World Hearing Day: जम्‍मू कश्‍मीर में सुनने की क्षमता में बढ़ती कमी पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, जानें वजह

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 4, 2026 11:10 IST2026-03-04T11:10:22+5:302026-03-04T11:10:32+5:30

World Hearing Day: हमारे समुदायों में भी, हर तीसरे या चौथे व्यक्ति को सुनने में कुछ हद तक दिक्कत हो सकती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। 

World Hearing Day experts express concern over rising hearing loss in Jammu and Kashmir | World Hearing Day: जम्‍मू कश्‍मीर में सुनने की क्षमता में बढ़ती कमी पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, जानें वजह

World Hearing Day: जम्‍मू कश्‍मीर में सुनने की क्षमता में बढ़ती कमी पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, जानें वजह

World Hearing Day: यह एक चिंता की बात हो सकती है कि जम्‍मू कश्‍मीर में लोगों की सुनने की क्षमता लगातार कम होती जा रही है। हालांकि अभी इससे 0.2 प्रतिशत आबादी के प्रभावित होने के कारण सरकारी तौर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यह सच है कि जम्मू कश्मीर के हेल्थ एक्सपर्ट्स ने सुनने की क्षमता में कमी के बढ़ते बोझ पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 0.2 प्रतिशत आबादी सुनने की अक्षमता से प्रभावित है। मेडिकल प्रोफेशनल्स इसका मुख्य कारण उम्र बढ़ना और तेज शोर के लगातार संपर्क में रहना मानते हैं, और चेतावनी देते हैं कि सुनने की क्षमता में कमी अक्सर धीरे-धीरे होती है लेकिन समय पर देखभाल और जागरूकता से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। 

ईएनटी स्पेशलिस्ट डा नीलोफर जान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सुनने की क्षमता में कमी को मोटे तौर पर तीन तरह से बांटा गया है—कंडक्टिव, सेंसरिन्यूरल और मिक्स्ड। उन्होंने बताया कि कंडक्टिव हियरिंग लास बाहरी या बीच के कान से साउंड वेव्ज को भेजने में दिक्कतों की वजह से होता है। 

डा नीलोफर के बकौल, यह कान में मैल जमने, पानी जमा होने, इन्फेक्शन, कान के पर्दे में छेद होने या कान की हड्डियों में गड़बड़ी जैसी समस्याओं की वजह से हो सकता है। वे कहते थे कि ऐसे कई मामलों का इलाज हो सकता है। जबकि दूसरी ओर, सेंसरिन्यूरल हियरिंग लास कान के अंदर या आडिटरी नर्व में नुकसान से जुड़ा है।
उन्होंने बताया कि यह टाइप आमतौर पर लंबे समय तक तेज आवाज में रहने या नेचुरल एजिंग की वजह से होता है, जिसे प्रेस्बीक्यूसिस भी कहते हैं। इसे आमतौर पर हियरिंग एड्स से मैनेज किया जाता है।

एक और ईएनटी स्पेशलिस्ट डा तबस्सुम कहती थीं कि वर्ल्ड हियरिंग डे का मकसद कान और सुनने की क्षमता की देखभाल, जल्दी पता लगाना और इलाज तक पहुंच को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि अगर जल्दी पता चल जाए तो सुनने में दिक्कत के कई मामलों को रोका जा सकता है या असरदार तरीके से मैनेज किया जा सकता है। 

वे कहती थीं कि कम्युनिकेशन, सीखने और पूरी सेहत के लिए अच्छी सुनने की क्षमता जरूरी है। हमारे कान आवाजों को प्रोसेस करने के लिए दिमाग के साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे हमें अपने आस-पास की चीजों को समझने में मदद मिलती है।

उनका कहना था कि सुनने की क्षमता में कमी जन्मजात या एक्वायर्ड हो सकती है, जिसके आम एक्वायर्ड कारणों में शोर में रहना, उम्र बढ़ना, मेनिन्जाइटिस, मीजल्स और मम्प्स जैसे वायरल इन्फेक्शन, साथ ही आटोइम्यून कंडीशन शामिल हैं। 

अन्‍य ईएनटी डाक्टरों ने यह भी बताया कि सुनने की क्षमता में कमी के लक्षण अक्सर शुरू में पता नहीं चलते हैं और इसमें धीमी आवाज में बोलना, शोर वाली जगह पर बातचीत समझने में मुश्किल होना, बार-बार दूसरों से अपनी बात दोहराने के लिए कहना, डिवाइस का वाल्यूम बढ़ाना और सोशल दूरी शामिल हो सकते हैं।

गवर्नमेंट मेडिकल कालेज श्रीनगर के एक और ईएनटी स्पेशलिस्ट ने कहा कि उम्र बढ़ने या शोर के संपर्क में आने से कान के अंदर के नाजुक हेयर सेल्स को नुकसान होना एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि एक बार जब ये सेल्स खराब हो जाते हैं, तो साउंड सिग्नल दिमाग तक ठीक से नहीं पहुंच पाते, जिससे सुनने में दिक्कत होती है।

वे कहते थे कि कान के मैल में रुकावट, इन्फेक्शन, अचानक तेज आवाज, प्रेशर में बदलाव, या कान के पर्दे में चोट लगने से भी सुनने की क्षमता कम हो सकती है, जबकि टिनिटस और मेनियर डिजीज जैसी बीमारियां भी कान की सेहत पर असर डाल सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने जोर देकर कहा कि सुनने में कमी के कुछ रूपों – खासकर कंडक्टिव प्रकारों – का मेडिकल या सर्जिकल इलाज किया जा सकता है, जबकि दूसरों के लिए हियरिंग एड्स जैसे सहायक डिवाइस की जरूरत पड़ सकती है। 

गंभीर मामलों में, काक्लियर इम्प्लांट से काफी सुधार हो सकता है। बड़े असर पर चिंता जताते हुए, डा तबस्सुम का कहना था कि दुनिया भर में, लगभग चार में से एक व्यक्ति को कुछ हद तक सुनने में कमी का अनुभव होता है। हमारे समुदायों में भी, हर तीसरे या चौथे व्यक्ति को सुनने में कुछ हद तक दिक्कत हो सकती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। 

उन्होंने लोगों से रेगुलर ईएनटी चेक-अप को प्राथमिकता देने, ज्‍यादा देर तक तेज आवाजों के संपर्क में रहने से बचने और सुनने में दिक्कत के शुरुआती लक्षणों पर डाक्टर की सलाह लेने को कहा। उन्होंने कहा कि आज सुनने की क्षमता को बचाना, कल बेहतर बातचीत, समाज में शामिल होने और जीवन की क्वालिटी पक्का करने के लिए जरूरी है।

Web Title: World Hearing Day experts express concern over rising hearing loss in Jammu and Kashmir

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