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Covid tips: कोरोना के हल्के मामले को ज्यादा गंभीर बना सकती हैं ये 5 गलतियां, बीमारी के साथ इन बातों का रखें विशेष ध्यान

By उस्मान | Updated: August 17, 2021 13:32 IST

अगर शरीर में कोरोना के लक्षणों को गंभीर होने से बचाना है तो मरीजों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

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ठळक मुद्दे लक्षणों को गंभीर होने से बचाना है तो मरीजों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिएहल्के लक्षणों को नजरअंदाज न करेंसंकेत मिलते ही तुरंत जांच कराएं सौर समय पर इलाज शुरू करें

कोरोना वायरस के मामले फिर बढ़ने लगे हैं डेल्टा वैरिएंट आन के बाद कोरोना के लक्षण बढ़ रहे हैं और बदल रहे हैं। कई मामलों में लक्षण नजर भी नहीं आ रहे। ऐसे में डॉक्टर संक्रमितों को लक्षणों पर नजर रखने और सही समय पर उपचार शुरू करने की सलाह देते हैं।

डॉक्टरों का यह भी मानना है कि कोरोना के हल्के लक्षणों का अगर सही समय पर इलाज नहीं किया गया, तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं जिससे जान को खतरा हो सकता है।  कोई मामला हल्के से बदतर कैसे हो सकता है?कोरोना वायरस के अधिकांश मामले हल्के तरीके से शुरू होते हैं। हालांकि कई मामलों में संक्रमण गंभीर हो सकते हैं और ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है।

डॉक्टरों का मानना है कि मरीजों लक्षणों को गंभीर होने से बचाने के लिए पहले दिन से कुछ सावधानियों का पालन करना चाहिए। हालांकि गंभीर लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कुछ कारक हैं, जो आपके मामले को जटिल बना सकते हैं।  

हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करनायह एक ऐसे सबसे बड़ी गलती है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कोरोना के सामान्य, असामान्य और खतरनाक लक्षणों पर नजर रखना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है कि एक हल्के संक्रमण को भी गंभीरता से लिया जाए और इसे वायरल या एलर्जी की प्रतिक्रिया की तरह न माना जाए।

आपको लक्षण महसूस होने पर तुरंत टेस्ट कराना चाहिए। समय पर पता लगाने से व्यक्ति को दूसरों को संक्रमित करने से भी बचाया जा सकता है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

स्टेरॉयड उपचार बहुत जल्द शुरू करनासूजन और गंभीरता को कम करने के लिए अस्पताल में भर्ती मामलों में स्टेरॉयड की सिफारिश की जा रही है। हालांकि, सभी मामलों में स्टेरॉयड के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है। अंधाधुंध प्रयोग, या हल्के संक्रमण में इनका प्रयोग करने से समस्या हो सकती है।

इसलिए, कोई भी मरीज जो कोरोना से पीड़ित है और घर पर ठीक हो रहा है, उसे सतर्क रहना चाहिए और केवल वही दवाएं लेनी चाहिए, जो इलाज करने वाले डॉक्टर द्वारा बताई गई हों। स्टेरॉयड के लगातार उपयोग को गंभीर जटिलताओं से भी जोड़ा गया है, जैसे म्यूकोर्मिकोसिस, या ब्लैक फंगस।

समय पर किसी कोविड एक्सपर्ट से सलाह न लेनाकोरोना पॉजिटिव लोग एक बड़ी गलती यह कर रहे हैं कि वो किसी कोविड एक्सपर्ट से सलाह नहीं ले रहे हैं। बेशक लक्षण बहुत सारे अन्य संक्रमणों के समान हैं, फिर भी आपको एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट ही आपको उन दवाओं के बारे में बता सकता है, जो लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। आपको एक्सपर्ट ही बताएगा कि कब आपको अन्य टेस्ट, स्कैन और अन्य काम करने चाहिए। 

टेस्टिंग में देरीकोरोना के बदलते रूप और लक्षण नहीं दिखने की वजह से बहुत से लोग देरी से टेस्ट कराते हैं। इससे ठीक होने की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। समय पर टेस्ट कराने से आपको सही समय पर सही इलाज में मदद मिल सकती है।

लक्षणों की निगरानी नहीं करनापहले दिन से ही आपको SP02 लेवल, बुखार, ऑक्सीजन लेवल आदि पर नजर खनी चाहिए। खासकर ऑक्सीजन में गिरावट (92%) चिंता का एक प्रमुख कारण बन सकता है। इसी तरह, बुखार जो सातवें दिन तक कम नहीं होता है, वह भी एक चेतावनी संकेत है। इसलिए, रोगियों को अपने लक्षणों को एक घंटे / दो घंटे के आधार पर चार्ट करना चाहिए।

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