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Covid-19: दिल्ली में दोबारा हाहाकार मचाने लगा कोरोना, एक दिन में सर्वाधिक 3,256 केस, इन 8 वजहों से तेजी से बढ़े मामले

By उस्मान | Updated: September 7, 2020 09:59 IST

दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ने के कारण : दिल्ली में अचानक कोरोना के नए मामलों में तेजी देखने को मिली है, जानिये क्यों

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ठळक मुद्देपिछले 72 दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में सर्वाधिक 3,256 नये मामले राजधानी में 26 जून को कोरोना वायरस के 3,460 मामलेसमय पर जांच नहीं कराना एक सबसे बड़ा कारण

दिल्ली में रविवार को पिछले 72 दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में सर्वाधिक 3,256 नये मामले सामने आने के बाद मामलों की कुल संख्या 1,91,499 पहुंच गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में इस महामारी से 29 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 4,567 पहुंच गई। 

जून के बाद एक दिन में सबसे अधिक मामलेगत 26 जून के बाद से पहली बार दिल्ली में संक्रमण के मामलों की संख्या एक दिन में 3,000 के पार चली गयी है। सितंबर में लगातार पांचवें दिन एक दिन में कोविड-19 के मामले 2,000 से अधिक सामने आये हैं। राजधानी में 26 जून को कोरोना वायरस के 3,460 मामले दर्ज किये गये थे। उन्होंने बताया कि इस समय 20,909 मरीजों का इलाज चल रहा है।

पिछले सप्ताह से 35 फीसदी अधिक मामले आयेदिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के एक विश्लेषण के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में अगस्त के अंतिम सप्ताह में इसके पिछले सप्ताह के मुकाबले कोरोना वायरस संक्रमण के 35 फीसदी अधिक मामले सामने आए। 

दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ने के कारण

पहले से पीड़ित परिवारों में बढ़ी संक्रमितों की संख्याविश्लेषण के मुताबिक जो नए मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से 30 से 40 फीसदी मामले उन परिवारों से हैं, जहां पहले भी मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त में कोविड-19 के मामलों का विश्लेषण करने पर पाया कि कोरोना वायरस संक्रमण ग्रामीण और मध्यमवर्गीय इलाकों में अधिक है तथा प्रवासी लोगों के इलाकों में भी मामले बढ़ रहे हैं। 

एहितयाती उपायों पर ध्यान नहीं देनामामले बढ़ने की एक वजह लोगों द्वारा एहितयाती उपायों पर ध्यान नहीं देना है। संक्रमण फैलने के अन्य कारणों में त्योहार का मौसम, कोविड-19 का संदेह होने पर भी देर से जांच करवाना, संक्रमितों के संपर्क में आना, प्रवासियों का लौटना और अनलॉक (लॉकडाउन से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने की प्रक्रिया) के कदम हैं। बीते कुछ दिन में नए मामले और उपचाराधीन मरीज भी बढ़े हैं। 

समय पर जांच नहीं करानाअगस्त के अंतिम सप्ताह में जब संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे ,तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि लोग आत्मसंतुष्ट न हों। उन्होंने कहा था कि लक्षण नजर आने पर अधिक से अधिक संख्या में लोग जांच करवाएं।

केजरीवाल ने कहा था, 'अत्यधिक आत्मविश्वास के साथ कुछ लोग सोचते हैं कि लक्षण नजर आने पर भी वे ठीक हो जाएंगे। उन्हें यह अहसास नहीं होता कि समय पर जांच नहीं करवाने पर वे अपने आसपास के कई लोगों को संक्रमित कर देंगे। किसी भी सरकारी अस्पताल या दवाखाने में नि:शुल्क जांच करवाई जा सकती है।' 

मामूली लक्षणों की अनदेखी करनामेदोर अस्पताल, कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया, के प्रभारी मनोज शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिए आने वाले लोगों की संख्या अब कम हो गई है।

उन्होंने कहा कि कई लोगों को लगता है कि मामूली लक्षण हैं तो वे ठीक हो जाएंगे। लोगों को यह डर भी लगता है कि अधिकारी उनके घर के बाहर स्टिकर चिपका देंगे और उनके पड़ोसियों को भी पता चल जाएगा। 

जीनस्ट्रींग्स लैब की लैब प्रमुख अल्पना राजदान ने बताया कि पहले कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिए प्रतिदिन 350 लोग आते थे, अब यह संख्या घटकर 170 रह गई है। वहीं, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के मेडिकल निदेश डॉ बीएल शेरवाल के मुताबिक पिछले तीन-चार दिनों में जांच बढ़ी है।  

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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