Jammu-Kashmir: जम्‍मू कश्‍मीर में कैंसर का बढ़ता बोझ, 2018 से कश्मीर में 50,000 से ज्‍यादा मामले सामने आए

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: April 7, 2026 09:57 IST2026-04-07T09:57:03+5:302026-04-07T09:57:25+5:30

Jammu-Kashmir: ग्रामीण इलाकों में जांच सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाना; और बचाव के उपाय अपनाना व जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है।

Rising cancer burden in Jammu and Kashmir Over 50000 cases reported in Kashmir since 2018 | Jammu-Kashmir: जम्‍मू कश्‍मीर में कैंसर का बढ़ता बोझ, 2018 से कश्मीर में 50,000 से ज्‍यादा मामले सामने आए

Jammu-Kashmir: जम्‍मू कश्‍मीर में कैंसर का बढ़ता बोझ, 2018 से कश्मीर में 50,000 से ज्‍यादा मामले सामने आए

Jammu and Kashmir: कैंसर के दानव से जम्‍मू कश्‍मीर को मुक्ति नहीं मिल रही है। यह सुरसा के मुख की भांति बढ़ता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ा इसकी पुष्टि करता है कि प्रदेश में इसके बढ़ने की दर देश में सबसे अधिक है। जो गंभीर चिंता का विषय बन गया चुका है। यह सच है कि कश्मीर में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों से सामने आई है। इन आंकड़ों के मुताबिक, 2018 से 2024 के बीच कश्मीर में कैंसर के 50,551 मामले सामने आए, जो इस बात पर जोर देते हैं कि बीमारी का जल्दी पता लगाना, समय पर इलाज करना और बचाव के लिए स्वास्थ्य उपाय अपनाना कितना जरूरी है।

एक्टिविस्ट सैयद आदिल द्वारा दायर एक 'सूचना का अधिकार' (आरटीआई) आवेदन से पता चला है कि 2015 से 2025 के बीच गवर्नमेंट मेडिकल कालेज जम्मू में कैंसर के 22,130 मामले दर्ज किए गए, जिसमें फेफड़ों का कैंसर इस इलाके में सबसे आम कैंसर के तौर पर सामने आया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर में कैंसर के मामलों में पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है: वर्ष 2018 में 6,649 मामले, 2019 में 6,374 मामले, 2020 में 6,113 मामले, 2021 में 7,090 मामले, 2022 में 7,846 मामले, 2023 में 8,124 मामले और 2024 में 8,355 मामले सामने आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि 2019-2020 के दौरान मामलों में थोड़ी कमी आई थी—संभवतः कोविड-19 महामारी के दौरान मामलों की पूरी जानकारी न मिल पाने के कारण—लेकिन कुल मिलाकर रुझान लगातार ऊपर की ओर ही रहा है, जिससे मेडिकल प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बढ़ गई है। 

पिछले एक दशक में फेफड़ों के कैंसर के 3,272 मामले सामने आए, जो सबसे ज्‍यादा थे; इसके बाद स्तन कैंसर (1,756 मामले) और मुंह के कैंसर (1,023 मामले) का नंबर आता है।

डाक्टरों ने बताया कि फेफड़ों का कैंसर अभी भी एक बड़ी जन-स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण धूम्रपान, दूसरों के धूम्रपान से निकलने वाले धुएं (सेकंड-हैंड स्मोक) के संपर्क में आना और पर्यावरण प्रदूषण है।
वैश्विक स्तर पर, सभी तरह के कैंसर में फेफड़ों के कैंसर की हिस्सेदारी लगभग 12.4 परसेंट है, जबकि भारत में यह लगभग 5.8 परसेंट है; जम्मू कश्मीर में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिलते हैं।

एक आन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) ने बताया कि तंबाकू का अधिक सेवन—जिसमें धूम्रपान और बिना धुएं वाले तंबाकू के रूप शामिल हैं—साथ ही घर के अंदर का प्रदूषण और काम से जुड़े खतरे, इस क्षेत्र में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मुख्य योगदान देते हैं।

विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते थे कि अगर कैंसर का पता शुरुआती चरण में ही चल जाए, तो मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है; पर जम्मू कश्मीर में कई मरीज बीमारी के काफी बढ़ जाने के बाद ही इलाज के लिए आते हैं।

डाक्टरों के बकौल, अगर कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो यह कोई जानलेवा सजा नहीं है। नियमित जांच, जागरूकता और सही समय पर डाक्टरों से सलाह लेने से कई जानें बचाई जा सकती हैं। वे सुझाव देते थे कि ज्‍यादा जोखिम वाले समूहों के लिए नियमित जांच; बीमारी के शुरुआती लक्षणों—जैसे कि बिना किसी वजह के वजन कम होना, लगातार खांसी आना, शरीर में गांठ बनना या असामान्य रूप से खून बहना—के बारे में जागरूकता फैलाना; ग्रामीण इलाकों में जांच सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाना; और बचाव के उपाय अपनाना व जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली में बदलाव करके कैंसर के काफी मामलों को होने से रोका जा सकता है। मुख्य सावधानियों में शामिल हैं: तंबाकू के सभी रूपों से बचना, शराब का सेवन न करना, फलों और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, पर्यावरणीय प्रदूषकों के संपर्क को कम करना और कुछ कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों (जैसे एचपीवी और हेपेटाइटिस बी) के खिलाफ टीकाकरण करवाना, साथ ही स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया को मजबूत करना शामिल हैं।

Web Title: Rising cancer burden in Jammu and Kashmir Over 50000 cases reported in Kashmir since 2018

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