आईएएस संजीव हंस चलाता था संगठित नेटवर्क, सीधे पैसे लेने के बजाय 9 लोगों को दिया काम, ऐसा खाया कमीशन

By एस पी सिन्हा | Updated: March 26, 2026 17:04 IST2026-03-26T17:01:46+5:302026-03-26T17:04:12+5:30

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विशेष निगरानी इकाई (एसयूवी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

bihar ias Sanjeev Hans ran organized network Instead taking money network 9 people commissions contractors and businessmen | आईएएस संजीव हंस चलाता था संगठित नेटवर्क, सीधे पैसे लेने के बजाय 9 लोगों को दिया काम, ऐसा खाया कमीशन

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Highlightsहंस ने सीधे पैसे लेने के बजाय अपने करीब 9 लोगों का एक नेटवर्क बनाया था। अलग-अलग राज्यों में निवेश किया गया, जिसे बेनामी संपत्ति माना जा रहा है।निजी कंपनी के निदेशक ने भी “एस सर” को संजीव हंस बताया है।

पटनाः बिहार के कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस के मामले की जांच  में जुटी जांच एजेंसियों को एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। संजीव हंस करीब एक साल जेल में रहने के बाद वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विशेष निगरानी इकाई (एसयूवी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर हंस ने सीधे पैसे लेने के बजाय अपने करीब 9 लोगों का एक नेटवर्क बनाया था। ये लोग बिचौलियों की तरह काम करते थे। ठेकेदारों और कारोबारियों से कमीशन लेते थे, फिर रकम को हवाला और बैंक ट्रांसफर के जरिए आगे बढ़ाते थे।  एजेंसियों का दावा है कि इस पैसे को अलग-अलग राज्यों में निवेश किया गया, जिसे बेनामी संपत्ति माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि जल संसाधन विभाग में पोस्टिंग के दौरान “एस सर” नाम के कोड से लेन-देन दर्ज किए गए। ईडी सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क में हर सदस्य की भूमिका तय थी। कोई पैसे इकट्ठा करता था, कोई ट्रांसफर संभालता था और कोई निवेश। एक निजी कंपनी के निदेशक ने भी “एस सर” को संजीव हंस बताया है। इससे पहले भी हंस विवादों में रहे हैं।

एक महिला वकील ने उन पर और पूर्व विधायक गुलाब यादव पर सामूहिक दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। महिला ने दावा किया था कि उसके साथ कई बार दबाव और नशा देकर दुष्कर्म किया गया और उसे ब्लैकमेल किया गया। हालांकि, यह मामला बाद में अदालत में टिक नहीं पाया और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया, जिससे हंस को इस केस में राहत मिली।

लेकिन इसी जांच के दौरान कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आए, जिसके बाद ईडी ने जांच शुरू की। 18 अक्टूबर 2025 को पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। बाद में उनका निलंबन भी समाप्त कर दिया गया और उन्हें नई पोस्टिंग दे दी गई। फिलहाल स्थिति यह है कि दुष्कर्म का मामला खत्म हो चुका है, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच अभी जारी है, और हाल में एक करोड़ रुपये की कथित घूस से जुड़ा नया केस भी इसमें जुड़ गया है।

Web Title: bihar ias Sanjeev Hans ran organized network Instead taking money network 9 people commissions contractors and businessmen

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