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केरल से मुक्त कराए गए झारखंड के 32 श्रमिक और पांच बच्चे धनबाद पहुंचे

By भाषा | Updated: July 15, 2021 20:17 IST

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रांची, 15 जुलाई केरल में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखे गये झारखंड के 32 श्रमिकों एवं पांच बच्चों को मुक्त कराकर बृहस्पतिवार को धनबाद वापस लाया गया।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और आदिवासी कल्याण मंत्री मंत्री चम्पई सोरेन की पहल पर इन 32 श्रमिकों एवं पांच बच्चों को श्रम विभाग के राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष और फिया फाउंडेशन की संयुक्त पहल पर केरल से मुक्त कराया गया और ये सभी बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे धनबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे।

धनबाद पहुंची दुमका की श्रमिक अनिता मरांडी ने कहा, ‘‘हम केरल में बहुत तकलीफ में थे। हमारा आधार कार्ड ले लिया गया था और सताया जा रहा था। अब वहां से मुक्त होकर काफी अच्छा लग रहा है। अब मजदूरी करने अपने राज्य से बाहर दोबारा कभी नहीं जायेंगे।’’

उसने कहा, ‘‘हमारी गुहार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री चम्पई सोरेन ने सुनी। उन्हें बहुत- बहुत धन्यवाद।’’

प्रवक्ता ने बताया कि मुक्त हुए श्रमिक जून 2021 को दुमका से केरल गए थे। केरल पहुंचने पर उन्हें केरल के ईदुक्की (न्यू वुडलैंड्स) स्थित चाय बगान में काम करने के लिए भेजा गया। श्रमिकों को एक छोटे से कमरे में रखा गया था। इन श्रमिकों के मूल आधार कार्ड और उनसे यात्रा खर्च के नाम पर एक हजार रुपये ले लिए गए। श्रमिकों को इलायची के बगान में काम करने के नाम पर केरल भेजा गया था पर उन्हें जबरन चाय बागान में काम करने को कहा गया।

उन्होंने बताया कि श्रमिकों को प्रति दिन चार सौ रुपये देने की बात कही गयी लेकिन दुरूह भौगोलिक स्थिति के कारण श्रमिक वहां काम करने को तैयार नहीं थे। बावजूद उनसे जबरन काम कराया जा रहा था।

उन्होंने बताया कि काम करने के दौरान ही श्रमिकों को पीरमेड बेथेल प्लांटेशन, इदुक्की में कंपनी की तरफ से स्थानांतरित किया गया। श्रमिकों को कहा गया कि यदि वे वापस जाना चाहते हैं तो वे यात्रा में व्यय हुए 2,20,000 रुपये देकर अपना आधार कार्ड लेकर जा सकते हैं। इसके अलावा वहां के बस चालक ने भी किराया के रूप में प्रति व्यक्ति 6000 रुपये की मांग की।

उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री और मंत्री चंपई सोरेन ने राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को श्रमिकों को मुक्त कराने का आदेश दिया। इसके बाद श्रम विभाग एवं फिया फाउंडेशन की ओर से उन श्रमिकों की वापसी के लिए प्रयास शुरू किए गए।

इय मामले में दुमका उपायुक्त ने भी ईदुक्की के कलेक्टर से बात कर जिला स्तर पर पदाधिकारी नियुक्त किया। दुमका जिला प्रशासन और राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की ओर से केरल में टीम गठित कर मामले को सुलझाया गया।

उन्होंने बताया कि वास्तव में झारखण्ड के ही ठेकेदार ने इन श्रमिकों को ठगने का काम किया था जिसकी तलाश की जा रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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