बिहार में हर साल गायब हो रहे 15 हजार बच्चे, पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा

By एस पी सिन्हा | Updated: March 11, 2026 14:50 IST2026-03-11T14:49:36+5:302026-03-11T14:50:46+5:30

Bihar:उन्होंने यह भी बताया कि साइबर स्लेवरी गैंग भी सक्रिय हैं। ये गिरोह लोगों को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर पासपोर्ट बनवाते हैं और फिर उन्हें दूसरे देशों में ले जाकर जबरन काम करवाते हैं।

Bihar DGP revealed that approximately 15000 children go missing in state every year but police are only able to find 5000 to 6000 children | बिहार में हर साल गायब हो रहे 15 हजार बच्चे, पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा

बिहार में हर साल गायब हो रहे 15 हजार बच्चे, पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा

Bihar: बिहार के पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) ने खुलासा किया है कि राज्य में हर साल करीब 15 हजार बच्चे गायब हो रहे हैं। जिनमें से 5 से 6 हजार बच्चों को तो पुलिस खोज भी नहीं पाती है। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस मानव तस्करी को लेकर सख्त है और लगातार कार्रवाई भी कर रही है। मानव तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार एक्शन भी लिए जा रहे हैं। विनय कुमार ने कहा कि मानव तस्करी रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन भी काम कर रहे हैं। डीजीपी बुधवार को एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

डीजीपी ने बताया कि कई मामलों में ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के नाम पर नाबालिग लड़कियों को काम पर लगाया जाता है, जहां उनका शोषण किया जाता है। इसके अलावा नेपाल से भी लड़कियों को लाकर अवैध गतिविधियों में धकेलने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा की कमी और गरीबी के कारण लोग ऐसे गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं। यह एक संगठित अपराध है, जिसके जरिए गिरोह आर्थिक गतिविधियां चलाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि साइबर स्लेवरी गैंग भी सक्रिय हैं। ये गिरोह लोगों को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर पासपोर्ट बनवाते हैं और फिर उन्हें दूसरे देशों में ले जाकर जबरन काम करवाते हैं।

पुलिस अब तक सैकड़ों लोगों को ऐसे गिरोहों के चंगुल से छुड़ा चुकी है। विनय कुमार ने बताया कि कई मामलों में संतानहीन दंपत्ति अवैध तरीके से बच्चों की खरीद-फरोख्त कर अपनी संतान की इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा बाल मजदूरी के मामले भी लंबे समय से सामने आते रहे हैं। पुलिस दूसरे राज्यों में ले जाए गए बच्चों को भी रेस्क्यू कर वापस ला रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर है और कई गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। जो भी बच्चा रेस्क्यू किया जाता है, उसे सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कोशिश की जाती है ताकि आर्थिक तंगी के कारण वह दोबारा बाल मजदूरी की ओर न जाए।

विनय कुमार ने बताया कि मानव तस्करी में से लगभग 5 से 6 हजार बच्चों का पता नहीं चल पाता, जबकि बाकी बच्चों को पुलिस ट्रेस कर वापस उनके परिवार तक पहुंचा देती है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी पर रोक लगाने के लिए बिहार में डीएसपी स्तर का विशेष पद भी बनाया गया है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

Web Title: Bihar DGP revealed that approximately 15000 children go missing in state every year but police are only able to find 5000 to 6000 children

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