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देश भर के 200 बच्चों ने विशेष सत्र में विधायक और मंत्रियों की भूमिका निभाई

By भाषा | Updated: November 14, 2021 21:06 IST

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जयपुर, 14 नवंबर देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार राजस्थान विधानसभा में बाल सत्र का आयोजन किया गया, जहां बच्चों ने ही विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मंत्री बनकर सत्र चलाया और सदस्य बने बच्चों के प्रश्नों का उत्तर दिया।

बाल दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा में यह ऐतिहासिक सत्र आयोजित किया गया जिसके प्रत्यक्ष साक्षी बने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विधानसभाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्रिगण और विधायक। विधानसभा के इस अनूठे सत्र में शून्यकाल और प्रश्नकाल का आयोजन किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में बालसत्र का यह आयोजन अविस्मरणीय रहेगा। देश की भावी पीढ़ी ने जिस सुव्यवस्थित तरीके और अनुशासन के साथ सत्र का संचालन किया है, उससे देश के नौजवानों को भी संदेश मिलेगा कि लोकतंत्र में उनकी क्या भूमिका हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मतदाता केवल वोट की ताकत ही नहीं रखता उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिये। इससे सरकार जवाबदेह होगी और शासन में पारदर्शिता आयेगी।

राजस्थान विधानसभा में चुने हुए विधासनसभा सदस्यों की जगह एक घंटे के सत्र के लिये देश भर से 200 बच्चों ने विधायक और मंत्रियों की भूमिका निभाई। इन बच्चों ने सदन की कार्यवाही विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विपक्ष के नेता, सत्ताधारी और विपक्षी दल के विधायकों की भूमिका में रहते हुए चलाई। सदन की कार्यवाही में प्रश्नकाल और शून्यकाल को भी शामिल किया गया।

विधानसभा सत्र की कार्यवाही सदन के नियमानुसार चलाई गई और बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभाई। शून्य काल में भी स्थगन और प्रक्रियाओं के नियम 295 के तहत विधायक बने बच्चों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पौत्री काश्विनी गहलोत, तश्वी शर्मा, सम्यक, लक्ष्य सेठिया, एकांश कंकाणी और जोगाराम आदि ने ज्वलंत समस्याओं को सदन के सामने रखा।

मुख्यमंत्री के रूप में हर्ष ने जबकि नेता प्रतिपक्ष के रूप में वैभवी गोयल ने भूमिका निभाई।

चिकित्सा सुविधाओं में सुधार से लेकर बच्चों से मोबाइल छुड़ाने के लिए खेल कूद सुविधाएं बढ़ाने और होटलों आदि में जूठा छोड़ने पर सज़ा देने जैसे विषयों पर सरकार से निर्णय लेने के लिए आग्रह किया।

बाल सत्र के दौरान सदन में बैठकर देश की भावी पीढ़ी ने जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस की। बाल विधायकों ने जब मंत्रियों से प्रश्न कर जवाब मागें और मंत्री बने बच्चों ने पूरी जिम्मेदारी और संजीदगी से उत्तर भी दिये। इससे विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मंत्रिगण भी चकित रह गए।

प्रश्न काल में विधानसभा अध्यक्ष बनीं जाह्नवी शर्मा ने विधायकों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया और संबंधित मंत्री को प्रश्न का जवाब देने के लिए भी। सदन में विपक्ष की नाराजगी, कुछ मांगों पर असहमति के बाद सदन से बहिर्गमन भी हुआ और अध्यक्ष के कहने पर वे सहज ही माने भी।

विधायकों के हर प्रश्न पर मंत्री भी जैसे पूरी तरह से तैयार होकर सदन में आए थे और पूरी गंभीरता से सभी तथ्यों के साथ सरकार का पक्ष रखा।

विधायक बने बच्चों ललिता बाबाल, जितेश डूडी, आस्था ममगाईं, दिनेश बेरड़ और अनन्या कौशिक आदि ने प्रश्नकाल में बालविवाह रोकथाम के लिए सरकार के प्रयास, किसानों की समस्याओं, बाल श्रम, बच्चों में पोषण की कमी, पर्यटन को बढ़ावा देने, परीक्षाओं के दौरान नेटबंदी, बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों, बिजली की किल्लत जैसे सवाल उठाए। सवालों के जवाब में संबंधित विभागों के मंत्रियों ने भी पूरी जिम्मेदारी के साथ सदन में आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष रखा।

मॉक सत्र के दौरान बच्चों ने सदन में सवाल पूछने से लेकर विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष धरना देने, बहिष्कार करने, हंगामा करने की भूमिका को पेश कर सत्र को जीवंत बना दिया। मादक पदार्थो की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बच्चों ने विपक्षी विधायकों की भूमिका में सदन में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष धरना (वेल में) दिया। जिसके बाद सदन के नेता ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिये आश्वासन दिया।

बच्चों के सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निभाने वाली लड़की विधानसभा सचिव की कुर्सी पर बैठी। सदन में अन्य बच्चे मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की सीटों और बेंचों पर बैठे।

मॉक सत्र शुरू होने से पहले बच्चों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जवाहर लाल नेहरु के जन्म दिवस को हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। उनके जन्म दिवस पर विधानसभा में बाल सत्र जैसा अनूठा आयोजन देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं को और मजबूत करने की दिशा में सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि यहां सदन में बैठे 200 बच्चे देश के करोड़ों बच्चों के प्रतिनिधि होने के साथ-साथ देश का भविष्य भी हैं। ऐसे जागरूक बच्चे ही भविष्य में देश की समस्याओं को दूर करने और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने आह्वान किया कि भावी पीढ़ी संविधान की मूल भावना को अंगीकार कर देश को आगे बढ़ाने में अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वहन करे।

समारोह के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में बालसत्र का आयोजन अविस्मरणीय रहेगा। देश की भावी पीढ़ी ने जिस सुव्यवस्थित तरीके और अनुशासन के साथ सत्र का संचालन किया है, उससे देश के नौजवानों को भी संदेश मिलेगा कि लोकतंत्र में उनकी क्या भूमिका हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मतदाता केवल वोट की ताकत ही नहीं रखता उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिये। इससे सरकार जवाबदेह होगी और शासन में पारदर्शिता आयेगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानसभा में कानून बनाते समय चर्चाओं के दौर कम होना चिंता का विषय है। कोई भी कानून बनाते समय उस पर चर्चा होनी जरूरी है क्योंकि इससे ही निष्कर्ष निकलते हैं। इसमें जनता की भागीदारी भी आवश्यक है, क्योंकि कानून उनके लिए ही होते हैं।

उन्होंने बच्चों के अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारें और उनकी प्रतिभा को पहचाने। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे उन्हें संसद की कार्यवाही भी दिखाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी ने कहा कि यह बाल सत्र संसदीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेगा और लोकतंत्र को लेकर बच्चों के मन की जिज्ञासाओं को भी हम सब भी समझ सकेंगे। डॉ. जोशी ने कहा कि भावी पीढी को सदन चलाने, प्रश्न पूछने और अनुशासन के साथ अपनी बात रखने का मौका दिया गया है।

उन्होंने बताया कि बालसत्र के लिए 15 राज्यों के 5,500 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसमें से 200 बच्चों का चयन किया गया।

इस अवसर पर प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चन्द कटारिया ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में बालसत्र का आयोजन ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पक्ष और विपक्ष के साझा प्रयासों से आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सदन में दोनों मिलकर अच्छे सुझावों को आगे बढ़ाते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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