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यौन उत्पीड़न का आरोपी व्यक्ति उच्च प्रतिष्ठा वाला नहीं हो सकता :रमानी ने अदालत में कहा

By भाषा | Updated: January 27, 2021 18:09 IST

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नयी दिल्ली, 27 जनवरी पूर्व केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर का जिक्र करते हुए पत्रकार प्रिया रमानी ने दिल्ली की एक अदालत से बुधवार को कहा कि यौन उत्पीड़न का आरोपी व्यक्ति उच्च प्रतिष्ठा वाला नहीं हो सकता।

रमानी, अकबर द्वारा उनके खिलाफ दायर एक आपराधिक मानहिन शिकायत का सामना कर रही हैं। दरअसल, रमानी ने अकबर पर आरोप लगाया है कि 20 साल पहले जब वह पत्रकार के तौर पर कार्यरत थी,तब उन्होंने (अकबर ने) उसके (रमानी के) साथ यौन दुर्व्यवहार किया था।

रमानी ने 2018 में सोशल मीडिया पर चली ‘मीटू’ मुहिम के मद्देनजर अकबर के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। रमानी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पर यह आरोप भी लगाया है कि उन्होंने उसके आरोपों को ‘‘मनगढंत’’ बताते हुए कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से गुजरने की अनदेखी की।

रमानी ने अपने खिलाफ अकबर की आपराधिक शिकायत की अंतिम सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार केसमक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन के जरिये यह दलील दी।

अकबर ने करीब दो दशक पहले यौन दुर्व्यवहार करने का उनके ऊपर आरोप लगाये जाने के जरिए उनकी कथित मानहानि करने को लेकर यह शिकायत दायर की थी।

जॉन ने कहा कि हालांकि यह सच है कि रमानी ने वोग पत्रिका में 2017 के आलेख में अकबर का नाम नहीं लिया था, लेकिन यह ‘मीटू’ मुहिम थी जिसने उन्हें अपने ट्वीट में उनके नाम का जिक्र करने की हिम्मत दी।

उन्होंने कहा, ‘‘महज इसलिए कि आरोपी(रमानी) ने 2017 में उनके नाम का जिक्र नहीं किया था, इससे मीटू अभियान के चरम दौर में लगाये गये आरोपों की विश्वसनीयता कम नहीं हो जाती है। ’’

जॉन ने कार्यस्थल पर 23 वर्षीय एक जूनियर के साथ कथित सहमति से बनाये गये संबंधों का भी हवाला दिय।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्पीड़न कुछ इसी तरह का होता है। यौन उत्पीड़न का आरोपी कोई भी व्यक्ति उच्च प्रतिष्ठा रखने वाला (व्यक्ति) नहीं हो सकता। ’’

उन्होंने अदालत की अवमानना के एक मामले में अकबर को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने का जिक्र करे हुए कहा, ‘‘अदालत की अवमानना को लेकर दोषी ठहराया गया व्यक्ति उच्च प्रतिष्ठा वाला नहीं हो सकता है। पुस्तक लिखना प्रतिष्ठा को परिभाषित नहीं करता है।’’

जॉन ने दलील दी कि 10 महिलाओं ने अकबर के खिलाफ आरोप लगाये थे।

उन्होंने कहा, ‘‘वह (रमानी) उनके नाम ले रही है और यदि यह वहशी वाले व्यवहार को प्रदर्शित नहीं करता है तो और कुछ भी नहीं कर सकता। ’’

अदालत इस विषय पर आगे की सुनवाई एक फरवरी को करेगी।

अकबर ने रमानी के खिलाफ 15 अक्टूबर 2018 को एक आपराधिक मानहानिक शिकायत दायर की थ्ज्ञी।

उन्होंने 17 अक्टूबर 2018 को केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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