लाइव न्यूज़ :

World No Tobacco Day: स्मोकिंग करने वालों की बुरी हालत कर देता है कोरोना, आईसीयू, वेंटिलेटर तक की आ जाती है नौबत

By भाषा | Updated: May 31, 2020 06:16 IST

यह बीमारी फेफड़ो पर अटैक करती है और स्मोकिंग करने वाले लोगों के फेफड़े पहले से ही कमजोर होते हैं

Open in App

World No Tobacco Day: दुनिया को तंबाकू के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति सजग करने और इसके प्रयोग को हतोत्साहित करने के इरादे से विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहल पर हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। कोरोना संक्रमण के चलते दुनिया पर मंडराते मौत के साये के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को यह बीमारी होने का जोखिम अधिक रहता है और बीमारी की चपेट में आने पर उन्हें सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की जरूरत भी धूम्रपान न करने वालों के मुकाबले कहीं अधिक होती है। 

वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 15 साल या उससे अधिक उम्र के करीब 30 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें से लगभग 20 करोड़ लोग तंबाकू को गुटखा, खैनी, पान मसाला या पान के रूप में सीधे अपने मुंह में रख लेते हैं, जबकि दस करोड़ लोग ऐसे हैं जो सिगरेट, हुक्का या फिर सिगार में तंबाकू भरकर कश लगाते हैं और इसका धुआं अपने फेफड़ों में भर लेते हैं। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. वी के मोंगा ने बताया कि धूम्रपान करने वाले लोगों के शरीर में मुंह से फेफड़ों तक को सुरक्षा देने वाली प्राकृतिक आंतरिक प्रणाली क्षतिग्रस्त हो जाती है और उनके फेफड़ों की हवा को साफ करने की क्षमता भी समय के साथ कम होती जाती है।

ऐसे लोग सामान्य परिस्थितियों में भी लंबी सांस नहीं ले पाते हैं। ऐसे में जब ये लोग कोरोना के संपर्क में आते हैं तो इनपर बीमारी का असर अधिक होता है। इस बात पर सहमति जताते हुए कि धूम्रपान करने वालों को अन्य लोगों के मुकाबले सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की ज्यादा जरूरत होती है, डा. मोंगा ने कहा कि कोविड-19 मुख्यत: फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है, हालांकि अब तक यह पता नहीं लग पाया कि यह बीमारी फेफड़ों को कैसे प्रभावित करती है। 

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कोरोना का संक्रमण फेफड़ों पर डॉट्स बना देता है, जिससे उनमें ऑक्सीजन प्रवेश नहीं कर पाती और धूम्रपान के कारण पहले से कमजोर फेफड़े खून तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम नहीं कर पाते, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि धूम्रपान और तंबाकू के बने अन्य उत्पादों का सेवन करने वालों को कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक होता है। यही नहीं कोविड-19 से मरने वालों में दिल की बीमारी, कैंसर, सांस की बीमारी अथवा मधुमेह के शिकार लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या धूम्रपान करने वालों की भी होती है। 

दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. ए के झींगन ने बताया कि किसी भी गंभीर बीमारी के शिकार लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य लोगों के मुकाबले कम होती है। ऐसे में वह किसी भी बीमारी की चपेट में जल्दी आते हैं। मोटापा, दमा, मधुमेह, दिल की बीमारी और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के साथ ही धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए कोविड-19 के अधिक घातक होने की बड़ी वजह यही है कि इनका शरीर वायरस के हमले का प्रतिरोध नहीं कर पाता और उनके फेफड़ों में पानी भरने और विभिन्न अंगों के निष्क्रिय होने के कारण तमाम तरह के इलाज और वेंटिलेटर के इस्तेमाल के बावजूद बीमारी जानलेवा हो जाती है। 

जीएटीए की रिपोर्ट के अनुसार धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वाले आधे से ज्यादा लोग अपनी इस लत को छोड़ना चाहते हैं और प्रत्येक पांच में से दो लोग इसे छोड़ने की कोशिश भी करते हैं लेकिन अपने इरादे में कामयाब नहीं हो पाते। इस संबंध में डा. झींगन कहते हैं कि सिगरेट, बीड़ी, पान और गुटखा की सुलभ उपलब्धता इसे छोड़ने के इरादे में बाधक बन जाती है और कई बार मित्रों और सहयोगियों के दबाव में भी लोग इनका सेवन करते रहते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह तक इसका सेवन नहीं करने से इसकी तलब कम होने लगती है और व्यक्ति इसे आसानी से छोड़ पाता है। 

उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन को दोहरा अवसर करार देते हुए तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों से दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ इससे निजात पाने की अपील की।  

टॅग्स :कोरोना वायरससीओवीआईडी-19 इंडियाहेल्थ टिप्सइवेंट्स
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम

स्वास्थ्यक्या हीटवेव के दौरान आपकी किडनी को खतरा है? पीक गर्मी आने से पहले जानने हैल्थ टिप्स की ज़रूरी बातें

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्यLMOTY 2026: हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण?, डॉ. गौतम भंसाली को 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यऑटिज्म : समझ और स्वीकार्यता की जरूरत

स्वास्थ्यफोर्टिफाइड चावल : पोषण या स्वास्थ्य पर संकट ?

स्वास्थ्यचीनी का सेवन कम कीजिए और खाना बनाते समय तेल का प्रयोग 10 प्रतिशत तक घटाएं?, प्रधानमंत्री मोदी बोले-छोटे प्रयास करिए और मोटापे को दूर भगाएं?

स्वास्थ्यसाल 2024 में 34539 लोगों की मौत हार्ट अटैक?, दिल्ली पुलिस और iLive Connect में करार, हृदय बीमारी पर वार

स्वास्थ्य1 अप्रैल से महंगी होंगी दवाइयां; पेनकिलर और एंटीबायोटिक के लिए देने होंगे इतने रुपये, जानें कितनी ढीली होगी जेब