संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की संवेदनशील पहल: थैलेसीमिया बच्चों को नि:शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट की राह

By मुकेश मिश्रा | Updated: February 24, 2026 17:27 IST2026-02-24T17:27:08+5:302026-02-24T17:27:08+5:30

मेदांता फाउंडेशन नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा आयोजित इस शिविर में इंदौर, उज्जैन व भोपाल संभाग के चिन्हित मरीजों की जांच हुई। 

Sensitive initiative of Divisional Commissioner Dr. Sudam Khade: Path to free bone marrow transplant for thalassemia children | संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की संवेदनशील पहल: थैलेसीमिया बच्चों को नि:शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट की राह

संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की संवेदनशील पहल: थैलेसीमिया बच्चों को नि:शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट की राह

इंदौर: थैलेसीमिया जैसी क्रूर बीमारी से जूझते मध्यप्रदेश के बच्चों को आज नई जीवन आशा मिली। "थैलेसीमिया बाल सेवा योजना" के तहत एमजीएम मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित नि:शुल्क एचएलए टाइपिंग जांच शिविर में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने न केवल व्यक्तिगत रूप से अवलोकन किया, बल्कि प्रभावित बच्चों व परिजनों से सीधा संवाद कर उनकी पीड़ा को महसूस किया। मेदांता फाउंडेशन नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा आयोजित इस शिविर में इंदौर, उज्जैन व भोपाल संभाग के चिन्हित मरीजों की जांच हुई। 

डॉ. खाड़े ने मेदांता के सीनियर हिमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सत्यप्रकाश यादव व सीएसआर हेड सुश्री कौसर किदवई से चर्चा कर तत्काल उपचार निर्देश दिए।इस योजना के तहत 14-15 लाख खर्च वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) को पूरी तरह नि:शुल्क कर रही है, जो गुरुग्राम मेदांता सेंटर में होगा। इस योजना के तहत पीड़ित बच्चे की  उम्र 12 वर्ष तथा पारिवारिक आय 8 लाख से कम होनी चाहिए।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट  के बाद बच्चे को फिर  रक्त चढ़ाने या दवा की जरूरत से नही होती। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी के अनुसार, थैलेसीमिया आनुवंशिक रक्त विकार है—हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया होता है। इस बीमारी के लक्षणों में थकान, पीलापन, चेहरे की हड्डी विकृति, पेट फूलना, सांस फूलना व धीमी वृद्धि शामिल। बिना इलाज के लिवर-हृदय तक क्षतिग्रस्त हो जाता है।

डॉ. सुदाम खाड़े ने शिविर में संवेदनशीलता पर जोर दिया—"हर बच्चा हमारा भविष्य है, जांच-उपचार में कोई ढिलाई नहीं।" ग्वालियर संभागायुक्त रह चुके डॉ. खाड़े ने जिलेवार चयन व रिपोर्टिंग तेज करने के आदेश दिए। इंदौर संभाग में उनकी सक्रियता—स्वास्थ्य से विकास तक—नई मिसाल बनी। एनएचएम और मेदांता हॉस्पिटल ने पहले चरण में 2000 से अधिक बच्चो बच्चों को लक्ष्य तय किया है।

Web Title: Sensitive initiative of Divisional Commissioner Dr. Sudam Khade: Path to free bone marrow transplant for thalassemia children

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