मोतिहारी जहरीली शराबः 4 की मौत और 15 की हालत खराब?, 6 लोगों की आंखों की रोशनी
By एस पी सिन्हा | Updated: April 3, 2026 14:54 IST2026-04-03T14:52:49+5:302026-04-03T14:54:07+5:30
Motihari Poisonous Liquor: परिवारों का कहना है कि शराब पीने के बाद अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। आंखों में जलन, पेट में दर्द और घबराहट जैसी शिकायतें सामने आईं।

nitish kumar
Motihari: बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में जहरीली शराब कांड से चार लोगों की हुई मौत पर एक बार फिर से सियासत गर्म हो गई है। जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत के बाद इसको लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर आंकड़े जारी कर बिहार में शराबबंदी का सच बताया है। दरअसल, इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 15 लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। सभी बीमारों का इलाज सदर अस्पताल के साथ-साथ निजी नर्सिंग होम में चल रहा है।
ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। बताया जाता है कि एक पीड़ित बुजुर्ग ने बयान दिया है कि बस 2 गिलास पिए थे, उसके बाद तबीयत बिगड़ गई। परिवारों का कहना है कि शराब पीने के बाद अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। आंखों में जलन, पेट में दर्द और घबराहट जैसी शिकायतें सामने आईं।
मोतिहारी में जहरीली शराब के कारण 4 लोगों की मौत, 6 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाना और कई लोगों की हालत गंभीर होना अत्यंत दुखद है। यह घटना एक बार फिर एनडीए सरकार के शराबबंदी कानून की विफलता और उसकी गंभीर खामियों को उजागर करती है।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) April 3, 2026
हालांकि यह बिल्कुल भी पहली बार नहीं है। उपलब्ध…
परिजनों ने बताया कि उन्होंने बार-बार मना किया था, लेकिन इसके बावजूद इलाके में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध थी। मृतकों में प्रमोद यादव भी शामिल हैं। उनके परिजनों ने बताया कि फोन पर तबीयत खराब होने की सूचना मिलने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई और उनकी मौत हो गई।
बताया जाता है कि सभी मृतकों ने जहरीले पेय पदार्थ का सेवन किया था, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों की ओर से अस्पताल ले जाने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ शराब तस्करों को गिरफ्तार किया है।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि इस अवैध कारोबार के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी जांच जारी है। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहरीले पेय पदार्थ का धंधा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है कि यह मामला अवैध शराब से जुड़ा है या इसके पीछे कोई अन्य साजिश है।
वहीं, यह मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। हम पार्टी के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी ठीक है। लेकिन इसके इंप्लीमेंटेशन में कहीं ना कहीं गड़बड़ी है। सरकार का काम कानून बनाना है लेकिन उसे इंप्लीमेंट करना, हम सबका काम है।
जबकि तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा कि “मोतिहारी में जहरीली शराब के कारण 4 लोगों की मौत, 6 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाना और कई लोगों की हालत गंभीर होना अत्यंत दुखद है। यह घटना एक बार फिर एनडीए सरकार के शराबबंदी कानून की विफलता और उसकी गंभीर खामियों को उजागर करती है। हालांकि यह बिल्कुल भी पहली बार नहीं है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह तो केवल सरकारी आंकड़ा है, हकीकत में यह संख्या इससे कहीं अधिक है। इतना ही नहीं, कई दर्जन लोग अपनी आंखों की रोशनी भी खो चुके हैं। शराबबंदी कानून का मूल उद्देश्य अब पूरी तरह भटक चुका है।
यह कानून सत्ताधारी भाजपा-जदयू के कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और उनके संरक्षण में पल रहे शराब माफियाओं व भ्रष्ट तंत्र के लिए कमाई का कमाऊ पूत बन गया है। बिहार में खुलेआम जहरीली शराब बन रही है, धड़ल्ले से पुलिस की मिलीभगत से बेची जा रही है, घर-घर होम डिलीवरी हो रही है। सरकार की नाक के नीचे यह सब चल रहा है और इसकी कीमत बिहार के गरीब और आम लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं।