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भारत और चीन के बीच शनिवार को होगी 12 वें दौर की सैन्य वार्ता

By भाषा | Updated: July 30, 2021 22:26 IST

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नयी दिल्ली, 30 जुलाई साढ़े तीन महीने से अधिक समय के अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच अगले दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता शनिवार को होगी, जिसमें पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले शेष स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया में कुछ प्रगति हासिल करने पर जोर रहेगा। सैन्य प्रतिष्ठान सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि भारत को हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा में सैनिकों को हटाने के संदर्भ में कोर कमांडरों की 12 वें दौर की वार्ता में एक सार्थक परिणाम निकलने की उम्मीद है।

सूत्रों ने बताया कि वार्ता का पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से चीन की ओर मोल्डो सीमा बिंदु पर पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे शुरू होने का कार्यक्रम है।

उल्लेखनीय है कि 11वें दौर की वार्ता नौ अप्रैल को एलएसी से भारतीय सीमा की ओर चुशुल सीमा बिंदु पर हुई थी और यह करीब 13 घंटे चली थी।

बारहवें दौर की वार्ता विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा अपने चीनी समकक्ष वांग यी को इस बात से दो टूक अवगत करा देने के करीब दो हफ्ते बाद हो रही है कि पूर्वी लद्दाख में मौजूदा स्थिति के लंबा खींचने का प्रभाव द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक रूप से पड़ता नजर आ रहा है।

दोनों विदेश मंत्रियों ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में 14 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक बैठक से अलग एक घंटे की द्विपक्षीय बैठक की थी।

इस बैठक में जयशंकर ने वांग से कहा था कि एलएसी पर यथास्थिति में कोई भी एकतरफा बदलाव भारत को स्वीकार्य नहीं होगा और पूर्वी लद्दाख में शांति एवं स्थिरता पूरी तरह से बहाल होने के बाद ही पूर्ण संबंध विकसित हो सकते हैं।

पिछले दौर की सैन्य वार्ता में दोनों पक्षों ने क्षेत्र में तनाव घटनो के बड़े लक्ष्य के साथ हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग में सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की थी। हालांकि, सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया में चीन की ओर से कोई गतिविधि नहीं की गई।

शनिवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन करेंगे, जो लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर हैं।

पिछले साल मई के बाद से पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले कई स्थानों पर दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध बना हुआ है।

दोनों पक्षों ने सिलसिलेवार सैन्य एवं कूटनीतिक वार्ता के बाद पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिणी किनारों से सैनिकों और हथियारों को हटाने की प्रक्रिया फरवरी में पूरी कर ली।

भारत इस बात पर जोर देता आ रहा है कि दोनों देशों के बीच संपूर्ण संबंधों के लिए देपसांग, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा में सैनिकों को हटाने सहित अन्य लंबित मुद्दों का समाधान आवश्यक है।

दोनों देशों के इस समय एलएसी पर संवेदनशील क्षेत्र में 50,000 से 60,000 सैनिक हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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