जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ सरकार सख्त, 70 हजार लोगों की पहचान; रोकथाम के उपाय बढ़ाने की तैयारी
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 20, 2026 12:17 IST2026-02-20T12:17:44+5:302026-02-20T12:17:47+5:30
Jammu-Kashmir News: सरकारी तौर पर बताया गया है कि मेडिकल कालेजों और जिला अस्पतालों में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज के जरिए ओपीडी और आईपीडी केयर, इमरजेंसी इलाज और ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी जैसी मुफत सर्विस दी जा रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ सरकार सख्त, 70 हजार लोगों की पहचान; रोकथाम के उपाय बढ़ाने की तैयारी
Jammu-Kashmir News: जम्मू कश्मीर सरकार ने कश्मीर में नशा करने वालों की गिनती कर ली है। हालांकि उनकी संख्या पर आम नागरिकों को यकीन नहीं है। पर सरकार कहती है कि प्रदेश में 70 हजार लोग नशा कर रहे हैं जिनमें से 50 हजार के करीब हेरोइन जैसे नशे का इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल जम्मू कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया कि कश्मीर में करीब 70,000 लोग नशे की लत में शामिल हैं, जिनमें से करीब 50,000 हेरोइन इस्तेमाल करने वाले हैं, जो ज्यादातर नसों के जरिए नशा लेते हैं।
विधायक जाविद रियाज के एक सवाल का जवाब देते हुए, हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने कहा कि देश के कई दूसरे हिस्सों की तरह, केंद्र शासित प्रदेश भी नशीली दवाओं और साइकोट्रोपिक पदार्थों के खतरे का सामना कर रहा है, जिससे गंभीर सामाजिक और पब्लिक हेल्थ से जुड़ी चिंताएं पैदा हो रही हैं।
सरकार का कहना था कि 2022 में हेल्थ और सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट द्वारा कश्मीर के 10 ज़िलों में किए गए एक जाइंट सर्वे के मुताबिक, लगभग 70,000 लोग नशे की लत में शामिल पाए गए।
सरकार ने कहा कि उसने इस मुद्दे से निपटने के लिए कई तरह की स्ट्रैटेजी अपनाई है, जिसमें जागरूकता कैंपेन, रोकथाम के उपाय, मजबूत तरीके और इलाज और रिहैबिलिटेशन सुविधाओं को बढ़ाना शामिल है।
पूरे केंद्र शासित प्रदेश में जिला अस्पतालों, सरकारी मेडिकल कालेजों और पुलिस द्वारा चलाई जाने वाली सुविधाओं में नशा छुड़ाने और रिहैबिलिटेशन सेंटर का एक नेटवर्क बनाया गया है। जवाब के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में अब तक करीब 69,000 मरीज़ों को अलग-अलग नशा मुक्ति इलाज सेंटरों पर इलाज और रिहैबिलिटेशन सर्विस मिली हैं।
सरकारी तौर पर बताया गया है कि मेडिकल कालेजों और जिला अस्पतालों में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज के जरिए ओपीडी और आईपीडी केयर, इमरजेंसी इलाज और ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी जैसी मुफत सर्विस दी जा रही हैं। अभी, 1,864 क्लाइंट रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 358 एक्टिव बेनिफिशियरी इलाज करवा रहे हैं।
मेंटल हेल्थ और एडिक्शन मेडिसिन क्लीनिक भी चालू कर दिए गए हैं, जबकि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन और कम्युनिटी सेटिंग्स में अलग-अलग नेशनल प्रोग्राम के तहत अवेयरनेस और जानकारी, एजुकेशन और कम्युनिकेशन कैंपेन चलाए जा रहे हैं।
ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट, 1940 को लागू करने वाले ड्रग कंट्रोल आर्गनाइज़ेशन ने दिसंबर 2025-26 तक 518 अवेयरनेस प्रोग्राम किए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि काउंसलिंग और मदद देने के लिए हेल्पलाइन 104 को पब्लिश किया गया है।
सरकार द्वारा दिए गए जवाब में यह भी कहा गया है कि नशा मुक्ति काउंसलिंग और रिहैबिलिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, खासकर ग्रामीण और कमजोर इलाकों में, और स्पेशल केयर के लिए इनपेशेंट फैसिलिटीज को बढ़ाने के लिए।