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उम्र कैद की सजा के खिलाफ अरूण गवली की अपील पर न्यायालय का महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

By भाषा | Updated: January 27, 2020 17:48 IST

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गवली को उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी। शिव सेना पार्षद कमलाकर जमसांदेकर की दो मार्च, 2007 को उनके घर में ही दो व्यक्तियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। अभियोजन के अनुसार महाराष्ट्र के विधायक अरूण गवली के इशारे पर कथित रूप से भाड़े के हत्यारों ने इस वारदात को अंजाम दिया था।

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ठळक मुद्देअरूण गवली की उम्र कैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया।उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गवली को उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी।

उच्चतम न्यायालय ने शिव सेना के पार्षद की हत्या के मामले में, गैंगस्टर से नेता बने अरूण गवली की उम्र कैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के पिछले साल नौ दिसंबर के फैसले के खिलाफ गवली की अपील पर यह नोटिस जारी किया।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गवली को उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी। शिव सेना पार्षद कमलाकर जमसांदेकर की दो मार्च, 2007 को उनके घर में ही दो व्यक्तियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। अभियोजन के अनुसार महाराष्ट्र के विधायक अरूण गवली के इशारे पर कथित रूप से भाड़े के हत्यारों ने इस वारदात को अंजाम दिया था।

अभियोजन ने कहा था कि इस मामले के अनेक आरोपी गवली के संगठित सिन्डीकेट के सदस्य थे और उन्होंने ही राजनीतिक प्रतिद्वन्दिता के कारण शिव सेना पार्षद की हत्या की साजिश रची थी। गवली ने अपनी अपील में उच्च न्यायालय के नौ दिसंबर, 2019 के फैसले को चुनौती दी है। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गवली को उम्र कैद की सजा का निचली अदालत का अगस्त, 2012 फैसला उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था।

उच्च न्यायालय ने गवली के साथ ही कई अन्य अभियुक्तों की दोषसिद्धि और सजा भी बरकरार रखी थी। इस मामले में दायर आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया था कि मुंबई के उपनगर में भूमि के एक सौदे को लेकर शिव सेना के पार्षद की हत्या के लिये 30 लाख रूपए दिये गये थे। पुलिस ने अरूण गवली को 21 मई, 2008 को गिरफ्तार किया था। गवली इस समय महाराष्ट्र की जेल में बंद है। 

टॅग्स :महाराष्ट्रसुप्रीम कोर्टअरुण गोविल
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