राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे जनगणना के बीच सक्रिय हुए साइबर अपराधी, खुद को जनगणना कर्मी बताकर लोगों को बना रहे हैं ठगी का शिकार

By एस पी सिन्हा | Updated: May 11, 2026 18:00 IST2026-05-11T18:00:09+5:302026-05-11T18:00:19+5:30

सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर जनगणना को लेकर भ्रामक संदेश और वीडियो वायरल किए जा रहे हैं. इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि जनगणना कर्मी लोगों से बैंक खाता विवरण, यूपीआई पिन, ओटीपी, पैन व आधार संख्या जैसी निजी वित्तीय जानकारी मांग रहे हैं.

Amidst the ongoing national-level census, cybercriminals have become active, posing as census officials to defraud people | राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे जनगणना के बीच सक्रिय हुए साइबर अपराधी, खुद को जनगणना कर्मी बताकर लोगों को बना रहे हैं ठगी का शिकार

राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे जनगणना के बीच सक्रिय हुए साइबर अपराधी, खुद को जनगणना कर्मी बताकर लोगों को बना रहे हैं ठगी का शिकार

पटना: राष्ट्रीय स्तर पर जनगणना 2026-27 (स्व-गणना) की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही बिहार में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया जाल बिछा दिया है. खुद को जनगणना कर्मी बताकर ठग मोबाइल कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए लोगों से बैंक खाता, आधार, ओटीपी और अन्य वित्तीय जानकारी मांग रहे हैं. सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर जनगणना को लेकर भ्रामक संदेश और वीडियो वायरल किए जा रहे हैं. इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि जनगणना कर्मी लोगों से बैंक खाता विवरण, यूपीआई पिन, ओटीपी, पैन व आधार संख्या जैसी निजी वित्तीय जानकारी मांग रहे हैं.

यही नहीं साइबर अपराधी सरकारी लाभ दिलाने या स्व-गणना फॉर्म भरने का झांसा देकर एक फर्जी लिंक भेजते हैं, जिस पर क्लिक करते ही लोगों के बैंक खाते पल भर में खाली हो जा रहे हैं. बिहार पुलिस की साइबर इकाई ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है. दरअसल, राजधानी पटना समेत सूबे के कई जिलों से लगातार धोखाधड़ी की शिकायतें मिल रही हैं. साइबर अपराधी फोन कर कहते हैं कि आपकी स्व-गणना पूरी नहीं हुई है, जल्दी फॉर्म भरें वरना सरकारी योजनाओं का लाभ रुक जाएगा. इसके बाद वे एक लिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित का मोबाइल हैंग हो जाता है और ठगों को उनके बैंक डिटेल्स का एक्सेस मिल जाता है. पटना में एक व्यक्ति के खाते से इसी तरह 25 हजार रुपये उड़ गए, वहीं मुजफ्फरपुर की एक महिला ने 10 हजार रुपये गंवा दिए. 

बताया जाता है कि साइबर अपराधियों ने विशेष रूप से बिहार के ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाया है, जहां डिजिटल साक्षरता कम है. साइबर अपराधी जानते हैं कि गांवों में लोग सरकारी योजनाओं के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें लाभ रुकने का डर दिखाकर आसानी से फंसाया जा रहा है. हालांकि जनगणना से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि विभाग कभी भी किसी व्यक्ति को ओटीपी मांगने या फॉर्म भरने के लिए कॉल या मैसेज नहीं करता है. 

इस बीच इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है. इसके तहत स्कूलों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को सही जानकारी दी जाएगी और साइबर ठगी से बचने के उपाय बताए जाएंगे. 

बता दें कि जनगणना के अंतर्गत प्रथम चरण “मकानों का सूचीकरण एवं मकानों की गणना” कार्य दो से 31 मई 2026 तक किया जा रहा है. शिक्षा विभाग ने वायरल संदेशों को पूरी तरह भ्रामक व तथ्यहीन बताया है.अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य के दौरान किसी भी व्यक्ति या परिवार से बैंक संबंधी जानकारी, एटीएम या यूपीआई पिन, ओटीपी, पासवर्ड अथवा किसी प्रकार के वित्तीय दस्तावेज नहीं मांगे जाते हैं. 

इसके अलावा पहचान पत्र या बैंक दस्तावेज की फोटोकॉपी भी नहीं ली जाती है. विद्यालयों को निर्देश दिया है कि छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को इस संबंध में जागरूक किया जाए. इसबीच बिहार पुलिस की साइबर इकाई ने सक्रियता दिखाते हुए कई शिकायतों पर जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध कॉल आने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या ईमेल पर रिपोर्ट करें.

Web Title: Amidst the ongoing national-level census, cybercriminals have become active, posing as census officials to defraud people

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