MP: पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले पत्रकार ने लगाया फांसी, मौत से पहले लिखे पोस्ट में पुलिस वालों पर लगाया "निजी द्वेष" में फंसाने का आरोप

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 12, 2022 15:59 IST2022-05-12T15:53:03+5:302022-05-12T15:59:41+5:30

मौत से पहले गणेश तिवारी ने एक पोस्ट किया था जिसमें पत्रकारिता और मौत पर एक मशहूर उद्धरण हिन्दी में लिखा था। उस मशहूर उद्धरण में लिखा था ‘‘पत्रकारिता आपकी जान ले सकती है, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक यह आपको जीवित रखेगी।’’

MP Journalist ganesh tiwari hanged himself corruption against police employees accusing policemen implicated personal malice indore | MP: पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले पत्रकार ने लगाया फांसी, मौत से पहले लिखे पोस्ट में पुलिस वालों पर लगाया "निजी द्वेष" में फंसाने का आरोप

MP: पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले पत्रकार ने लगाया फांसी, मौत से पहले लिखे पोस्ट में पुलिस वालों पर लगाया "निजी द्वेष" में फंसाने का आरोप

Highlightsइंदौर में 40 वर्षीय पत्रकार का शव फांसी के फंदे से लटका मिला है। मृत के पास से कोई सोसाइट नोट नहीं मिला है। इस मौत के बाद पुलिस के रोल पर ही सवाल उठ रहे हैं।

इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में 40 वर्षीय पत्रकार का शव उसके घर में बुधवार देर रात संदिग्ध हालात में फंदे पर लटका मिला है। पुलिस के एक अधिकारी ने गुरूवार को यह जानकारी दी है। लसूड़िया पुलिस थाने के प्रभारी संतोष दूधी ने बताया, ‘‘गणेश तिवारी (40) की सतना जिले में रह रहीं पत्नी ने उन्हें बुधवार देर रात फोन किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इससे चिंतित होकर उनकी पत्नी ने पड़ोसियों को उनकी खैरियत जानने को कहा। जब पड़ोसियों ने तिवारी के घर के भीतर झांक कर देखा तो वह फंदे पर लटके मिले।’’  पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच को शुरू कर दिया है। 

पुलिस को नहीं मिला कोई सोसाइड नोट

मामले में संतोष दूधी ने बताया कि इसकी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने तिवारी के घर का दरवाजा तोड़कर उनका शव बरामद किया और इसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। थाना प्रभारी के मुताबिक, पहली नजर में लगता है कि तिवारी ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या की है। उन्होंने हालांकि कहा कि पुलिस को तिवारी का छोड़ा गया कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और उनकी कथित खुदकुशी के कारण की जांच की जा रही है। 

कुछ दिन पहले पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार का किया था खुलासा

बहरहाल, अलग-अलग समाचार चैनलों में काम कर चुके तिवारी की फेसबुक प्रोफाइल देखकर यह पता चलता है कि उन्होंने लसूड़िया पुलिस थाने के कुछ कर्मचारियों के कथित भ्रष्टाचार की एक खबर पांच दिन पहले ही पोस्ट की थी। 40 वर्षीय पत्रकार ने अपनी मौत से महज छह दिन पहले, खुद की फेसबुक प्रोफाइल पर होरेस ग्रीले का यह मशहूर उद्धरण हिन्दी में लिखा था,‘‘पत्रकारिता आपकी जान ले सकती है, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक यह आपको जीवित रखेगी।’’ वहीं इंदौर प्रेस क्लब और कई स्थानीय पत्रकारों ने संदिग्ध हालात में तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

मृत पत्रकार ने पुलिस वालों पर लगाया था "निजी द्वेष" का आरोप

अधिकारियों ने बताया कि लसूड़िया पुलिस ने तिवारी समेत चार लोगों के खिलाफ अक्टूबर 2021 में शहर के एक ढाबे के बारे में नकारात्मक खबर चलाने की धमकी देकर ढाबा संचालक से अवैध वसूली के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में तिवारी को गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में तिवारी को मामले में अदालत से जमानत मिल गई थी और उन्होंने आरोप लगाया था कि लसूड़िया पुलिस ने "निजी द्वेष के चलते" उनके खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज की थी। 

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