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सावधान: अगर आप नीम के दातून से करते हैं दांत साफ तो आपको हो सकती है ये गंभीर बीमारी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 26, 2018 09:37 IST

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नीम की लड़की से दांत साफ करने पर कोढ़ होने की संभावना त्वचा रोग विशेषज्ञों की 'क्यूटीकॉन' परिषद के समापन समारोह में प्रशांत जाधव का वक्तव्य नागपुर महाराष्ट्र राज्य त्वचा रोग, गुप्तरोग व कुष्ठरोग विशेषज्ञों की वार्षिक परिषद 'क्यूटीकॉन-2018' का आयोजन किया गया था. तीन दिनों से चल रही इस परिषद का रविवार को समापन हुआ. समापन समारोह को संबोधित करते हुए त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत जाधव ने कहा कि नीम की लकड़ी से दांत घिसने पर दांत में कीड़े नहीं लगते. दांत मजबूत होते हैं, ऐसा माना जाता है. लेकिन एक शोध में यह बात सामने आई है कि नीम में मौजूद तत्वों के कारण मुंह के अंदर का रंग बनाने वाला पिगमेंट सेल्स या मेलैनोसाइट ग्रंथी को रंग बनाने में बाधा आती है. परिणामस्वरूप सफेद दाग यानी कोढ़ फैलने की संभावना होती है. इसे चिकित्सकीय भाषा में कान्टक्ट ल्यूकोडर्मा ओरल कैविटी कहा जाता है. त्वचा रोग में 50 फीसदी मरीज दाद के : डॉ. सापले त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.जे. सापले ने कहा कि हाल ही के दिनों में दाद के सर्वाधिक मरीज दिखाई देने लगे हैं. सामान्यत: त्वचा रोग में 50 फीसदी मरीज दाद के होते हैं. शुरुआत में इसे अनदेखा कर दिया जाता है. बाद में जब बीमारी बढ़ जाती है तो खुद ही दवा दुकान में जाकर क्रीम्स, लोशन का उपयोग किया जाता है. इसमें से अधिकांश क्रीम्स में स्ट्रांग स्टेराईड्स होते हैं. कुछ दिनों के लिए बीमारी कम जरूर हो जाती है लेकिन बाद में इस बीमारी के गंभीर होने की संभावना होती है. विदर्भ के अनेक गांवों में यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है.

डॉ. मेहता, डॉ. पतोडेकर जीवनगौरव पुरस्कार से सन्मानित महाराष्ट्र 'आईएडीवीएल' की ओर से दिया जाने वाला जीवनगौरव पुरस्कार इस वर्ष नागपुर के डॉ. बिपीन मेहता व नांदेड़ के डॉ. पी.डी. जोशी पतोडेकर को प्रदान किया गया. इस दौरान 'आईएडीवीएल' के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत सावजी, सचिव डॉ. के.ई. मुकादम, डॉ. किरण गोडसे, डॉ. शरद मुतालिक, डॉ. प्रशांत जाधव, डॉ. सुशील पांडे व डॉ. जय गुप्ता उपस्थित थे. सामान्य ज्ञान स्पर्धा में आईएमएस अश्विनी प्रथम परिषद में आयोजित की गईसामान्य ज्ञान स्पर्धा में 'आईएमएस अश्विनी हॉस्पिटल' की टीम विजेता रही. स्पर्धा में 21 टीमों ने भाग लिया था. समापन समारोह के दौरान डॉ. जयेश तुमाने ने 'स्कीन इमरजेंसी' में किए जाने वाले उपचार, गर्भवती महिलाओं को चिकन पॉक्स या हेर्पेस होने पर क्या करना चाहिए, इस पर डॉ. मराठे ने मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम की सफलतार्थ आयोजक सचिव डॉ. रिजवान हक सहित डॉ. विनोद तितरमारे, डॉ. मोहन शेंदरे, डॉ. जयेश मुखी, डॉ. मनोज वाघमारे, डॉ. नितिन बरडे, डॉ. प्राची मत्ते, डॉ. जयंत लांजेवार सहित सभी पदाधिकारियों ने प्रयास किया.

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