यूपी में होटल-रेस्टोरेंटकर्मियों, मेडिकल छात्रों की टीबी जांच हुई अनिवार्य, हर साल बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, बीते साल मिले 6.90 लाख मरीज

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 19, 2026 15:00 IST2026-01-19T15:00:34+5:302026-01-19T15:00:44+5:30

यूपी में टीबी के मरीजों की बढ़ी संख्या सिर्फ यूपी के लिए ही चिंता का कारण नहीं है, केंद्र सरकार भी इसे लेकर परेशान है क्योंकि देश को टीबी मुक्त करने में अब यूपी सबसे बड़ी बाधा बन गया.

In Uttar Pradesh, TB testing has been made mandatory for hotel and restaurant workers and medical students. The number of TB patients is increasing every year, with 690,000 cases reported last year | यूपी में होटल-रेस्टोरेंटकर्मियों, मेडिकल छात्रों की टीबी जांच हुई अनिवार्य, हर साल बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, बीते साल मिले 6.90 लाख मरीज

यूपी में होटल-रेस्टोरेंटकर्मियों, मेडिकल छात्रों की टीबी जांच हुई अनिवार्य, हर साल बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, बीते साल मिले 6.90 लाख मरीज

लखनऊ: क्षय रोग (टीबी) एक संक्रामक रोग है, जो जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कारण होता है. आमतौर पर यह फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन ऐसे मामले हैं जहां यह रीढ़ और मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है. फिलहाल यूपी की सरकार उस बीमारी को प्रदेश से खत्म करने के लिए चिंतित है. इसकी वजह राज्य में बढ़ रहे टीबी के मरीज. वर्ष 2022 में पांच लाख मरीज टीबी से पीड़ित थे. 

वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर  6.24 लाख हो गई और वर्ष 2025 में 6.90 लाख टीबी मरीजों की पहचान की गई. जबकि बीते साल ही यूपी को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था. ऐसे में अब प्रदेश को टीबी मुक्त करने के लिए सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप से करने का फैसला किया गया है. इसके अलावा टीबी के सभी गंभीर मरीज का चेस्ट एक्स-रे किए जाने का निर्देश सभी अस्पतालों को दिया गया है.

यूपी को टीबी मुक्त करने के लिए लिए गए फैसले :

यूपी में टीबी के मरीजों की बढ़ी संख्या सिर्फ यूपी के लिए ही चिंता का कारण नहीं है, केंद्र सरकार भी इसे लेकर परेशान है क्योंकि देश को टीबी मुक्त करने में अब यूपी सबसे बड़ी बाधा बन गया. इस राज्य में ही सबसे अधिक टीबी के मरीज हैं. इस कारण से गत शनिवार को यूपी में अगले माह से शुरू होने वाले टीबी मुक्त यूपी के अभियान को लेकर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में बैठक हुई. 

इस बैठक में सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों और जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कालेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य टीबी जांच कराने पर सहमति बनी. राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की भी नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप करने का फैसला भी बैठक में लिया गया. 

इन फैसलों को लेकर अमित घोष का कहना है कि इससे संक्रमण के किसी भी जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा. उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार एक बार फिर टीबी के खात्मे के लिए प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष सघन रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रही है. फरवरी में शुरू हो रहे अभियान में जनप्रतिनिधियों व विभिन्न विभागों के सहयोग से अधिकतर मरीजों को खोज कर उनका इलाज शुरू करने की रणनीति है. 

इसके अलावा टीबी के सभी गंभीर मरीज का चेस्ट एक्स-रे किए जाने का निर्देश सभी अस्पतालों को दिया गया है. इसके लिए राज्य के 58 जिलों में 180 एक्स-रे मशीनों में फ्री एआई आधारित जांच तकनीक को जोड़ा गया है. इसके अलावा टीबी मरीजों के इलाज के लिए उन्हें गोद लेने की योजना भी शुरू की गई है. नि:क्षय मित्र पहल के तहत नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन ने बुलंदशहर में 7,593 टीबी मरीजों को गोद लिया है, जो कि प्रदेश में सबसे अधिक है.

इन जगहों पर होगी टीबी मरीजों की खोज 

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य एवं जिला टीबी फोरम की प्रत्येक माह बैठक करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश भी दिए. संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने और टीबी चिह्नित रोगियों का गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना विलंब के उपलब्ध कराने को कहा है. यह भी कहा है कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे. यह केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. 

उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए टीबी चैंपियंस की भागीदारी को सशक्त बनाने और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए इंटरनेट मीडिया एवं अन्य संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग के भी निर्देश दिए हैं. फिलहाल इन निर्देशों के तहत अब यूपी में टीबी की उच्च जोखिम श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों की खोज मलिन बस्तियों में रहने वाले, वृद्धाश्रम में रहने वाले, निर्माणाधीन भवन, ईंट भट्टे पर कार्य करने वाले और जेल के बंद कैदियों की बीच भी होगी.
 

Web Title: In Uttar Pradesh, TB testing has been made mandatory for hotel and restaurant workers and medical students. The number of TB patients is increasing every year, with 690,000 cases reported last year

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