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बिहार: 15 लाख की घूस नहीं देने पर ठेकेदार को जिंदा जलाया, इंजीनियर पर हत्या का आरोप

By एस पी सिन्हा | Updated: August 30, 2019 18:22 IST

ठेकेदार के बेटे ने आरोप लगाया है कि 60 लाख रुपये के भुगतान के लिए मुख्य अभियंता रिश्वत में 15 लाख रुपये मांग रहे थे. पैसा नहीं देने पर पिता को जला दिया गया.

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बिहार के गोपलगंज जिले के नगर थाना क्षेत्र के गंडक कालोनी में 15 लाख की घूस के कारण एक ठेकेदार को जिंदा जला दिये जाने के बाद स्थिती तनावपूर्ण हो गई गई है. घटना के बाद इलाके में सनसनी मच गई. मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है. पूरा मामला गंडक नहर परियोजना से जुड़ा हुआ है. घूस को लेकर इस तरह हृदयविदारक घटना से हर कोई हतप्रभ है. इसके पीछे एक मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह का नाम सामने आ रहा है. हालांकि वारदात के बाद से इंजीनियर फरार है. मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जगह-जगह छापेमारी शुरू कर दी है.

वहीं, ठेकेदार रामाशंकर सिंह की हत्या का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती है. मौत के बाद एक के बाद एक आरोप से पुलिस भी जांच में उलझ गई है, इसलिए फॉरेंसिक टीम का सहारा लिया जा रहा है. रामाशंकर सिंह के परिजनों ने पहले पेट्रोल से जलाकर मारने का आरोप लगाया, इसके बाद शाम में शव पहुंचते ही तेजाब से नहलाकर मारने का आरोप लगाया. 

परिजनों के मुताबिक मृतक ठेकेदार की आंख बाहर निकल आई है. शरीर से तेजाब की गंध आ रही थी. उधर, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने ज्वलनशील पदार्थ से जलने की बात बताई, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है. अस्पताल में डॉक्टरों के बीच ठेकेदार को तेजाब पिलाये जाने की चर्चा रही, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई. ठेकेदार की मौत तेजाब से नहलाकर हुई है या नहीं, पुलिस भी इस पर कुछ भी बताने से परहेज कर रही है. एसपी राशिद जमां का कहना है कि फॉरेंसिक टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है. फॉरेंसिक जांच के बाद पूरा मामला स्पष्ट हो जायेगा. जांच के लिए कमरे को सील कर दिया गया है. 

वहीं, कमरे के बाहर कुछ कपड़े जले हुए मिले हैं, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है. घटनास्थल पर बोतल समेत ऐसे कई सबूत पुलिस ने बरामद किए हैं, जिससे घटना का खुलासा करने में मदद मिलेगी. उधर, स्वास्थ्य विभाग ने भी मृतक ठेकेदार के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए मेडिकल टीम का गठन किया है.

गोरखपुर से शव के आने का इंतजार हो रहा था. पुलिस का कहना था कि शव आने के बाद सीधे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा जायेगा. प्रभारी सिविल सर्जन डॉ पीएन राम ने बताया कि डीएम के आदेश पर मेडिकल बोर्ड गठन किया जायेगा. पोस्टमार्टम के बाद यह स्पष्ट हो जायेगा कि ठेकेदार की मौत तेजाब से नहलाकर हुई या किसी अन्य ज्वलनशील पदार्थ से.  

जानकारों के अनुसार ठेकेदार रामाशंकर सिंह अकेले विभाग में नहीं जाते थे. उनके साथ कर्मी या बेटे अक्सर रहते थे. परिजनों का कहना है कि गुरुवार को कॉल करके चीफ इंजीनियर मुरलीधर सिंह ने अपने सरकारी आवास पर बुलाया था. आवास पर पहुंचते ही मारपीट की और गार्ड रूम में बंद कर आग लगा दी. ऐसे में सवाल अब उठ रहा है कि रूम में बंद करने के बाद आग लगाई गई या तेजाब से नहलाया गया तो दरवाजा किसने खोला?

सदर अस्पताल तक पहुंचाने के बाद जल संसाधन विभाग के कर्मी कहां गायब हो गये? पुलिस अधिकारी इन तमाम बिंदुओं पर जांच कर रहे हैं. बता दें कि गंडक नहर परियोजना के चीफ इंजीनियर (मुख्य अभियंता) मुरलीधर सिंह के आवास में ठेकेदार को केरोसिन में नहलाकर जला दिया गया.

गोरखपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. शहर के स्टेशन रोड स्थित गंडक परियोजना के कैंपस में मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास में यह घटना गुरुवार को हुई. ठेकेदार के पुत्र ने आरोप लगाया है कि 60 लाख रुपये के भुगतान के लिए मुख्य अभियंता रिश्वत में 15 लाख रुपये मांग रहे थे. नहीं देने पर जला दिया गया है.बताया जाता है कि मृतक ठेकेदार रमाशंकर नगर थाना क्षेत्र के राजेन्द्र नगर मुहल्ले का निवासी थे और काफी वर्षों से गंडक विभाग में ठेकेदारी करते थे. परिजनों का आरोप है कि मुख्य अभियंता ने ही पेट्रोल डालकर उसे जला दिया है. दरअसल, गंडक विभाग के सरकारी आवास बनाने के लिए वर्ष 2018 में टेंडर निकाला गया था. इसमें बाद में 85 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई थी. इसी 85 लाख रुपये में से 60 लाख रुपये बकाया था, जिसकी मांग ठेकेदार करता आ रहा था. लेकिन इंजीनियर हमेशा उसे टाल देता था. इस बीच गुरुवार को मुख्य इंजीनियर ने फोन कर डाक्यूमेंट्स के साथ ठेकेदार को अपने आवास पर बुलाया. हालांकि ठेकेदार ने पहले ही सभी डाक्यूमेंट्स जमा कर दिया गया था, बावजूद इसके उससे डाक्यूमेंट्स मांगे गए थे. ठेकेदार अभियंता के घर जैसे ही पहुंचा वैसे ही चीफ इंजीनियर ने उससे बकाया राशि भुगतान करने की एवज में 15 लाख रुपये घूस के रूप में मांगी. इस पर दोनों में विवाद बढ़ गया. सूत्रों की मानें तो विवाद इस कदर बढ़ गया कि इंजीनियर ने ठेकेदार के ऊपर पहले एसिड डाला और फिर उसे आत्महत्या दिखाने के लिए पेट्रोल डाल कर आग लगा दिया. मामले में सदर एसडीपीओ नरेश पासवान ने बताया कि ये हत्या है या आत्महत्या इसकी जांच की जा रही है. फिलहाल मुख्य अभियंता फरार है. ठेकेदार के शोर मचाने पर लोग पहुंचे. वहीं, घटना के बाद लोगों ने अपने घरों में ताला लगाकर पूरी कॉलोनी को खाली कर दिया है, जिससे वहां सन्नाटा पसर गया है. पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए रातभर कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की. इस मामले की जांच को लेकर एसआईटी भी गठित की गई है. सूत्रों की मानें तो घटना स्थल से एक प्लास्टिक का गैलन बरामद हुआ है. इस मामले में मृतक ठेकेदार के पुत्र राणा प्रताप सिंह के बयान पर मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह, अधीक्षण अभियंता जितेंद्र प्रसाद, कार्यपालक अभियंता सतेंद्र कुमार के अलावा 4 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया है. जिनपर ठेकेदार को बकाए रुपये देने के लिए बुलाकर आग लगाने का आरोप लगाया गया है. वहीं, एसपी राशिद जमा ने बताया कि इस मामले की जांच फॉरेंसिक के साथ-साथ फाइनेंशियल टीम भी करेगी. वहीं, डीएम अनिमेष पराशर ने कहा कि किसी भी हाल में आरोपी बख्से नहीं जाएंगे, मामले की निष्पक्ष जांच होगी.

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