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COVID-19 vaccine: क्या कोरोना मरीजों को टीका लगाया जाना चाहिए, क्या टीका उन पर असर करेगा ?

By उस्मान | Updated: December 5, 2020 11:26 IST

कोरोना वायरस वैक्सीन अपडेट : अभी तक हुए परीक्षणों में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जो कोरोना से ठीक हुए हैं

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ठळक मुद्देपरीक्षण में ठीक हुए मरीज नहीं हैं शामिल ठीक हुए मरीजों में कैसे एंटीबाडी पैदा कर सकता है टीकादुनियाभर में कोरोना के मरीज सात करोड़ के करीब

कोरोना वायरस का प्रकोप के कम नहीं हो रहा है। चीन से निकले इस खतरनाक वायरस से दुनियाभर में अब तक 66,230,912 लोग संक्रमित हो गए हैं और इनमें से 1,524,457 लोगों की मौत हो गई है और 45,812,406 लोग ठीक हो गए हैं। 

कोरोना की रोकथाम के लिए कई टीकों का परीक्षण अंतिम चरण में है और अगले साल तक कोई न कोई टीका आने की उम्मीद है। लेकिन सवाल अब भी यही है कि वैक्सीन स्वस्थ लोगों को तो वायरस से बचा लेगी लेकिन क्या कोरोना के मरीजों को बचा पाएगी?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना वायरस वैक्सीन वास्तव में कोविड-19 से संक्रमित लोगों के लिए लाभदायक नहीं हो सकते हैं। इसका कारण यह है कि अभी बहुत से क्लिनिकल परीक्षणों में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया गया है, जो वायरस से पीड़ित हैं।

यही वजह है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि क्या वर्तमान वैक्सीन खुराक उनके लिए सुरक्षित या सहायक होगी। अगर मरीजों पर इसके कुछ फायदे नहीं हो सकते, तो क्या जो लोग पहले से ही कोरोना से संक्रमित हैं, उन्हें वैक्सीन शॉट की आवश्यकता होती है? 

वैक्सीन कैसे काम करती है ?

टीके शरीर की सुरक्षा और संक्रमण को पहचानकर विशेष बीमारी को खत्म करने का काम करते हैं। टीके का इस्तेमाल इम्यून सिस्टम को बढ़ाने के लिए किया जाता है ताकि शरीर संक्रमण से लड़ सके। इस तरह शरीर लंबे समय आवश्यक एंटीबॉडी का उत्पादन करता है और किसी भी भविष्य के हमलों को संभालने के लिए बेहतर ढंग से तैयार होता है।

कोरोना मरीजों को इम्यूनिटी की जरूरत

कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता का विकास करना अभी मुश्किल है। जो लोग पहले से ही कोरोना से संक्रमित हैं, उनके पास पहले से एंटीबॉडी, टी-सेल और मेमोरी बी-सेल हैं, जो उन्हें भविष्य में संक्रमण से बचाते हैं।

कोरोना संक्रमित लोगों को टीकों की आवश्यकता नहीं हो सकती है। हालांकि बहुत से लोगों में वायरस के खिलाफ लंबे समय तक प्रतिरक्षा हो सकती है।

कोविड मरीजों के अनुरूप नहीं वैक्सीन

ध्यान देने वाली एक दिलचस्प बात यह है कि लगभग सभी वैक्सीन क्लिनिकल परीक्षणों में कोई भी ऐसा वालंटियर शामिल नहीं था, जो महामारी के दौरान कोविड-19 से पीड़ित था।

इसका अर्थ है कि वे सभी जिन्हें वैक्सीन दी गई, उन्हें संक्रमण का कोई इतिहास नहीं था। इसलिए, अभी भी कोई निर्णायक सबूत नहीं है कि टीका संक्रमित लोगों पर समान प्रभाव दिखाएगा। 

देश में कोविड-19 के संक्रमण के कुल मामले 96,08,211

देश में शनिवार को कोविड-19 के एक दिन में 36,652 नए मामले सामने आने के साथ संक्रमण के कुल मामले 96.08 लाख के पार चले गए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक कुल 90,58,822 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से उबर गए जिससे ठीक होने वाले लोगों की राष्ट्रीय दर 94.28 फीसदी हो गई।

मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे के अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 96,08,211 मामले हैं। इसके मुताबिक बीते 24 घंटे में देश में 512 संक्रमितों की मौत होने से मृतक संख्या बढ़कर 1,39,700 हो गई है।

कोविड-19 के कारण मरने वालों की दर 1.45 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना वायरस से संक्रमित 4,09,689 लोगों का इलाज चल रहा है जो संक्रमण के कुल मामलों का 4.26 फीसदी है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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