पटनाः बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में एसआईटी ने अपनी जांच तेज कर दी है। घटना को लेकर पटना पुलिस और सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी का गठन किया है। जिसकी कमान पटना के आईजी जितेंद्र राणा ने खुद संभाल ली है। शनिवार की सुबह आईजी जितेंद्र राणा खुद शंभू हॉस्टल पहुंचे और घटनास्थल की बारिकी से जांच की। पटना आईजी के साथ एसआईटी टीम में शामिल सभी पुलिसकर्मी मौक पर मौजूद रहे।
आईजी ने एसआईटी को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं और कहा है कि मामले में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे उन्हें किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। दरअसल, बीते दिनों पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल के कमरे से जहानाबाद की मेडिकल परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्रा को बेहोशी की हालत में बरामद किया गया था।
जिसके बाद उसे आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि लड़की से साथ दुष्कर्म की घटना हुई है। हालांकि पटना पुलिस के एएसपी और खुद पटना के एसएसपी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दुहाई देते रहे।
आखिरकार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई और उस रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की आशंका जताई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पटना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे तो गृहमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी का गठन किया। गृह मंत्री के निर्देश पर डीजीपी ने आईजी पटना जितेन्द्र राणा के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया।
गठित एसआईटी में सिटी एसपी (पूर्वी) परिचय कुमार के साथ एक महिला डीएसपी, एक महिला इंस्पेक्टर, एक पुरुष इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और कांस्टेबल शामिल हैं। एसआईटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पटना आईजी पूरे अनुसंधान पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।
उल्लेखनीय है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उस हर दावे को बेनकाब कर दिया है, जिसमें पुलिस शुरुआत में यौन शोषण से इनकार करती रही। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक हैवानों से लोहा लिया। उसके जिस्म पर दर्ज जख्म गवाही दे रहे हैं कि यह कोई अचानक बिगड़ी हालत नहीं, बल्कि सुनियोजित, बेरहम और लंबा अपराध था।
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के शरीर पर जो चोटें पाई गईं, वे सभी मौत से पहले की हैं। यानी कत्ल से पहले जुल्म की पूरी दास्तान लिखी जा चुकी थी। गर्दन और कंधे के आसपास अर्धचंद्राकार नाखून के गहरे निशान मिले हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे जख्म तब बनते हैं, जब पीड़िता अपनी जान बचाने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करती है और हमलावर उसे दबोचने की कोशिश करता है। यह साफ संकेत है कि छात्रा बेहोश नहीं थी, बल्कि आखिरी सांस तक लड़ रही थी। अब जब छीछालेदर के बाद सिस्टम हरकत में आया है, तो एसएसपी से लेकर डीजीपी तक ने जांच का दायरा बढ़ाने की बात कही है। मोबाइल की फोरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है। सवाल यही है क्या यह जांच सच तक पहुंचेगी या फिर यह केस भी फाइलों की अंधेरी अलमारी में दफन कर दिया जाएगा?