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COVID tretament: निमोनिया, ऑक्सीजन और सांस की कमी से बचने के लिए छठे दिन ये 3 टेस्ट जरूर करा लें कोरोना के मरीज

By उस्मान | Updated: May 5, 2021 09:05 IST

इन टेस्ट को कराने से आपको पता चल जाएगा कि संक्रमण कितना हल्का या गंभीर है

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ठळक मुद्देइन टेस्ट को कराने से आपको पता चल जाएगा कि संक्रमण कितना हल्का या गंभीर है इससे सही समय पर इलाज में मदद मिल सकती हैऑक्सीजन की कमी वाली स्थिति से बचने के लिए जरूर है ये टेस्ट

कोरोना वायरस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में तो इसके लक्षण दिख भी नहीं रहे हैं और कुछ लोगों में बहुत हल्के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बीमारी के 5 या 6 दिनों में लक्षण महसूस हो सकते हैं इसलिए इन शुरुआती दिनों में लक्षणों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। 

जिस दिन आपको पता चल गया है कि आप पॉजिटिव हैं तो समझ लें कि बीमारी की जटिलता उसी दिन से शुरू हो जाएगी। अगर शुरू के हफ्ते में आपके लक्षण गंभीर होते जा रहे हैं, तो आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए और अगर लक्षण महसूस नहीं हुए हैं, तो भी आपको सतर्क रहना चाहिए। 

कोरोना का पहला एक हफ्ता महत्वपूर्ण क्यों

यह माना जाता है कि वायरस के शरीर के अंदर जाने के 2-3 दिनों के बाद ज्यादातर लोगों में लक्षण विकसित होने लगते हैं। अधिकांश लोगों को पहले बुखार हो सकता है। इसे पहला चरण कहा जाता है। दूसरे चरण में बीमारी गंभीर होने लगती है जिससे निमोनिया, ऑक्सीजन की कमी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या होने लगती है। 

किसी व्यक्ति को संक्रमण से उबरने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर कोरोना के लक्षण ठीक होने में एक हफ्ता या दस दिन लगते हैं। यह आमतौर पर उन लोगों के साथ होता है जिन्हें हल्का या मध्यम संक्रमण होता है। हालांकि गंभीर संक्रमण वाले लोगों को एक हफ्ते के बाद बायोमार्कर, सीटी स्कैन और सीबीसी टेस्ट करा लेना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में आपका संक्रमण कितना हल्का या गंभीर है।

दूसरे हफ्ते में महसूस होने वाले लक्षण

दूसरे हफ्ते में आपको शरीर में दर्द, थकावट और खांसी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। मरीज में सांस के लक्षणों को बिगड़ने की समस्या हो सकती है। इसमें सांस की तकलीफ, सीने में दर्द, बेचैनी, भारीपन हो सकते हैं। 

मरीज को हाइपोक्सिया भी हो सकता है। यह ऐसी स्थिति जहां रक्त ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है। एक अन्य लक्षण जो चिंता का कारण बन सकता है वह है बुखार। कोरोना के रोगियों का हल्का बुखार अगर 9 या 10 दिन में कम नहीं होता, तो यह निमोनिया या रक्त संक्रमण के संकेत में बदल सकता है। 

लक्षणों को गंभीर होने से रोकने के लिए दूसरी हफ्ते में क्या करें

गंभीर संक्रमण वाले लोगों को एक हफ्ते के बाद बायोमार्कर, सीटी स्कैन और सीबीसी टेस्ट करा लेना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में आपका संक्रमण कितना हल्का या गंभीर है। इससे सही समय पर सही इलाज में मदद मिल सकती है और ऑक्सीजन लेवल गिरने या सांस की कमी वाली स्थिति से बचा जा सकता है। 

कम्प्लीट ब्लड काउंटसीबीसी परीक्षण एक मौलिक परीक्षण है जो विभिन्न प्रकार के रक्त कोशिकाओं (आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स आदि) को मापता है। इससे आपको अत चल सकता है कि आपके शरीर ने कोरोना संक्रमण के खिलाफ कैसे काम किया है।

बायोमार्कर बायोमार्कर टेस्ट से शरीर में संक्रमण के स्तर का पता चलता है। संक्रमण होने पर खून में थक्के बनने लगते हैं। खून के ये थक्के छोटी रक्त वाहनियों को बंद कर देते हैं। इससे शरीर में आक्सीजन की सप्लाई सही से नहीं हो पाती है। 

सी टी स्कैनअधिकतर सी टी स्कैन शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों का पता लगाने के लिए किया जाता है। सीटी स्कैन या सीएटी स्कैन विशेष प्रकार का टेस्ट होता है जो कि एक एक्स-रे और एक कंप्यूटर के इस्तेमाल से किया जाता है और इस टेस्ट में हमे शरीर में कुछ विशेष अंगो का फोटो बनता है। 

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