बिहार फर्जी नियुक्तः 2006 से 2015 के बीच दस्तावेजों की जांच, कुल 2953 शिक्षकों को आरोपी बनाया, जा सकते जेल,  वेतन और मानदेय में 1400 करोड़ रुपये खर्च?

By एस पी सिन्हा | Updated: March 31, 2026 15:43 IST2026-03-31T15:42:03+5:302026-03-31T15:43:16+5:30

Bihar fake appointments: फर्जी मार्कशीट, डुप्लीकेट सर्टिफिकेट और बिना मान्यता वाले विश्वविद्यालयों की डिग्रियों का भी उपयोग किया गया।

Bihar fake appointments Documents examined 2006 and 2015 total 2953 teachers accused may go to jail Rs 1400 crore spent salary and honorarium | बिहार फर्जी नियुक्तः 2006 से 2015 के बीच दस्तावेजों की जांच, कुल 2953 शिक्षकों को आरोपी बनाया, जा सकते जेल,  वेतन और मानदेय में 1400 करोड़ रुपये खर्च?

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HighlightsBihar fake appointments: करीब 1400 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। अब सरकार इनसे यह राशि वसूलने की तैयारी कर रही है।Bihar fake appointments: जांच के दौरान 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की गई।Bihar fake appointments: जांच में यह भी सामने आया कि कई शिक्षकों ने गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री ली थी।

पटनाः बिहार में शिक्षा विभाग ने फर्जी तरीके से नियुक्त शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से लगातार जांच की जा रही है। ऐसे में विभाग के इस फैसले के तहत ऐसे शिक्षकों की नौकरी समाप्त की जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, जिसमें जेल की सजा तक शामिल है। दरअसल, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आई हैं। हजारों शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जांच के दौरान 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की गई।

इसमें सबसे अधिक फर्जी नियुक्तियों के मामले नालंदा जिले में मिले, जहां लगभग 165 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। इसके बाद मधुबनी में 145 और अररिया में केवल 4 मामले सामने आए हैं। इस जांच में कुल 2953 शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है। इन शिक्षकों ने वेतन और मानदेय के रूप में करीब 1400 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। अब सरकार इनसे यह राशि वसूलने की तैयारी कर रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि कई शिक्षकों ने गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री ली थी। कुछ मामलों में एक ही डिग्री के आधार पर अलग-अलग जगहों पर नौकरी ली गई, जबकि कुछ ने दूसरों के नाम या रोल नंबर का इस्तेमाल किया। इसके अलावा फर्जी मार्कशीट, डुप्लीकेट सर्टिफिकेट और बिना मान्यता वाले विश्वविद्यालयों की डिग्रियों का भी उपयोग किया गया।

अब शिक्षा विभाग ऐसे सभी मामलों में सेवा समाप्ति, पैसे की वसूली और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

जानकारी के मुताबिक, शिक्षकों ने गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री ली, एक ही डिग्री पर कई जिलों में नौकरी की, दूसरे के रोल नंबर या फिर नाम पर फोटो चिपकाई थी या फिर यूजीसी से मान्यता नहीं रखने वाले प्राइवेट यूनिवर्सिटी की डिग्री डुप्लीकेट मार्कशीट और सर्टिफिकेट जमा किया। इन्हीं सब मामलों में फर्जी पाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Web Title: Bihar fake appointments Documents examined 2006 and 2015 total 2953 teachers accused may go to jail Rs 1400 crore spent salary and honorarium

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