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जबलपुरः 4.39 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति, सोने-चांदी के आभूषण, सात मोटरसाइकिल सहित 14 वाहन, हेड कांस्टेबल के दो ठिकानों पर छापेमारी

By भाषा | Updated: November 3, 2021 15:23 IST

एक मकान, कृषि भूमि, फार्महाउस, सोने-चांदी के आभूषण, सात मोटरसाइकिल सहित 14 वाहन शामिल हैं। 

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ठळक मुद्देआय के ज्ञात स्रोतों से अधिक 4.39 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का पता लगाया है।जबलपुर के तिलवारा थाने में तैनात सच्चिदानंद सिंह के आवास और फार्म हाउस पर छापा मारा गया.

जबलपुरः मध्य प्रदेश की लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को प्रदेश पुलिस के एक हेड कांस्टेबल के दो ठिकानों पर यहां छापेमारी की और कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक 4.39 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का पता लगाया है।

लोकायुक्त पुलिस उपाधीक्षक जे पी वर्मा ने बताया कि जबलपुर के तिलवारा थाने में तैनात सच्चिदानंद सिंह के आवास और फार्म हाउस पर छापा मारा गया और 4.39 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के दस्तावेज और अन्य संपत्ति का पता चला। वर्मा ने कहा कि इनमें एक मकान, कृषि भूमि, फार्महाउस, सोने-चांदी के आभूषण, सात मोटरसाइकिल सहित 14 वाहन शामिल हैं। 

आयकर छापेमारी में कर्नाटक के निर्माण समूह की 70 करोड़ की अघोषित आय का पता चला

आयकर विभाग ने कर्नाटक के एक अग्रणी निर्माण समूह पर हाल ही में डाले गए छापे में 70 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित आय का पता लगाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बुधवार को जारी एक बयान में बताया कि आयकर विभाग के तलाशी अभियान के दौरान 70 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाबी आय के बारे में पता चला है।

कंपनी ने इसे अपनी अघोषित आय के तौर पर स्वीकार भी कर लिया है। आयकर विभाग ने गत 28 अक्टूबर को इस निर्माण कंपनी के उत्तर कर्नाटक स्थित कई ठिकानों की तलाशी के लिए अभियान चलाया था। आयकर विभाग की नीति-निर्धारक संस्था सीबीडीटी ने बताया कि यह निर्माण समूह कच्चे माल की खरीद, श्रमिकों पर आने वाली लागत और छोटे ठेकेदारों को भुगतान से जुड़े 'फर्जी' कागजात पेश कर अपने मुनाफे को 'दबाने' की कोशिश करता रहा है। जब्त दस्तावेजों की पड़ताल से पता चला है कि निर्माण सामग्रियों के वेंडरों एवं आपूर्तिकर्ताओं से समूह के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति ने बेहिसाबी नकद राशि ली है।

समूह ने अपने अधिकारियों के रिश्तेदारों, दोस्तों एवं कर्मचारियों को भी उप-ठेकेदारों के तौर पर दिखाया जबकि उनके पास निर्माण कार्यों की कोई क्षमता एवं योग्यता नहीं थी। सीबीडीटी के मुताबिक, आयकर विभाग के तलाशी अभियान से पता चला है कि यह निर्माण समूह इस तरह के लेनदेन से बेहिसाबी नकदी जुटा रहा था।

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