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मध्य प्रदेश हनीट्रैप मामला: वीडियो में दिखाई देने वाले नेताओं और अधिकारियों से SIT करेगी पूछताछ

By राजेंद्र पाराशर | Updated: October 30, 2019 19:48 IST

मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य, वीडियो क्लिप्स के बारे में एसआईटी अब उन नेताओं और अफसरों से सवाल-जवाब करेगी, जिनकी तस्वीरें वीडियो में दिखाई दे रही हैं.

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ठळक मुद्देबहुचर्चित हनीट्रैप मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी गोपनीय स्तर पर जांच में जुटी है.एसआईटी के प्रमुख राजेन्द्र कुमार इस मामले को लेकर गोपनीय तरीके से जांच कर रहे हैं. उन्होंने एसआईटी को मिले हार्डडिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन आदि डिजिटल सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया है..

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में अब उन नेताओं और अफसरों से एसआईटी पूछताछ करेगी, जो वीडियो में दिखाई दे रहे हैं. इस मामले में एसआईटी को मिले वीडियो क्लिप को भी हैदराबाद स्थित सीएफएसएल लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा.

बहुचर्चित हनीट्रैप मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी गोपनीय स्तर पर जांच में जुटी है. एसआईटी के प्रमुख राजेन्द्र कुमार इस मामले को लेकर गोपनीय तरीके से जांच कर रहे हैं. उन्होंने एसआईटी को मिले हार्डडिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन आदि डिजिटल सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया है, इसके अलावा अब मामले में जांच में गिरफ्तार की गई महिलाओं से पूछताछ की तैयारी कर ली है. 

मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य, वीडियो क्लिप्स के बारे में एसआईटी अब उन नेताओं और अफसरों से सवाल-जवाब करेगी, जिनकी तस्वीरें वीडियो में दिखाई दे रही हैं. वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों को यह क्लिप दिखाकर पुष्टि की जाएगी कि उसमें वह हैं या नहीं. 

सूत्रों की माने तो इस मामले में एसआईटी आईएएस अधिकारियों से पहले पूछताछ करेगी, इसके बाद नेताओं से पूछताछ की जाएगी. इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि एसआईटी के हाथ जो वीडियो लगे हैं, उनमें नेताओं से ज्यादा संख्या आईएएस अधिकारियों की है.

उल्लेखनीय है कि इंदौर पुलिस ने नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, आरती दयाल और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था. ब्लैकमेल करने की धमकी देकर आरती दयाल ने इंजीनियर से तीन करोड़ रुपये मांगे थे. उनके पास से कई पूर्व मंत्रियों, कुछ कारोबारियों और प्रदेश के एक दर्जन आईएएस अफसरों के ऑडियो-वीडियो मिले थे. 

एसआईटी अब इन वीडियो को दिखाकर नेताओं और अफसरों से यह पूछेगी कि आप संबंधित महिलाओं को पहचानते हैं या नहीं. जिन-जिन एनजीओ को अफसरों ने काम दिए हैं उनके आदेश की कापी भी गिरफ्तार महिलाओं के लैपटाप और मोबाइल में मिली हैं.

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