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शादी का झांसा देकर 53 वर्षीय महिला से बलात्कार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा-जमानत देने का कोई आधार नहीं दिखता, 49 वर्षीय व्यक्ति को सजा हकदार

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 8, 2025 17:36 IST

व्यक्ति ने दावा किया कि शादी के कथित वादे को कोई विश्वसनीयता नहीं दी जा सकती, क्योंकि शिकायतकर्ता को पहले से ही पता था कि वह शादीशुदा है।

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ठळक मुद्देप्रथम दृष्टया आवेदक के खिलाफ कथित अपराध की गंभीरता को इंगित करती है।आरोपपत्र की भी जांच की, जिसमें पुरुष और महिला के बीच हुई बातचीत भी शामिल थी।आगे दावा किया कि वह वर्तमान में डीसीपी, नारकोटिक्स के रूप में प्रतिनियुक्ति पर है। 

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने शादी का झांसा देकर 53 वर्षीय महिला से बलात्कार करने के आरोपी 49 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि उनका संबंध सहमति से था और महिला को झूठे आश्वासनों के आधार पर गुमराह किया गया जो तलाकशुदा है। चार जुलाई के आदेश में कहा गया है, “तथ्य यह है कि महत्वपूर्ण गवाहों की अभी तक जांच नहीं हुई है, और रिकॉर्ड में व्हाट्सएप चैट है, जो प्रथम दृष्टया आवेदक के खिलाफ कथित अपराध की गंभीरता को इंगित करती है।

इस अदालत को इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं दिखता है।” अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि महिला की मुलाकात उस व्यक्ति से (बाइक) ‘राइडर्स ग्रुप’ के माध्यम से हुई थी, जिसका एडमिन आरोपी था और उसने खुद को नारकोटिक्स विभाग में डीसीपी बताया था। कथित तौर पर व्यक्ति महिला के घर आया और शादी का झूठा वादा कर उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए।

जब उसने शादी पर जोर दिया तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे व्हाट्सएप के जरिए तलाक की अर्जी की एक प्रति भेजी और आश्वासन दिया कि वह जल्द ही अपनी पत्नी से अलग हो जाएगा और उससे शादी कर लेगा। महिला ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति ने उसे उसकी निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की भी धमकी दी जिसके बाद वह पुलिस के पास गई और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

व्यक्ति ने जमानत का अनुरोध करते हुए दावा किया कि यह संबंध सहमति से था और 53 वर्षीय महिला, जिसका एक बड़ा बेटा है, उसे अपने कार्यों के परिणामों के बारे में अनभिज्ञ नहीं कहा जा सकता। व्यक्ति ने दावा किया कि शादी के कथित वादे को कोई विश्वसनीयता नहीं दी जा सकती, क्योंकि शिकायतकर्ता को पहले से ही पता था कि वह शादीशुदा है।

अदालत ने व्हाट्सएप चैट सहित रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर गौर करते हुए प्रथम दृष्टया पाया कि व्यक्ति ने तलाक की याचिका में जालसाजी की थी और महिला को झूठा आश्वासन दिया था कि वह तलाक लेने की प्रक्रिया में है। इसमें कहा गया है, “इन परिस्थितियों से संकेत मिलता है कि शारीरिक संबंध के लिए प्राप्त सहमति न तो सूचित थी और न ही स्वैच्छिक, बल्कि यह कपटपूर्ण प्रस्तुति (झूठे तथ्य या धोखे) के कारण थी।” अदालत ने आरोपपत्र की भी जांच की, जिसमें पुरुष और महिला के बीच हुई बातचीत भी शामिल थी,

जिसमें उसने खुद को नौसेना के पूर्व कैप्टन के रूप में पेश किया था, जो बाद में एनएसजी में शामिल हो गया था और 2008 के मुंबई हमलों के दौरान टीम का हिस्सा था। उसने आगे दावा किया कि वह वर्तमान में डीसीपी, नारकोटिक्स के रूप में प्रतिनियुक्ति पर है। 

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