365 दिन में 4000 करोड़ रुपए से ज्यादा की जीएसटी चोरी?, 1500 करोड़ रुपए एसटीएफ ने पकड़े
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 6, 2026 09:18 IST2026-04-06T09:16:19+5:302026-04-06T09:18:16+5:30
कुल मिलकर जीएसटी चोरों को पकड़ने के लिए जीएसटी अफसरों और एसटीएफ़ ने अभियान छेड़ा हुआ है, फिर भी जीएसटी चोरी के मामलों पर अंकुश नहीं लगा है.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है. इसके चलते ही यह दावा किया जाता है कि राज्य में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है. परंतु सरकार के इस दावे का भय जीएसटी चोरी करने वालों को नहीं है. यह दावा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार की ही जांच से यह खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 से 2025 के बीच बोगस फार्मो के जरिए 4000 करोड़ रुपए से ज्यादा ही जीएसटी चोरी हुई है. इसमें 1500 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी के मामले एसटीएफ़ ने पकड़े हैं.
इसके बाद भी जीएसटी चोरी करने वालों के हौसले बुलंद है, क्योंकि बीते कुछ माह के भीतर ही जीएसटी चोरी के 375 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. कुल मिलकर जीएसटी चोरों को पकड़ने के लिए जीएसटी अफसरों और एसटीएफ़ ने अभियान छेड़ा हुआ है, फिर भी जीएसटी चोरी के मामलों पर अंकुश नहीं लगा है.
जिसके चलते ही अखिलेश यादव यह आरोप लगा रहा है कि यूपी अब जीएसटी चोरों का पसंदीदा राज्य बनाता जा रहा है क्योंकि राज्य में जीएसटी चोरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन जीएसटी चोर पकड़े कम जा रहे हैं.
जांच से हुआ घोटाले के तरीके का खुलासा
यह हाल भी तब है, जब राज्य में एसजीटी चोरी के 10 बड़े मामलों की जांच एसटीएफ़ को मिली हुई है. ये मामले कानपुर, अलीगढ़, लखनऊ, गाजियाबाद, संत कबीर नगर और बलरामपुर से जुड़े हैं. इनमें एक मामले 500 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का है, बाकी के सभी मामले 100 करोड़ रुपए से अधिक जीएसटी चोरी के हैं.
जीएसटी चोरी के इन मामलों की जांच डीजीपी राजीव कृष्णा के जीएसओ केएस इमैनुअल की देखरेख में बनी एसआईटी कर रही है. केएस इमैनुअल आईजी स्तर के तेज तर्रार अफसर हैं. केएस ईमैनुयल की एसआईटी ने अलग-अलग राज्यों से हो रहे संचालित जीएसटी फर्जीवाड़े के नेटवर्क से जुड़े 23 लोगों का अब तक गिरफ्तार किया है.
अब तक की जांच में पाया गया है कि कानपुर और बलरामपुर को छोड़कर जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में हर गैंग और उसका नेटवर्क अलग है. फर्जीवाड़ा करने वाला गैंग एक दूसरे से जुड़ा नहीं है और हर गैंग में फर्जीवाड़ा करने वालों की अलग-अलग लेयर है. जीएसटी चोरी के कारणों की पड़ताल से यह पता चला है कि बड़ी संख्या में फार्मों का सपाट इंसपेकशन न होने के फर्जीवाड़ा हो रहा है.
जीएसटी चोरी करने वाले गैंग एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर 50 से लेकर 100 फ़र्मे रजिस्टर्ड करावा रहे हैं. कंपनी लखनऊ के पते पर दर्ज हो रही हैं और उनके खाते गुजरात, महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों से संचालित हो रहे हैं. केएस ईमैनुयल के अनुसार, जीएसटी चोरी करने वाले गिरोहों का तरीका बेहद सुनियोजित है, यह लोग लालच में आई लोगों से उनके पहचान पत्र (आईडी, पैन कार्ड, आधार कार्ड ) आदि हासिल करते हैं. इन इन लोगों के नाम पर किराए के पते दिखाकर फर्जी फ़र्मे रजिस्टर्ड कारवाई जाती है.
फिर इन फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी सेल-परचेज इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते हैं. इन फर्जी दस्तावेजों को जीएसटी पोर्टल पर अपलोड कर वास्तविक व्यपार करने वाली कंपनियों को इनपूत टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फायदा दिलाया जाता है, बदले में वास्तविक फ़र्मे गिरोह को मोटा कमीशन देती हैं.
जीएसटी चोरी पर अंकुश लगेगा
जीएसटी घोटाले के इस पैटर्न को जानने के बाद एसटीएफ़ और एसआईटी टीम ने जीएसटी का बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाली फार्मों की जांच की. तो उन्हे पता चला कि जीएसटी फर्जीवाड़ा करने में ज़्यादातर स्क्रैप, कपड़े, लकड़ी और सर्विसेज का धंधा करने वाली फार्मो का इस्तेमाल किया जा रहा है. वर्तमान में सबसे ज्यादा स्क्रैप की फ़र्मे जीएसटी चोरी में पकड़ी गई है.
प्रदेश में जीएसटी चोरी के मामलों को लेकर राज्य कर आयुक्त नितिन बीएनएसएल का कहना है कि राज्य कर विभाग बोगस फ़र्मों और गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लेने वाली कंपनियों पर शिंकजा कस रहा है. एक नंबर पर कई फर्म रजिस्टर होने वाली कंपनियों की भी जांच की जा रही है. इसके अलावा एसआईटी और एसटीएफ भी जीएसटी चोरी के 10 बड़े मामलों की जांच कर रही है. हमारी सक्रियता के चलते जीएसटी चोरी के मामलों पर अंकुश लगेगा, यह उम्मीद है.