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कोरोना मरीजों की पहचान के लिए भारत में जल्द शुरू हो सकता है ये खास मेडिकल टेस्ट, 15 मिनट में आएगा रिजल्ट

By भाषा | Updated: April 3, 2020 16:36 IST

आईसीएमआर) ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं में कोविड-19 की जांच शुरू करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

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भारत में कोरोना वायरस के मामलों की जल्दी पहचान करने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संवेदनशील इलाकों या जहां से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं, वहां के लोगों का ‘एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट’ कराने की सलाह दी है। 

आईसीएमआर ने अपने अंतरिम परामर्श में कोरोना वायरस से ज्यादा प्रभावित इलाकों में ‘रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट’ कराने का सुझाव दिया। सिफारिश का फैसला स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल की एक आपात बैठक में लिया गया।

15 मिनट में आता है एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट का रिजल्ट

आईसीएमआर ने अपने अंतरिम परामर्श में कहा, ‘‘ ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की जांच रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए की जा सकती है। इस जांच में संक्रमित पाए मामलों की पुष्टि गले या नाक से लिए गए नमूनों के आरटी-पीसीआर से की जाएगी और एंटीबॉडी जांच नकारात्मक पाए जाने पर उन्हें घर पर ही पृथक रहना होगा।’’ इसके नतीजे 15-30 मिनट में आ जाते हैं।

अभी तक हुई 20 संवदेशनशील स्थानों की पहचान

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में 20 संवदेशनशील स्थानों की पहचान की है, जहां कोविड-19 के सबसे अधिक मामले हैं और 22 ऐसे स्थानों की पहचान भी की है, जो जल्द संवेदनशील स्थानों की सूची में शामिल हो सकते हैं। 

आईसीएमआर ने डीबीटी, सीएसआईआर, डीएई के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं में कोविड-19 जांच को मंजूरी दी

आईसीएमआर) ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं में कोविड-19 की जांच शुरू करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

आईसीएमआर के एक अधिकारी ने बताया कि डीबीटी, डीएसटी, सीएसआईआर और डीएई प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जांच शुरू करने से पहले आईसीएमआर के दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था ने सभी को सतर्क करते हुए कहा, ‘‘सार्स-सीओवी 2 उच्च खतरे वाला विषाणु हैं जो तेजी से एक-दूसरे में फैलता है और संक्रमण फैलाता है।

कई चरणों पर नमूनों की देखरेख और अपर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारियों से इसका प्रसार हो सकता है तथा प्रयोगशालाओं में यह फैल सकता है।’’ आईसीएमआर इन प्रयोगशालाओं को जांच किट मुहैया नहीं कराएगी और प्रयोगशाला में जांच की पेशकश तभी की जाएगी जब नमूने राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी या राज्य एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) द्वारा भेजे जाएंगे।

हर किसी के नहीं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन 

हाल ही में आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि वायरल रोधी दवा ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ हर किसी के इस्तेमाल के लिये नहीं है और यह सिर्फ कोरोना वायरस के इलाज में लगे चिकित्साकर्मियों और संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों को ही दी जा रही है।

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर ने ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ के इस्तेमाल को लेकर व्याप्त संशय दूर करते हुये कहा कि इस दवा का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता । उन्होंने कहा कि आईसीएमआर बार बार यह स्पष्ट कर चुका है कि यह दवा सभी के इस्तेमाल के लिये नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह दवा सिर्फ कोरोना वायरस के इलाज में लगे चिकित्साकर्मियों और संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों को ही दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी संभावित आपात स्थिति में इस दवा की जरूरत को देखते हुये इसे ‘आवश्यक दवाओं’ की श्रेणी में शामिल कर इसकी बिक्री और वितरण को सीमित कर दिया था।

आईसीएमआर पहले भी ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ को स्वास्थ्यकर्मियों के लिये निवारक दवा के रूप में इस्तेमाल करने की सिफारिश कर चुका है। साथ ही आईसीएमआर ने उन लोगों के लिये भी इसके इस्तेमाल को सुरक्षित बताया था, जिनमें कोरोना वायरस लिए जांच में संक्रमित पाये गये लोगों के संपर्क में आने के बाद संक्रमण के लक्षण पाये गये हों।

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