मायावती शासनकाल में 60 करोड़ रुपए में डील, हाजी इकबाल की 1000 करोड़ रुपए की तीन चीनी मिल जब्त करेगी ईडी?, बसपा एमएलसी रहे भगोड़ा घोषित
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 1, 2026 19:04 IST2026-04-01T19:03:24+5:302026-04-01T19:04:20+5:30
खनन का कारोबार इतना बढ़ गया था कि उसने हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया. अरबों की संपत्ति बना ली और सहारनपुर में ग्लोकल यूनिवर्सिटी शुरू की.

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लखनऊः बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एमएलसी के मोहम्मद हाजी इकबाल के आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करवा दिया है. ईडी द्वारा कोर्ट में हाजी इकबाल के खिलाफ दायर की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर जज राहुल प्रकाश ने फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (एफ़ईओए) के तहत उसे आधिकारिक तौर पर फरार आर्थिक अपराधी घोषित किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने हाजी इकबाल की करीब 1000 करोड़ रुपए की तीन चीनी मिलों को जब्त करने का आदेश भी दिया है. ईडी दो वर्ष पूर्व हाजी इकबाल के बेटे के नाम पर चल रही ट्रस्ट की ग्लोबल यूनिवर्सिटी को भी जब्त कर चुकी है. इस यूनिवर्सिटी और उसकी जमीन की कीमत करीव 4440 करोड़ रुपए आंकी गई थी.
ये तीन मिले होगी जब्त
ईडी के अधिकारियों के अनुसार कोर्ट ने हाजी इकबाल द्वारा मायावती के शासनकाल में वर्ष 2010-11 में देवरिया जिले की बैतालपुर चीनी मिल और भटनी चीनी मिल तथा जौनपुर जिले में बनी शाहगंज चीनी मिल को खरीदा. अधिकारियों का कहना है कि इन चीनी मिलों को घाटे में बता कर बहुत कम दामों पर (लगभग 60 करोड़ में) बेचा गया था, जबकि इनका बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपए से अधिक था.
ईडी की जांच में यह पाया गया है कि हाजी इकबाल ने अवैध खनन से अर्जित धन का उपयोग शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के माध्यम से इन चीनी मिलों को खरीदने में किया था. अब कोर्ट के आदेश पर अब ये तीनों चीनी मिल सरकार के कब्जे में आ जाएंगी.
फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (एफ़ईओए) के तहत की गई यह कार्रवाई बेहद अहम मानी जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, हाजी इकबाल को भगोड़ा अपराधी घोषित किए जाने के चलते अब उसे भारत लाने की कार्रवाई तेज की जाएगी. बताया जा रहा है हाजी मोहम्मद इकबाल वर्ष 2022 दुबई भाग गया था.
हाजी मोहम्मद इकबाल कौन
यूपी के सहारनपुर जिले के चांदपुर क्षेत्र से हाजी मोहम्मद इकबाल वर्ष 2007 से 2012 और फिर 2012 से 2017 एमएलसी रहा है. एक जमाने में मोहम्मद इकबाल आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. उसने एक परचून की दुकान खोली थी, जो शुरू में तो नहीं चल पाई. फिर धीरे-धीरे यह दुकान चलने लगी. इसी बीच मोहम्मद इकबाल ने राजनीति में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया.
वह बसपा में शामिल हुआ और यही से उसके जीवन में धन की बरसात होने लगी, तो उसके खनन के क्षेत्र में अपना हाथ आजमाया. देखते ही देखते उसका खनन का कारोबार इतना बढ़ गया था कि उसने हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया. अरबों की संपत्ति बना ली और सहारनपुर में ग्लोकल यूनिवर्सिटी शुरू की.
ये यूनिवर्सिटी इकबाल ने अपने लड़के के नाम से चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर शुरू की. इसी दरमियान प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई और मायावती सरकार में औने -पौने दामों पर चीनी मिल बेचे जाने के मामले की जांच का आदेश दिया गया. इसी के बाद सीबीआई और ईडी की निगाह एमएलसी हाजी इकबाल जमी.
करीब चार साल चली जांच के बाद ईडी ने इकबाल के बेटे के नाम पर चल रही ट्रस्ट की ग्लोबल यूनिवर्सिटी की 4440 करोड़ की संपत्ति को अटैच कर कुर्क किया. जांच एंजेसियों की सक्रियता को देखते हुए हाजी इकबाल दुबई भाग गया.जब उसे देश छोड़ा था, तब उसके खिलाफ पुलिस ने गैंगेस्टर समेत 36 मुकदमे दर्ज किए थे.
हाजी इकबाल और उनके साथियों की लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर समेत 63 स्थानों पर संपत्ति चिन्हित की थी. अब ईडी हाजी इकबाल को दुबई से भारत लाने की कार्रवाई करेगी, ईडी के अफसरों का यह कहना है. इसके लिए विदेश मंत्रालय की मदद भी ली जाएगी.