गौतम बुद्ध विवि के कुलसचिव विश्वास त्रिपाठी बर्खास्त, न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता पूरी नहीं करने पर कार्रवाई?, फीस घोटाला सहित कई मामले

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 13, 2026 09:49 IST2026-04-13T09:48:05+5:302026-04-13T09:49:47+5:30

विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड ने अभिलेखों की जांच और डॉ. त्रिपाठी का पक्ष व्यक्तिगत रूप से सुनने के बाद पाया कि उनकी नियुक्ति विधि-विरुद्ध है।

Gautam Buddha University Greater Noida  Registrar Vishwas Tripathi dismissed action taken not fulfilling minimum academic and administrative qualifications | गौतम बुद्ध विवि के कुलसचिव विश्वास त्रिपाठी बर्खास्त, न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता पूरी नहीं करने पर कार्रवाई?, फीस घोटाला सहित कई मामले

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Highlightsडॉ. त्रिपाठी ने अपने अनुभव से संबंधित तथ्यों को भ्रामक और अपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया थासेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया।अवमानना याचिका किए जाने कारण यह ‘‘द्वेषपूर्ण कार्रवाई’’ की गई है।

नोएडाः ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के कुलसचिव विश्वास त्रिपाठी को पद के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता पूरी नहीं करने के कारण बर्खास्त कर दिया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रभारी कुलसचिव प्रो. चंद्र कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. त्रिपाठी ने आवश्यक न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद इस पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कहा कि दस्तावेज परीक्षण समिति ने जांच के दौरान पाया कि डॉ. त्रिपाठी ने अपने अनुभव से संबंधित तथ्यों को भ्रामक और अपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया था।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड ने अभिलेखों की जांच और डॉ. त्रिपाठी का पक्ष व्यक्तिगत रूप से सुनने के बाद पाया कि उनकी नियुक्ति विधि-विरुद्ध है। इसके बाद उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

इस बीच, डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि वह इस पद के लिए पूरी तरह योग्य हैं और उनके द्वारा कुलपति के खिलाफ उच्च न्यायालय में दायर अवमानना याचिका किए जाने कारण यह ‘‘द्वेषपूर्ण कार्रवाई’’ की गई है। उन्होंने कहा कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय में आपत्ति दाखिल करेंगे। त्रिपाठी ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मामला भी द्वेषपूर्ण तरीके से दर्ज कराया गया है।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में फीस घोटाले के आरोप लगने के बाद लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर बोर्ड को भी फीस को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। छात्रों का आरोप है कि नकद में फीस लेने के बाद उन्हें विश्वविद्यालय की मोहर लगी जाली रसीद दी गई।

छात्रों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग और विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ छात्र, कनिष्ठ छात्रों को फीस कम कराने का झांसा देकर उनसे नकद पैसे ले लेते थे। हालांकि, यह रकम विश्वविद्यालय के खातों में जमा नहीं की जाती थी और फीस जमा नहीं होने के कारण बाद में परीक्षा में बैठने से रोके जाने पर छात्रों को ठगी का पता चलता था।

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