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COVID treatment: नैटको ने कोरोना इलाज के लिए molnupiravir दवा की मंजूरी मांगी, जानें कितना असरदार है ये कैप्सूल

By उस्मान | Updated: April 26, 2021 12:59 IST

बताया जा रहा है कि यह दवा कोरोना पीड़ितों में पांच दिनों में असर दिखाना शूरू कर देती है

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ठळक मुद्देतीसरे चरण के ट्रायल के लिए मांगी मंजूरीदवा का नाम मोलनुपिराविर (एमके-4482) बताया जा रहा है मंजूरी मिलने के बाद इसी महीने आ सकती है दवा

भारत में कोरोना वायरस का कहर तेजी से बढ़ रहा है और रोजाना नए मामलों की संख्या साढ़े तीन लाख के आंकड़े को पार कर गई है। एक दिन में मौत का आंकड़ा भी तीन हजार के पास पहुंच गया है।

इस बीच नैटको फार्मा लिमिटेड ने कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिये मोलनुपिराविर कैप्सूलों के तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी के लिये केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीबीएससीओ) से मंजूरी मांगी है।

अमेरिका की प्रमुख दवा कंपनी मेरेक ने रिजबैक बायो थेराप्यूटिक्स के साथ मिलकर मोलनुपिराविर (एमके-4482) को विकसित किया है।

कोरोना के इलाज के लिए कितनी असरदार है मोलनुपिराविर

शहर में स्थित दवा निर्माता की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक किए गए परीक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि मोलनुपिराविर में सार्स-कोव-2 प्रतिकृति के अत्यधिक शक्तिशाली अवरोधकों समेत बड़े पैमाने पर इंफ्लुएंजा रोधी गतिविधि होती है।

विज्ञप्ति में कहा गया है, 'जिन रोगियों का मोलनुपिराविर से इलाज किया गया, उन पर थेरेपी के पांच दिन में ही असर दिखा, जिससे संकेत मिलते हैं कि मोलपुपिराविर से इलाज में कम समय लगता है।'

नैटको को उम्मीद है कि सीडीएससीओ जल्द ही रोगियों के लिये इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दे देगा। कंपनी ने कहा कि अगर मंजूरी मिलती है तो वह इसी महीने इस दवा को उपलब्ध करा देगी।

हाल ही में जायडस कैडिला विराफिन को भी मिली अनुमति

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बढ़ते मामलों के बीच गुजरात स्थित फार्मा कंपनी जायडस कैडिला कंपनी की दवा विराफिन (Virafin) को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से मंजूरी मिल गई है। सिंगल डोज की यह दवा अगले माह यानी मई बाजार में उपलब्ध होगी। 

विराफिन क्या है (What is Virafin)

विराफिन एक एंटीवायरल ड्रग है। इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के मध्यम लक्षणों वाले मामलों के उपचार के लिए किया जा सकता है। इस एंटीवायरल दवा को इंजेक्शन के जरिये दिया जाता है। बताया जा रहा है कि इसकी पहली खुराक लेने के तुरंत बाद एक संक्रमित रोगी के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिले हैं। 

विराफिन मूल रूप से हेपेटाइटिस सी वायरस के कारण होने वाले लिवर रोग के उपचार के लिए अनुमोदित किया गया था और 10 साल पहले भारत में लॉन्च किया गया था। विराफिन को अन्य वायरल संक्रमणों के खिलाफ प्रभावकारिता के लिए भी जाना जाता है।

कोरोना वायरस के इलाज में कितनी कारगर विराफिन

बिजनेस स्टैण्डर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस दवा बनाने वाली कंपनी Zydus Cadila के अनुसार, जिन मरीजों का इलाज विराफिन के साथ किया गया था, उनकी रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर निगेटिव आई थी।

इतना है नहीं, इसे लेने के बाद रोगियों को कम पूरक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है क्योंकि यह मरीजों में ऑक्सीजन की जरूरत के समय को कम कर सकती है। 

कोरोना की रिपोर्ट 7 दिन में निगेटिव होने का दावा

जायडस कैडिला ने दावा किया है कि मध्यम संक्रमण वाले जिन मरीजों को इस एंटी वायरल का डोज दिया गया था, उनमें से 91.15 प्रतिशत लोगों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट केवल 7 दिन में निगेटिव आ गई थी। साथ ही उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत भी तुलनात्मक रूप से कम ही पड़ी थी।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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