राम नाम सत्य है और सीएम माझी हाय-हाय?, 12 मरीजों की मौत, इस्तीफा दें स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग?, ओडिशा विधानसभा में बीजद और कांग्रेस ने हल्ला बोला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 20, 2026 15:42 IST2026-03-20T15:37:59+5:302026-03-20T15:42:36+5:30

अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को कुछ सवालों के जवाब देने की अनुमति दी तो विपक्षी विधायकों ने ‘‘राम नाम सत्य है’’ और ‘‘(मुख्यमंत्री) मोहन माझी हाय हाय’’ जैसे नारे लगाए।

12 patients died should Health Minister Mukesh Mahaling resign BJD and Congress protested in Odisha Assembly | राम नाम सत्य है और सीएम माझी हाय-हाय?, 12 मरीजों की मौत, इस्तीफा दें स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग?, ओडिशा विधानसभा में बीजद और कांग्रेस ने हल्ला बोला

पूर्व सीएम नवीन पटनायक

Highlightsसरकारी अस्पताल की ट्रॉमा केयर गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में 16 मार्च की सुबह आग लग गई थी।हंगामा कर रहे सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन तक चढ़ने की कोशिश की लेकिन मार्शल ने उन्हें रोक दिया। शोर-शराबे के बीच मंत्री का जवाब सुनाई नहीं दे सका।

भुवनेश्वर: ओडिशा के अस्पताल में आग लगने के कारण 12 मरीजों की मौत की घटना को लेकर विपक्षी दलों बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस द्वारा स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के इस्तीफे की मांग किए जाने के कारण ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा और शुक्रवार को लगातार चौथे दिन यह बाधित हुई। सदन में पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे प्रश्नकाल आरंभ होने के साथ ही हंगामा शुरू हो गया। तख्तियां लेकर और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गए और कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 12 मरीजों की मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग करने लगे। इस प्रमुख सरकारी अस्पताल की ट्रॉमा केयर गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में 16 मार्च की सुबह आग लग गई थी।

हंगामा कर रहे सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन तक चढ़ने की कोशिश की लेकिन मार्शल ने उन्हें रोक दिया। जब अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को कुछ सवालों के जवाब देने की अनुमति दी तो विपक्षी विधायकों ने ‘‘राम नाम सत्य है’’ और ‘‘(मुख्यमंत्री) मोहन माझी हाय हाय’’ जैसे नारे लगाए। शोर-शराबे के बीच मंत्री का जवाब सुनाई नहीं दे सका।

कार्यवाही चलाने में असमर्थ अध्यक्ष ने पहले सदन को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे तक और बाद में शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। उन्होंने चार दिन से जारी गतिरोध खत्म करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई। हालांकि, विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने साफ कर दिया कि जब तक मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा नहीं देते, वे विरोध नहीं रोकेंगे।

मलिक ने पूछा, ‘‘सरकारी अस्पताल में 12 मरीजों की मौत और 11 अन्य के झुलसने के लिए कौन जिम्मेदार है?’’ उन्होंने 2016 में बीजद शासन के दौरान एक निजी अस्पताल में इसी तरह की अग्निकांड त्रासदी के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अतनु एस नायक के इस्तीफे का हवाला दिया। मलिक ने कहा, ‘‘भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की नैतिकता कहां है? इस बार घटना एक सरकारी संस्थान में हुई है।’’

उन्होंने कहा कि विपक्ष न्याय के लिए लड़ाई लड़ेगा। भाजपा सदस्य अशोक मोहंती ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा। मोहंती ने कहा, ‘‘पिछली बीजद सरकार ने अपने 24 साल के कार्यकाल में एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अग्नि सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की।

अब दो साल के भीतर भाजपा सरकार ने एससीबी मेडिकल कॉलेज के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 800 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। चीजें रातोंरात ठीक नहीं हो सकती थीं।’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, पीड़ितों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा की है और न्यायिक जांच के आदेश भी दिए हैं। सदन में पिछले तीन दिन से इस मुद्दे पर ऐसी ही स्थिति देखी गई।

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