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एसएचओ गोपाल कृष्ण और सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने एडीजे अविनाश कुमार को दी थी गाली, पटना हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

By एस पी सिन्हा | Updated: November 29, 2021 18:26 IST

मधुबनी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अविनाश कुमार द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाईकोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया है.

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ठळक मुद्देन्यायामूर्ति राजन गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बंद लिफाफा में रिपोर्ट सौंपी गई.आखिर पुलिस अधिकारियों ने लोडेड हथियार के साथ एक जज के चैम्बर में कैसे प्रवेश किया? कोर्ट ने इस मामले में सहयोग के लिए ’एमिकस क्यूरी’ नियुक्त करने का निर्णय लिया है.

पटनाः बिहार में मधुबनी जिले के झंझारपुर कोर्ट के एडीजे अविनाश कुमार पर किये गए कथित मारपीट की घटना के मामले पर आज पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. न्यायामूर्ति राजन गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बंद लिफाफा में रिपोर्ट सौंपी गई.

 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि आखिर पुलिस अधिकारियों ने लोडेड हथियार के साथ एक जज के चैम्बर में कैसे प्रवेश किया? कोर्ट ने इस मामले में सहयोग के लिए ’एमिकस क्यूरी’ नियुक्त करने का निर्णय लिया है. इस मामलें पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य की पुलिस दोनों पक्षों के मामलों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से अनुसंधान करने में सक्षम है.

दोनों पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. महाधिवक्ता ने कहा कि यदि चाहे तो कोर्ट सीबीआई समेत किसी भी एजेंसी से मामले की जांच करवा सकता है. मधुबनी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अविनाश कुमार द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाईकोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया है.

साथ ही कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डीजीपी, गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था. भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार घटना के दिन तकरीबन दो बजे दिन में एसएचओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने एडीजे अविनाश कुमार के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दी.

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई करने का काम किया था. इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट करने का काम किया था. पुलिस अधिकारियों ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर आक्रमण करना चाहा. 

पटना हाईकोर्ट ने 18 नवंबर को कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह प्रकरण न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के डीजीपी को अगली सुनवाई में भी उपस्थित रहने को कहा गया. इस मामले पर आगे की सुनवाई अब 1 दिसम्बर,2021 को की जाएगी.

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