़ रहे कुछ अन्य अफगान छात्रों ने बताया कि उन्हें अपने परिजनों की चिंता है। एक छात्रा ने कहा कि अमेरिका के समर्थन वाली सरकार में पिछले कुछ वर्षों में हालात सुधरे थे लेकिन अब भी फिर से तालिबान का शासन आ गया है, स्थिति खराब होगी। उसने कहा, ‘‘हम नहीं जानते कि तालिबान महिलाओं पर कौन से नियम लागू करने जा रहा है। यह हमारे लिए चिंता की बात है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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