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मुजफ्फरपुर शेल्टर केस के बाद फिर एक बालिका गृह का खुलासा, इस तरह चलता था यौन उत्पीड़न का धंधा

By एस पी सिन्हा | Updated: August 1, 2018 19:47 IST

बालिका गृह में शोषण की शिकार लड़कियां रातभर चीखतीं रहतीं थीं. लेकिन उन्हें बचाने की हिम्म्मत किसी में नहीं थी.

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पटना,1 अगस्त: मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले के बाद अब एक और बालिका गृह को लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है. मुजफ्फरपुर पुलिस को ब्रजेश ठाकुर के स्वाधार गृह से भारी मात्रा में कंडोम और शराब की बोतलें मिली है. ये आपत्तिनजक सामान शेल्टर होम की छत से बरामद की गई है. ब्रजेश का जाल नेपाल व बांग्लादेश तक फैला था. वह वहां तक लड़कियों की सप्लाई करता था. उसके गुर्गो में शूटर व चलती गाडी में दुष्कर्म करवाने वाले भी शामिल थे. ब्रजेश ठाकुर व उसके गुर्गों ने कई चेहरे लगा रखे थे. 

वहीं, बालिका गृह दुष्कर्म कांड के मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर की करीबी मधु की तलाश लंबे समय से चल रही है. लेकिन, अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है. मधु की तलाश में चतुर्भुजस्थान समेत कई जगह पर छापेमारी भी हुई है. लेकिन मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर की राजदार और बालिका गृह की कर्ता-धर्ता मधु अभी भी पुलिस और सीबीआई की गिरफ्त से बाहर है. इसबीच खबर है कि ब्रजेश का रैकेट नेपाल व बंग्लादेश तक फैला हुआ है. वहां के ग्राहक व व्यापारी यहां से जुडे थे. विदेशों में भी लडकियों को भेजा जाता था.

बालिका गृह व सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ से जुडे़ वामा शक्ति वाहिनी की मधु, लेखापाल व भंडारपाल केपी गुप्ता, नर्स मुन्नी देवी, रसोइया मंजू देवी, सफाई कर्मचारी कुंज देवी, व्यवसायिक परीक्षक किरण मसीह, स्पेशल एजुकेटर पूजा भारती पुलिस की जांच के दायरे में है. पटना और मधुबनी में भी पीड़ित लड़कियों से सीबीआई की टीम ने पूछताछ की है. ऐसे में सीबीआई की पूछताछ से समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के बीच खलबली मची रही. वहां बालिका गृह परिसर व कमरों का निरीक्षण भी की.

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इसके बाद टीम लौट गई. हालांकि, पूछताछ के संबंध में सीबीआई या पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. फिलहाल मुजफ्फरपुर स्वाधार गृह पर भारी संख्या में पुलिस मौजूद है और पूरे परिसर की तलाशी की जा रही है. जानकारी के मुताबिक एफएसएल की 6 सदस्यीय टीम ने चार कमरों को तोड़ा तो कंडोम और शराब की बोतलें मिली हैं. मौके पर एफएसएल टीम के साथ महिला थानाध्यक्ष ज्योति कुमारी और इस केस की आईओ कलावती कुमारी भी मौजूद थीं.

वहीं, पुलिस के समक्ष ब्रजेश ठाकुर के कुछ पड़ोसियों ने भी अपना बयान दर्ज कराया है. उन्होंने बताया है कि ब्रजेश दबंग प्रवृति का व्यक्ति है. उसके भय से वे तथा आसपास के लोग कुछ भी नहीं बोलते थे. उसके काम में कोई हस्तक्षेप भी नहीं करते थे. इन लोगों ने बालिका गृह की बच्चियों के चिल्लाने की कई बार आवाज सुनने का दावा भी किया. ऐसे में पुलिस चार्जशीट, केस डायरी व वरीय पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण रिपोर्ट में मुख्य अरोपित ब्रजेश ठाकुर तथा उसके रैकेट के संचालन में शामिल दलालों व कारिंदों की पूरी फेहरिस्त लिखी गई है.

यह भी ज्ञात हुआ है कि शोषण की शिकार लड़कियां रातभर चीखतीं रहतीं थीं. लेकिन उन्हें बचाने की हिम्म्मत किसी में नहीं थी. ब्रजेश का बाहरी दुनिया में समाजसेवी व पत्रकार का चेहरा लगाकर शराफत की चादर ओढ़ रखी थी. पुलिस ने इस गिरोह के संरक्षक व संचालक के तौर पर ब्रजेश ठाकुर को चिह्नित किया है. ब्रजेश अपने को अखबार का संपादक व एक न्यूज एजेंसी का रिपोर्टर बताकर सरकारी  अधिकारियों पर धौंस जमाता था. हालांकि, जेल में जब उससे पूछताछ की गई तो उसने किसी को जानने तक से इनकार कर दिया. उसकी जमानत की अर्जी पर बहस के दौरान कोर्ट में यही बात कही गई थी. 

बताया जाता है कि पुलिस चार्जशीट, केस डायरी व वरीय पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण रिपोर्ट में उसके रैकेट के संचालन में शामिल दलालों व कारिंदों की पूरी फेहरिस्त लिखी गई है. इसमें मधु, संजय उर्फ झूलन व रमाशंकर मुख्य हैं. इसके अलावा आधा दर्जन लड़कियां भी इस रैकेट में शामिल थीं. इन लड़कियों का काम ग्राहक लाना, लड़की सप्लाई करना, होटल में शराब पहुंचाना था. इससे अवैध कमाई को ब्रजेश को सौंपना था. पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रजेश ठाकुर के धंधे में मधु मुख्य कर्ताधर्ता थी. यह देह व्यापार से जुड़ी थी. सामाजिक जीवन में साफ सुथरी छवि रहे, इसके लिए वह संस्था के कार्यक्रमों में कार्यकर्ता की हैसियत से काम करती थी. 

उसे वामा शक्ति वाहिनी की कर्ताधर्ता बनाया गया. ऊंची पहुंच के बल पर उसे बेतिया एचआइवी परियोजना दिलाया गया. उसका उपयोग अधिकारियों को अपने पाले में लेकर टेंडर हासिल करने में भी किया जाता था. पत्रकार का चोला पहन कर लोगों के सामने आना वाला संजय उर्फ झूलन गोली चलाने व चलती गाड़ी में रेप करवाने में माहिर है. वह ब्रजेश ठाकुर के शाही कारोबार देखना था. वह सरकारी कार्यालयों में दलाली भी करता था. पटना में वह ब्रजेश ठाकुर के पारिवारिक अखबार का काम भी देखता था. रमाशंकर को आदर्श महिला शिल्प कला केंद्र का सचिव बनाया गया था. उसका असली काम ब्रजेश के काले धंधे का संचालन में सहयोग करना था.

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