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एक्सपर्ट्स का दावा, फेफड़ों के टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकता है 'डेल्टा प्लस, फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए करें 8 काम

By उस्मान | Updated: June 28, 2021 09:03 IST

जानिये कोरोना का यह घातक फेफड़ों को किस हद तक प्रभावित कर सकता है

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ठळक मुद्देफेफड़ों को प्रभावित कर रहा है डेल्टा प्लसफेफड़ों को मजबूत बनाना जरूरीकुछ घरेलू उपाय आ सकते हैं आपके काम

कोरोना वायरस शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है. इसके नए रूप और ज्यादा घातक बताए जा रहे हैं. फिलहाल सभी के लिए कोरोना वायरस का 'डेल्टा प्लस' वैरिएंट चिंता का विषय बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेल्टा प्लस कोरोना के अन्य रूपों की तरह फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। यह जानकारी नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ एनके अरोड़ा ने दी है। 

ऊन्होने कहा है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट में फेफड़ों की समस्याओं का कारण बन सकता है लेकिन यह किस हद तक नुकसान पहुंचा सकता है, इस पर अभी अध्ययन हो रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर अरोड़ा ने कहा कि कोरोना के अन्य रूपों की तुलने में 'डेल्टा प्लस' फेफड़ों में म्यूकोसल लाइनिंग को अधिक प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह कितना नुकसान पहुंचाता है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

उन्होंने कहा है कि कोरोना के इस रूप को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह नहीं कहा जा सकता है कि यह प्रकार अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनेगा या अधिक संक्रामक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि यह बीमारी आम तौर पर उन सभी में हल्की होती है, जिन्होंने कोविड-19 वैक्सीन की एक या दोनों खुराक ली है।

डॉक्टर अरोड़ा ने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के पहचाने गए मामलों की संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि ऐसे व्यक्ति जिन्हें कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं, वो वायरस फैला सकते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ट्रांसमिशन दक्षता को समझने के लिए प्रसार पर बहुत करीबी नजर रखने की जरूरत है।

फेफड़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के उपाय

हल्की एक्सरसाइज करें व्यायाम, जैसे तेज चलना, दौड़ना, तैरना, या साइकिल चलाना आदि से सांस लेने की क्षमता बढ़ती है और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करते हैं। फेफड़ों की क्षमता में सुधार करने के लिए आपको भारी प्रशिक्षण या उच्च तीव्रता वाले अभ्यासों की जरूरत नहीं है।

गहरी सांस लेने की तकनीक ट्राई करेंगहरी सांस लेने की तकनीक का अभ्यास करें। विशेष रूप से ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के मरीज इसे करें। जिन्हें कोई ऐसी समस्या नहीं है, उन्हें भी इसका पालन करना चाहिए। डायाफ्रामिक टेक्निक गहरी श्वास को बढ़ावा देती है। ह डायाफ्राम मांसपेशी को फेफड़ों से पेट में अंगों को अलग करने को बढ़ावा देता है।

हेल्दी डाइट है बहुत जरूरीसही भोजन करना, अच्छी तरह से व्यायाम करना, और किसी भी प्रकार के जहरीले तत्वों से बचना स्वस्थ फेफड़ों की क्षमता रखने का मूल मंत्र है। सही मात्रा में प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजों के सेवन से श्वसन की मांसपेशियों और फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

खूब पानी पियेंअच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, यह फेफड़ों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शरीर के बाकी हिस्सों के लिए।

टीका लगवाएंएलर्जी या किसी भी फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को सलाह के अनुसार नियमित रूप से निमोनिया और फ्लू के लिए टीका लगाया जाना चाहिए।

प्रदूषण से बचेंप्रदूषण भी फेफड़ों की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। प्रदूषण से बचने के लिए आपको घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाना चाहिए। 

वजन पर कंट्रोल करेंअधिक वजन होने से फेफड़ों की क्षमता भी कम हो जाती है क्योंकि पेट का मोटापा फेफड़ों को उचित तरीके से काम नहीं करने देता। 

स्मोकिंग और शराब छोड़ देंफेफड़े की क्षमता बनाए रखने के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात धूम्रपान से छुटकारा पाना है। इसके अलावा, अन्य तंबाकू उत्पादों से बचें। हुक्का और वापिंग भी फेफड़ों की क्षमता के लिए हानिकारक हैं।

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