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खाने की नली का कैंसर होने पर मिलती हैं 10 चेतावनी, जवान लड़के-लड़कियों में कॉमन है पहला लक्षण

By उस्मान | Updated: January 2, 2020 14:32 IST

अधिक मात्रा में तंबाकू और शराब का सेवन एसोफैगल कैंसर के प्रमुख कारण हैं।

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खाने की नली का कैंसर को एसोफैगल कैंसर के नाम से जाना जाता है। खाने की नली में बार-बार इंफेक्शन होने से कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। अधिक मात्रा में तंबाकू और शराब का सेवन एसोफैगल कैंसर के प्रमुख कारण हैं। खाने की नली के कैंसर को अनेक नामों से जाना जाता है, जैसे- ग्रसिका का कैंसर , आहार नली या भोजन नली का कैंसर।

हेल्थलाइन के अनुसार, कैंसर के इस प्रकार में खाने की नली यानी ग्रासनली में कोशिकाएं विकसित होती हैं। ग्रासनली एक मांसपेशियों से बनी खोखली नली होती है, जो गले से पेट तक भोजन ले जाने का कार्य करती है। कई कारणों से इसमें ट्यूमर बन जाता है जिसे भोजन नली का कैंसर कहा जाता है। जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, यह ग्रासनली के अधिक गहरे ऊतकों और मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है।

खाने की नली के कैंसर के पांच चरण होते हैं। शुरुआती चरण में कैंसर का विकास नहीं होता है, केवल असामान्य कोशिकाएं पाई जाती है। पहले चरण में कैंसर केवल आहार नली की परत में पाई जाने वाली कोशिकाओं तक ही सीमित होता है। दूसरे चरण में ट्यूमर कोशिकाएं, भोजन नली की बाहरी दीवार तक फैल चुकी होती हैं। तीसरे चरण में कैंसर आंतरिक मांसपेशियों की परत की दीवार में गहराई तक फैलता है और चौथे चरण में कैंसर विकसित होकर शरीर के अन्य अंगों तक फैलता है। 

खाने की नली के कैंसर के लक्षण

खाने की नली में कैंसर के शुरुआती चरणों में मरीज किसी भी प्रकार के स्पष्ट लक्षणों का अनुभव नहीं करता है। लेकिन जैसे-जैसे कैंसर विकसित होता है, पीड़ित व्यक्ति को कई लक्षण महसूस हो सकते हैं जिनमें मुख्यतः 1) अचानक वजन कम होना, 2) लगातार खट्टी डकार आना, 3) सीने में जलन होना, 4) निगलने में दर्द या कठिनाई महसूस होना, 5) भोजन करते समय बार-बार घुटन होना, 6) उल्टी होना, 7) भोजन वापस ग्रासनली में ऊपर आना, 8) सीने में दर्द होना, 9) थकान महसूस होना, 10) पुरानी खांसी या लगातार हिचकी आना शामिल हैं।

खाने की नली के कैंसर का कारण

कैंसर के अन्य प्रकार की तरह खाने की नली के कैंसर का कारण भी अभी तक अज्ञात है। हालांकि कुछ ऐसे कारक ज्ञात है, जो एसोफैगल कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसमें शराब का सेवन, स्मोकिंग, गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज, बैरेट एसोफैगस, अधिक वजन या मोटापा, पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन नहीं करना आदि शामिल हैं। 

खाने की नली में कैंसर के बढ़ते चरणों के साथ कुछ जटिलताओं के उत्पन्न होने की संभावना भी बढ़ती जाती है, जिनमें गंभीर दर्द, ग्रासनली में रक्तस्राव, आहार नली में रुकावट या भोजन और तरल को निगलना मुश्किल होना आदि शामिल हैं।

खाने की नली के कैंसर से बचाव

हालांकि ग्रसिका का कैंसर रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है। फिर भी कुछ बचाव के तरीके अपनाकर व्यक्ति खाने की नली के कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है। कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान न करें, तंबाकू के सेवन से परहेज करें, नियमित रूप से व्यायाम करें, शराब के अधिक सेवन से बचें, फल-सब्जियों का खूब सेवन करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।

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