2 बड़े फैसले, नाबालिग बेटी से दुष्कर्म और गर्भवती करने के जुर्म में पिता को उम्रकैद और 18 माह के बेटे की हत्या के जुर्म में मां शरण्या वलसराज को उम्रकैद
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 22, 2026 17:06 IST2026-01-22T17:05:13+5:302026-01-22T17:06:33+5:30
अदालत ने कहा, ‘पिता पर बेटी की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का दायित्व होता है, उसे ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। न्यायालय की राय में, सजा को निलंबित करने की याचिका पूरी तरह निराधार है। वास्तव में, अपील ही निराधार है...।’

सांकेतिक फोटो
नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने के जुर्म में उसके पिता को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पिता का कर्तव्य अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, उसे किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ पिता की अपील पर उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह फैसला इस तथ्य के बावजूद लिया कि सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गई थीं।
पीठ ने भ्रूण के डीएनए परीक्षण के परिणाम को ध्यान में रखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता ने अपनी ही बेटी के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे, जो उनके रिश्ते को देखते हुए एक "जघन्य अपराध" था। घटना के समय लड़की 14 वर्ष की थी। पीठ ने 15 जनवरी को सुनाए गए अपने फैसले में कहा ‘‘परिवार की सामाजिक परिस्थितियां और आर्थिक स्थिति अभियोक्ता और उसकी मां को विरोधाभासी बयान देने या मुकर जाने के लिए विवश कर सकती हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में अदालत रिकॉर्ड पर आए वैज्ञानिक साक्ष्यों को पूरी तरह से अनदेखा नहीं कर सकती।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ एक पिता, जिस पर अपनी बेटी की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का दायित्व होता है, उसे ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। इस न्यायालय की राय में, सजा को निलंबित करने की याचिका पूरी तरह निराधार है। वास्तव में, अपील ही निराधार है...।’’
प्राथमिकी 2021 में दर्ज की गई थी जब पीड़िता अपनी मां के साथ पुलिस थाने गई और बताया कि जब वह सो रही थी तब उसके पिता ने उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए थे। शिकायत के वक्त लड़की तीन महीने की गर्भवती थी। इसके बाद गर्भावस्था को समाप्त कर दिया गया और भ्रूण के नमूनों को परीक्षण के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया।
केरल में 18 महीने के अपने बेटे की हत्या के जुर्म में मां को उम्रकैद
कन्नूर में तालीपरम्बा की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को एक महिला को 18 महीने के अपने बेटे की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई। तालीपरम्बा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत के.एन. ने शरण्या वलसराज (28) को उसके बेटे की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शरण्या ने 17 फरवरी, 2020 को घर में सो रहे वियान को अपने साथ ले गई और उसे समुद्र की दीवार पर फेंक दिया। बाद में बच्चे का शव समुद्र तट पर चट्टानों के बीच मिला। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शरण्या ने अपने कथित प्रेमी निधिन पी. के साथ संबंध जारी रखने के लिए इस अपराध को अंजाम दिया था।
पुलिस ने बताया था कि घटना के समय वह प्रणव की पत्नी थी। हालांकि, सुनवाई के बाद अदालत ने निधिन पी. को सभी आरोपों से बरी कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भादंसं की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि प्रणव को दी जाए।
अभियोजन पक्ष ने सजा पर सुनवाई के दौरान अधिकतम सजा की मांग की थी जबकि बचाव पक्ष ने दोषी की कम उम्र का हवाला देते हुए नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 43 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साथ ही 19 सबूत और 81 दस्तावेज भी पेश किये गये।