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Covid new strain C.1.2 facts: अध्ययन में दावा, कोरोना का नया वैरिएंट सी.1.2 अधिक संक्रामक, जानें इसके बारे में 10 खास बातें

By उस्मान | Updated: August 31, 2021 17:03 IST

कोरोना वायरस का खतरा फिलहाल टलता नहीं दिख रहा है, लगातार नए वैरिएंट मिलने से खतरा बढ़ा

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ठळक मुद्देकोरोना वायरस का खतरा फिलहाल टलता नहीं दिख रहा हैयह नया वैरिएंट साउथ अफ्रीका सहित कई देशों में पाया गया है वैज्ञानिकों का दावा ज्यादा तेजी से फैलने की क्षमता

वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के एक और नए वैरिएंट C.1.2 का पता लगाया है। कोरोना का यह नया रूप दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों में पाया गया है। बताया जा रहा है कि यह बहुत ज्यादा तेजी से फैलने की क्षमता रखता है।

दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) और क्वाज़ुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (केआरआईएसपी) के वैज्ञानिकों ने कहा कि इस साल मई में इसका पता चला था।

कोरोना के नए रूप C.1.2 से जुड़े तथ्य

- वैज्ञानिकों ने कहा है कि C.1.2 से 13 अगस्त तक चीन, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड में पाया गया है।

- 24 अगस्त को प्रीप्रिंट रिपॉजिटरी MedRxiv पर पोस्ट किए गए पीयर-रिव्यू अध्ययन के अनुसार, C.1.2 ने C.1 की तुलना में काफी हद तक उत्परिवर्तित किया है, जोकि दक्षिण अफ्रीका में पहली लहर में सार्स-को-2 संक्रमणों पर हावी होने वाली वंशावली में से एक है। 

- शोधकर्ताओं ने कहा कि नए संस्करण में दुनियाभर में पाए गए वैरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी) यावैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) की तुलना में अधिक उत्परिवर्तन की क्षमता है।

- वैज्ञानिकों ने कहा है कि C.1.2 के उपलब्ध अनुक्रमों की संख्या दक्षिण अफ्रीका और दुनिया भर में भिन्नता के प्रसार और आवृत्ति का एक कम प्रतिनिधित्व हो सकती है।

- अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई, जो मई में अनुक्रमित जीनोम के 0.2 प्रतिशत से बढ़कर जून में 1.6 प्रतिशत और फिर जुलाई में 2 प्रतिशत हो गई।

- अध्ययन के लेखकों ने कहा है कि कोरोना वायरस का यह नया रूप शुरुआती पहचान के दौरान देश में बीटा और डेल्टा वेरिएंट की तरह बढ़ता नजर आया।

- अध्ययन के अनुसार, C.1.2 वैरिएंट में प्रति वर्ष लगभग 41.8 उत्परिवर्तन की उत्परिवर्तन दर है, जो अन्य प्रकारों की वर्तमान वैश्विक उत्परिवर्तन दर से लगभग दोगुनी है।

- वायरोलॉजिस्ट उपासना रे ने कहा कि यह वेरिएंट स्पाइक प्रोटीन में C.1.2 लाइन में जमा हुए कई म्यूटेशन का परिणाम है, जो इसे 2019 में चीन के वुहान में पहचाने गए मूल वायरस से बहुत अलग बनाता है।

- कोलकाता के सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी से सुश्री रे के अनुसार, यह अधिक तेजी से फैलने की क्षमता है। चूंकि स्पाइक प्रोटीन में बहुत सारे उत्परिवर्तन होते हैं, इसलिए इसका परिणाम प्रतिरक्षा से बच सकता है। 

- उन्होंने बताया कि जिस गति से यह फैलता है उसे देखकर लग रहा है कि दुनिया भर में टीकाकरण अभियान एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।

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