2026 Rajya Sabha Elections: भाजपा-जदयू के पास 2-2 सीट?, 5वें सीट के लिए एनडीए और महागठबंधन में टक्कर
By एस पी सिन्हा | Updated: March 3, 2026 15:30 IST2026-03-03T15:28:45+5:302026-03-03T15:30:40+5:30
2026 Rajya Sabha Elections: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर सियासी गलियारों में जबर्दस्त चर्चा छिड़ी हुई है।

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पटनाः बिहार से राज्यसभा की 5सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए दोनों गठबंधनों की ओर से अंकगणित बैठाया जा रहा है। जिसमें चार सीटों पर एनडीए की जीत सुनिश्चित है। ऐसे में भाजपा और जदयू ने आपस में 2-2 सीटें बांट ली हैं। जबकि 5वें सीट के लिए एनडीए और महागठबंधन के बीच जोर आजमाइश होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के अनुसार जदयू की ओर रामनाथ ठाकुर को फिर से उच्च सदन भेजने का रास्ता साफ हो गया है। जबकि दूसरी सीट के लिए अभी तक कोई नाम तय नहीं किया जा सका है। इस सीट से हरिवंश नारायण सिंह, मनीष वर्मा और और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम की चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर सियासी गलियारों में जबर्दस्त चर्चा छिड़ी हुई है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक एंट्री पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि उनके (निशांत कुमार) आने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और युवाओं में उत्साह बढ़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद ही आगे उच्च स्तर पर उनकी भूमिका को लेकर निर्णय लिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद कहा जा रहा है कि होली के मौके पर निशांत कुमार की धमाकेदार एंट्री होने जा रही है। वहीं, जदयू के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यदि वे राजनीति में आते हैं तो पार्टी के सभी नेता उनका स्वागत करेंगे।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जदयू के भीतर एक बड़ा वर्ग चाहता है कि निशांत सक्रिय राजनीति में कदम रखें। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व को करना है। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निशांत कुमार सचमुच राजनीति में पदार्पण करेंगे या यह चर्चा केवल अटकलों तक ही सीमित रहेगी।
बता दें कि निशांत कुमार पिछले कुछ समय से लगातार विभिन्न कार्यक्रमों में दिखते हैं। पिछले दिनों ही वे इस्लामपुर के विधायक रूहेल रंजन के गृह प्रवेश के अवसर पर गए थे। इस दौरान जदयू और एनडीए के कई युवा विधायकों के साथ वे बैठकर बातें करते दिखे थे। यह एक खास तरह की तस्वीर थी जिसमें वे युवा विधायकों के बीच संवाद कर रहे थे।
इसी तरह नीतीश कुमार जन्मदिन पर 1 मार्च को निशांत ने पटना के महावीर मंदिर में पूजा की और बाद में पिता को प्रसाद खिलाते और जन्मदिन मनाते दिखे थे। उधर, बिहार की 5वीं सीट के लिए जहां एनडीए भी जोर आजमाइश कर रहा है, वहीं महागठबंधन ने भी मुकाबले में उतने की ठान ली है। एक सीट को लेकर एनडीए के अंदर रणनीति तय की जा रही है।
इस बीच राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं, हालांकि तेजस्वी ने अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है। रविवार को उन्होंने अपने विधायक दल की बैठक भी बुलाई थी। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है।
राजद के पास फिलहाल 25 विधायक हैं। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और आईपीपी के 1 विधायक को जोड़ने पर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। ऐसे में बहुमत के लिए एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक का समर्थन निर्णायक हो सकता है।
हालांकि, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है, जिससे राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी संशय बना हुआ है। ऐसे में अब सवाल यह है कि अगर एआईएमआईएम के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक वोटिंग में भाग नहीं लिए तो क्या होगा? तब एनडीए 5वीं सीट के लिए 38 तो महागठबंधन 35 विधायकों के वोट पर आकर ठहर जाएंगे।
बिहार विधानसभा में 243 विधायक हैं। अगर ये 6 विधायक वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते हैं तो मतदान करने वाले कुल विधायकों की संख्या 237 हो जाती है। इनमें से एनडीए के 202 विधायक हैं और महागठबंधन के पास केवल 35। किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 40 वोट पाने जरूरी होंगे।